नई दिल्ली. कांग्रेस नेता राहुल गांधी के अमरीका यात्रा के दौरान चुनाव आयोग को ‘समझौतावादी’ कहने के बाद मंगलवार को चुनाव आयोग के अधिकारियों ने कहा कि जनता का फैसला पक्ष में न आने के बाद चुनाव आयोग को बदनाम करने की कोशिश करना ‘पूरी तरह बेतुका’ है। अधिकारियों ने कहा कि महाराष्ट्र चुनाव के […]
नई दिल्ली. कांग्रेस नेता राहुल गांधी के अमरीका यात्रा के दौरान चुनाव आयोग को 'समझौतावादी' कहने के बाद मंगलवार को चुनाव आयोग के अधिकारियों ने कहा कि जनता का फैसला पक्ष में न आने के बाद चुनाव आयोग को बदनाम करने की कोशिश करना 'पूरी तरह बेतुका' है। अधिकारियों ने कहा कि महाराष्ट्र चुनाव के लिए मतदाता सूची को लेकर लगाए जा रहे 'निराधार' आरोप 'कानून के शासन का अपमान' है, क्योंकि कांग्रेस ने मतदाता सूची रिवीजन के लिए 27,009 बूथ स्तरीय एजेंटों को लगाया था। इस प्रक्रिया में केवल 89 प्रथम अपील और केवल एक द्वितीय अपील की गई थीं। उन्होंने कहा कि कोई भी गलत सूचना, वह चाहे कोई भी फैला रहा हो, 'न केवल कानून के प्रति अनादर का संकेत है, बल्कि पार्टी के हजारों प्रतिनिधियों को भी बदनाम करने वाली है', और उन लाखों चुनाव कर्मचारियों को 'हताश' करने वाली भी है जो चुनावों के दौरान बिना थके और पारदर्शी तरीके से काम करते हैं।
बोस्टन में राहुल ने महाराष्ट्र चुनाव में मतदान के आंकड़ों में कथित विसंगतियों का हवाला देते हुए चुनाव आयोग पर हमला किया था। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव में राज्य में वयस्कों की तुलना में अधिक लोगों ने मतदान किया। आरोपों पर चुनाव अधिकारियों ने कहा कि देश में चुनाव कानून के अनुसार होते हैं और भारत में जिस पैमाने और सटीकता के साथ चुनाव होते हैं, उसकी दुनिया भर में प्रशंसा होती है।
राहुल के इस आरोप का जिक्र करते हुए कि शाम 5:30 बजे से 7:30 बजे के बीच 65 लाख मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया और ऐसा होना 'शारीरिक रूप से असंभव' है, अधिकारियों ने कहा कि मतदान केंद्रों पर पहुंचे 6.4 करोड़ लोगों ने मतदान किया और औसतन प्रति घंटे लगभग 58 लाख वोट डाले गए। इन औसत रुझानों के अनुसार, लगभग 1.16 करोड़ मतदाताओं ने अंतिम दो घंटों में मतदान किया होगा और इसलिए दो घंटों में 65 लाख वोट डालना औसत प्रति घंटे मतदान रुझानों से कम है। अधिकारियों ने आगे कहा कि कांग्रेस उम्मीदवारों या उनके एजेंटों ने अगले दिन रिटर्निंग ऑफिसर और चुनाव पर्यवेक्षकों के समक्ष जांच के समय किसी भी तरह के 'असामान्य' मतदान पर कोई 'पुष्ट' आरोप नहीं लगाया। उन्होंने कहा कि यह 'पूरी तरह से स्पष्ट है कि महाराष्ट्र चुनाव से पहले कांग्रेस या किसी अन्य दल की ओर से कोई शिकायत नहीं थी'।