हर के पावरलूम बुनकर तीन साल से मजदूरी नहीं बढऩे से आक्रोशित है। लूम चलाने वाले कारीकरों का पलायन बढऩे से लगातार मजदूरों की कमी हो रही है। इसका सीधा असर बुनकरों के साथ कपड़ा उत्पादन पर हो रहा है। गर्मी के समय बुरहानपुर के कपड़े की बाजार में डिमांड होने से बुनकर मजदूरी बढ़ाने की मांग कर रहे है। 25 रुपए 25 पैसे की जगह पर 29 रुपए प्रति पिक मजदूरी देने की मांग कर रहे है।
powerloom weavers. शहर के पावरलूम बुनकर तीन साल से मजदूरी नहीं बढऩे से आक्रोशित है। लूम चलाने वाले कारीकरों का पलायन बढऩे से लगातार मजदूरों की कमी हो रही है। इसका सीधा असर बुनकरों के साथ कपड़ा उत्पादन पर हो रहा है। गर्मी के समय बुरहानपुर के कपड़े की बाजार में डिमांड होने से बुनकर मजदूरी बढ़ाने की मांग कर रहे है। 25 रुपए 25 पैसे की जगह पर 29 रुपए प्रति पिक मजदूरी देने की मांग कर रहे है। जिसको लेकर जल्द ही बुनकर संघ और टेक्सटाइल ट्रेडर्स एसोसिएशन के बीच बैठक होगी।
40 हजार से अधिक पावरलूम मशीनों पर करीब 70 हजार मजदूर परिवारों का पालन पोषण होता है। 30 लाख मीटर कपड़ा प्रतिदिन उत्पादन होने से बुरहानपुर की देश के कपड़ा उद्योग में अलग पहचान है, लेकिन पिछले तीन साल से बुनकर एक ही मजदूरी पर काम कर रहा था। कपड़े पर जीएसटी, कोरोना महामारी के बाद मंदी का असर बताकर लंबे समय से पावरलूम बुनकरों की मजदूरी तक नहीं बढ़ई गई। ऐसे में बुनकर पावरलूम कारखानों के बिजली बिल, परिवार का खर्च, बच्चों की पढ़ाई से लेकर अन्य खर्च नहीं निकल पा रहे है।
बुनकर संघ ने लिखा पत्र
पावरलूम बुनकर संघ ने मजदूरी बढ़ाने की मांग को लेकर बुरहानपुर टेक्सटाइल ट्रेडर्स एसोसिएशन को पत्र लिखा है। जिसमें प्रति पिक प्रति मीटर मजदूरी 25.25 से बढ़ाकर 29 रुपए करने की सिफारिश की है। संघ ने कहा कि लंबे समय से मजदूरी न बढऩे के कारण बुनकर और कारीगर दूसरे शहरों में पलायन कर रहे हैं, जिससे स्थानीय उद्योग पर संकट गहरा रहा है। क्योकि 31 दिसंबर 2023 को समाप्त हुए मजदूरी अनुबंध के बाद नया मजदूरी अनुबंध करार नहीं हुआ। संघ ने मजदूरी बढ़ोतरी के संबंध में कही बार पत्र लिखा और ज्ञापन दिया था। लेकिन अनुकूल हालात न होने के कारण मजदूरी नहीं बढ़ पाई थी,इसलिए अब दोबारा से प्रयास किए जा रहे है।
टीएल,यार्न घट्टी पर भी हो बात
बुनकर वसीम अंसारी ने कहा कि लंबे समय से मजदूरी के साथ कपड़े की टेपलेन और अलग, अलग क्वालिटी में यार्न की घट्टी लगातार बढ़ रही है। ऐसे में कही बार टेक्सटाइल संचालक यार्न घट्टी पर राशि काट लेते है। जबकि अधिक टेपलेन लेने के बाद भी मजदूरी बढ़ाकर नहीं दी जाती है। पिछले तीन साल से बढ़ती महंगाई ने बुनकरों की कमर तोड़ रखी है। भीम भरना यूनियन ने मजदूरी बढ़ाई है, हम्माली अधिक लग रही है, जिसका बोझ पावरलूम बुनकरों पर होता है। कम मजदूरी के कारण कारीगर अब भिवंडी और इचलकरंजी पलायन कर रहे है। 110 से 120 मीटर कपड़ा बनवाने के बाद भी 100 मीटर की मजदूरी मिलती है।
बुनकरों को महाराष्ट्र,यूपी तरह मिले सुविधाएं
बुनकर उजैर अंसारी ने कहा कि प्रदेश सरकार कपड़ा उद्योग पर ध्यान देने की बात कह रही है, लेकिन कपड़ा बनाने वाले बुनकर, मजदूरों की तरफ ध्यान नहीं है। हम सरकार से मांग करते है कि महाराष्ट्र, यूपी की तर्ज पर बुरहानपुर के बुनकर भी सस्ती बिजली, रस्ती दरों पर जमीनें देकर सरकारी योजनाओं से जोडकऱ नए आधुनिक कारखाने के लिए ऋण दिया जाए। ताकि बुरहानपुर का बुनकर उद्योग दोबारा देशभर में नई पहचान स्थापित करें। पावरलूम फेडरेशन बुनकरों के नाम पर चल रही है, लेकिन छोटे बुनकरों को लाभ नहीं मिल रहा।
ये भी पढ़ें