अहमदाबाद स्थित साबरमती आश्रम के पूर्व सचिव अमृत मोदी का 89 वर्ष की आयु में निधन हो गया। वे 1955 से साबरमती आश्रम में रहते थे। उन्हें अमृत दादा के नाम से भी जाना जाता था। उनका अंतिम संस्कार गांधी आश्रम से सटे वाडज श्मशान में किया गया। वे सर्वोत्कृष्ट गांधीवादी के रूप में माने जाते थे। 50 साल से अधिक समय तक साबरमती गांधी आश्रम के कार्यवाहक रहे।
कौन थे अमृत मोदी?
अमृत मोदी मेहसाणा जिले के सादरा गांव के निवासी थे। उन्होंने एक प्राथमिक विद्यालय में शिक्षक के रूप में काम किया। फिर गुजरात के राजस्व विभाग में कर्मचारी के रूप में काम किया। बाद में वे विनोबा भावे के भूदान आंदोलन में शामिल हो गए। मोदी कांग्रेस सेवा दल से भी जुड़े रहे।
वे 1974 में साबरमती आश्रम संरक्षण एवं स्मारक ट्रस्ट (SAMPT) द्वारा प्रबंधित आश्रम में शामिल हुए और 1980 में इसके सचिव नियुक्त किए गए। वे 1955 से साबरमती आश्रम में रहते थे। 50 साल से अधिक समय तक साबरमती गांधी आश्रम के कार्यवाहक रहे। वे सर्वोत्कृष्ट गांधीवादी के रूप में माने जाते थे। गांधीवादी विचारों की खुशबू को पूरी दुनिया में फैलाने में उनका महान योगदान था।
अमृत दादा की तबीयत खराब चल रही थी
पिछले कुछ समय से अमृतभाई की तबीयत खराब चल रही थी, जिसकी वजह से वे काफी परेशान थे। पहले वे आश्रम में ही रह रहे थे। हालांकि, एक साल पहले उनकी पत्नी का निधन हुआ था तभी उनका एक बेटा, जो गोधरा में है, उन्हें अपने साथ ले गया।
अब करीब एक महीने पहले मोदी अपने छोटे बेटे के पास अहमदाबाद के रानिप इलाके में रहने आए थे। वहीं आज मंगलवार सुबह उन्होंने अंतिम सांस ली।
हमेशा सादे और प्रतिष्ठित खादी के कपड़े पहने नजर आने वाले मोदी आश्रम का चेहरा थे। वे जिज्ञासु आगंतुकों के लिए आश्रम के इतिहास के चलते-फिरते ज्ञान भंडार थे। अमृतदादा का जीवन सादगी, भक्ति, परिश्रम, अध्ययन और सज्जनता से सुसज्जित एक शांत जीवन रहा है।