समाचार

उत्तराखंड में अब मनमाना नहीं होगा स्कूल बसों का किराया सरकार ने तय की रेट लिस्ट

उत्तराखंड के अभिभावकों के लिए राहत भरी बड़ी खबर सामने आई है। प्रदेश में अब स्कूल बस और वैन का किराया स्कूलों की मर्जी से नहीं बल्कि सरकारी रेट लिस्ट के हिसाब से तय होगा।
2 min read
Mar 25, 2026
Minor Girl Molested in Badlapur School
बदलापुर में घिनौनी वारदात (Photo: IANS/AI/File)

राज्य परिवहन प्राधिकरण (एसटीए) ने बुधवार को हुई अपनी अहम बैठक में पहली बार स्कूल बसों और वैन के लिए मासिक परिवहन शुल्क की सीमा निर्धारित कर दी है। अब सभी स्कूलों को इसी नई दर के अनुसार छात्र-छात्राओं से किराया वसूलना होगा।

हाईकोर्ट के आदेश के बाद हुआ फैसला

इस पूरे मामले की शुरुआत नैनीताल हाईकोर्ट में दायर एक जनहित याचिका से हुई थी। उच्च न्यायालय ने सितंबर 2025 में आदेश जारी करते हुए सरकार को निर्देश दिए थे कि स्कूल बसों और टैक्सी-मैक्सी के परिवहन शुल्क का निर्धारण किया जाए। इसी आदेश के अनुपालन में उत्तराखंड के परिवहन आयुक्त बृजेश कुमार संत की अध्यक्षता में देहरादून में राज्य परिवहन प्राधिकरण की बैठक हुई। बैठक में कई अहम पहलुओं जैसे वाहन की कीमत, किस्त, ड्राइवर-कंडक्टर का वेतन, मेंटेनेंस, बीमा और ईंधन के खर्च को बारीकी से परखा गया और फिर नए रेट फाइनल किए गए।

जानिए कितनी दूरी पर कितना लगेगा किराया

नई दर सूची के अनुसार स्कूली बच्चों के किराए को दूरी के हिसाब से अलग-अलग श्रेणियों में बांटा गया है। यदि बच्चा स्कूल बस से सफर करता है तो 10 किलोमीटर तक की दूरी के लिए अब 2200 रुपये प्रति माह देने होंगे। वहीं 10 से 20 किलोमीटर के लिए 2700 रुपये और 20 से 30 किलोमीटर की दूरी के लिए 3200 रुपये का शुल्क तय किया गया है। अगर दूरी 30 किलोमीटर से अधिक है तो यह किराया 3700 रुपये प्रति छात्र होगा।

स्कूल वैन के लिए भी लागू हुई दरें

अक्सर छोटी गलियों और कम दूरी के लिए इस्तेमाल होने वाली स्कूल वैन और मैक्सी वाहनों के लिए भी प्राधिकरण ने शिकंजा कसा है। वैन के मामले में 5 किलोमीटर तक की दूरी के लिए 2100 रुपये तय किए गए हैं। 5 से 10 किलोमीटर के लिए 2500 रुपये और 10 से 20 किलोमीटर तक के सफर के लिए 3000 रुपये मासिक शुल्क निर्धारित किया गया है। 20 किलोमीटर से ज्यादा की दूरी होने पर अभिभावकों को 3500 रुपये देने होंगे।

अभिभावकों को मिलेगी बड़ी राहत

इस फैसले का सबसे बड़ा असर उन अभिभावकों पर पड़ेगा जो अब तक स्कूलों द्वारा वसूले जाने वाले मनमाने किराए से परेशान थे। अब तक स्कूल प्रबंधन अपने स्तर पर किराया तय करते थे जिसमें कोई एकरूपता नहीं थी। प्राधिकरण द्वारा आधिकारिक विज्ञप्ति जारी होने के बाद अब स्कूलों के पास मनमानी करने का मौका नहीं रहेगा। शासन की इस कोशिश से मध्यमवर्गीय परिवारों को बड़ी आर्थिक राहत मिलने की उम्मीद है।

Published on:
25 Mar 2026 11:16 pm