नागौर. नगर परिषद की ओर से शहरी सेवा शिविर अभियान के तहत वार्ड संख्या 7, 8 और 9 में विशेष सफाई अभियान चलाया गया। अभियान के दौरान पुराना पावर हाउस रोड से लेकर भार्गव बस्ती और दुलया क्षेत्र तक नालों एवं नालियों की सफाई कराई गई। सफाई कार्य में मुख्यमंत्री शहरी रोजगार गारंटी योजना के श्रमिकों के साथ नगर परिषद के सफाई कर्मचारियों को भी लगाया गया। परिषद का दावा है कि अभियान का उद्देश्य क्षेत्र में स्वच्छता व्यवस्था को बेहतर बनाना है। हालांकि विशेष अभियान के जरिए कराई गई सफाई ने नियमित सफाई व्यवस्था की प्रभावशीलता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

सफाई पर लाखों खर्च फिर भी अभियान की जरूरत, नगर परिषद की व्यवस्था पर उठे सवाल
वार्ड 7, 8 और 9 में चला विशेष सफाई अभियान, नियमित सफाई व्यवस्था की प्रभावशीलता पर चर्चा तेज
नागौर. नगर परिषद की ओर से वार्ड संख्या 7, 8 और 9 में शहरी सेवा शिविर अभियान- के तहत विशेष सफाई अभियान चलाया गया। पुराना पावर हाउस रोड, भार्गव बस्ती से दुलया क्षेत्र तक नालों और नालियों की सफाई करवाई गई। अभियान में मुख्यमंत्री शहरी रोजगार गारंटी योजना के श्रमिकों और नगर परिषद के सफाई कर्मचारियों को लगाया गया। हालांकि इस कार्रवाई के साथ ही नगर परिषद की नियमित सफाई व्यवस्था पर खुद-ब-खुद सवाल भी खड़े हो गए हैं कि जब नगर परिषद शहर की सफाई व्यवस्था के लिए प्रतिवर्ष लाखों रुपए खर्च करती है। सफाई कार्य के लिए अलग से ठेका व्यवस्था लागू है, और अनुबंधित एजेंसियों को नियमित सफाई का जिम्मा सौंपा गया है। इसके बावजूद विशेष अभियान चलाकर नालों और नालियों की सफाई करवानी पड़ रही है। इससे यह सवाल उठ रहा है कि आखिर नियमित सफाई व्यवस्था कितनी प्रभावी साबित हो रही है, और सफाई मद में खर्च होने वाली राशि का अपेक्षित परिणाम धरातल पर क्यों दिखाई नहीं दे रहा।
अभियान में साफ हुए नाले, लेकिन उठे कई सवाल
नगर परिषद के अनुसार सुबह 8 बजे से 11 बजे तक चले अभियान के दौरान पुराना पावर हाउस क्षेत्र के पास स्थित नाले तथा आसपास की नालियों की सफाई करवाई गई। अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर वार्डवासियों से चर्चा भी की तथा कार्यवाहक स्वच्छता निरीक्षकों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए, लेकिन जिन स्थानों पर विशेष सफाई करवाई गई, वहां गंदगी और जाम नालियों की स्थिति यह संकेत देती है कि नियमित निगरानी और सफाई व्यवस्था अपेक्षित स्तर पर नहीं रही। इससे जिम्मेदारों की कार्यशैली पर प्रश्नचिह्न लगने लगा है।
कचरा संग्रहण व्यवस्था भी सवालों के घेरे में
अभियान के दौरान ऑटो टिपर संवेदक को संबंधित वार्डों में शत-प्रतिशत घर-घर कचरा संग्रहण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। यह निर्देश भी व्यवस्था की वास्तविक स्थिति को उजागर करते हैं। यदि घर-घर कचरा संग्रहण पूरी तरह प्रभावी होता तो अधिकारियों को मौके पर विशेष रूप से ऐसे निर्देश देने की आवश्यकता नहीं पड़ती। वार्डवासियों का कहना है कि कई क्षेत्रों में कचरा संग्रहण की नियमितता को लेकर शिकायतें समय-समय पर सामने आती रही हैं।
लाखों रुपए खर्च होने के बाद भी नहीं दिख रहा अपेक्षित असर
क्षेत्र के निवासी मोहनलाल व्यास, कैलाश चंद शर्मा, पुखराज भंडारी, हनुमानराम सियाग, मांगीलाल कच्छावा, ओमप्रकाश पारीक और नरेश सोनी ने कहा कि शहर की सफाई व्यवस्था पर हर साल बड़ी राशि खर्च की जाती है। इसके बावजूद नालों की सफाई के लिए विशेष अभियान चलाना पड़ रहा है। उनका कहना है कि यदि ठेका एजेंसियां और जिम्मेदार कार्मिक नियमित रूप से अपना कार्य कर रहे हैं, तो फिर ऐसे अभियान की आवश्यकता नहीं होनी चाहिए। उन्होंने सफाई कार्यों की गुणवत्ता और खर्च की प्रभावी निगरानी की मांग की।
शिविर में 72 आवेदनों का निस्तारण
सफाई अभियान के बाद नगर परिषद परिसर में आयोजित शहरी सेवा शिविर अभियान-2026 के दौरान विभिन्न प्रकरणों का निस्तारण भी किया गया। परिषद के अनुसार कृषि भूमि पर बसी स्वीकृत योजनाओं से जुड़े 3 प्रकरण, भवन निर्माण स्वीकृति के 3 प्रकरण तथा नामांतरण के 4 प्रकरणों का निस्तारण किया गया। इसके अलावा जन्म-मृत्यु पंजीयन एवं विवाह प्रमाण पत्र से संबंधित आवेदनों सहित कुल 72 आवेदनों का निस्तारण किया गया।
जिम्मेदारों की कार्यशैली पर सवालिया निशान
नगरपरिषद की ओर से चल रहे विशेष अभियान से जनता को तत्काल राहत जरूर मिल सकती है, लेकिन शहर की सफाई व्यवस्था को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब केवल अभियान नहीं दे सकते। जब नियमित सफाई के लिए संसाधन, कर्मचारी और ठेका व्यवस्था पहले से मौजूद है, तो फिर बार-बार विशेष अभियान चलाने की नौबत क्यों आ रही है, यह जांच का विषय है।