भीलवाड़ा। अपनी औद्योगिक पहचान के लिए मशहूर ‘वस्त्रनगरी’ अब धीरे-धीरे ‘प्रदूषणनगरी’ की राह पर है। औद्योगिक विकास की अंधी दौड़ में पर्यावरण मानकों की अनदेखी शहरवासियों के स्वास्थ्य पर भारी पड़ रही है। शहर की सुबह अब ताजी हवा के बजाय धूल के गुबारों से हो रही है। क्रशर क्लस्टर बना मुसीबत:समोड़ी क्षेत्र के गिट्टी […]
भीलवाड़ा। अपनी औद्योगिक पहचान के लिए मशहूर 'वस्त्रनगरी' अब धीरे-धीरे 'प्रदूषणनगरी' की राह पर है। औद्योगिक विकास की अंधी दौड़ में पर्यावरण मानकों की अनदेखी शहरवासियों के स्वास्थ्य पर भारी पड़ रही है। शहर की सुबह अब ताजी हवा के बजाय धूल के गुबारों से हो रही है।
क्रशर क्लस्टर बना मुसीबत:समोड़ी क्षेत्र के गिट्टी क्रशर क्लस्टर में नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। बिना 'डस्ट सेप्रेशन सिस्टम' और बिना अनुमति के चल रहे ये क्रशर हवा में जहर घोल रहे हैं। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के सख्त निर्देशों के बावजूद, उल्लंघन करने वाली इकाइयों पर 'पर्यावरण मुआवजा शुल्क' लगाने में विभाग सुस्ती बरत रहा है।
सेहत पर प्रहार: प्रदूषण का सीधा असर जनजीवन पर दिख रहा है। एमजी अस्पताल के विशेषज्ञों के अनुसार, शहर में अस्थमा, एलर्जी, ब्रोंकाइटिस और सिलिकोसिस जैसे मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ी है। हालांकि, प्रशासन ने दूषित पानी की समस्या पर काफी हद तक काबू पाया है, लेकिन वायु प्रदूषण अब एक नया 'कालासच' बनकर फेफड़ों में घुल रहा है।
प्रशासन का पक्ष: प्रदूषण नियंत्रण मंडल के क्षेत्रीय अधिकारी दीपक धनेटवाल का कहना है कि इकाइयों की नियमित जांच कर नोटिस जारी किए जा रहे हैं और वायु प्रदूषण रोकने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। https://www.dailymotion.com/video/x9z93oc