समाचार

अवकाश में भी बुलाया जा रहा स्टाफ, फिर भी जीवाजी विवि में 5 हजार से ज्यादा डिग्री-मार्कशीट पेंडिंग

छात्र संगठनों ने विश्वविद्यालय प्रशासन से मांग की है कि विशेष अभियान चलाकर एक निश्चित समय-सीमा तय की जाए और हर छात्र को लिखित रूप में उसके प्रकरण की स्थिति बताई जाए, ताकि अनिश्चितता खत्म हो सके और छात्रों का भविष्य सुरक्षित रह सके।

2 min read
छात्र संगठनों ने विश्वविद्यालय प्रशासन से मांग की है कि विशेष अभियान चलाकर एक निश्चित समय-सीमा तय की जाए और हर छात्र को लिखित रूप में उसके प्रकरण की स्थिति बताई जाए, ताकि अनिश्चितता खत्म हो सके और छात्रों का भविष्य सुरक्षित रह सके।

छात्र परेशान, भविष्य अधर में

ग्वालियर। जीवाजी विश्वविद्यालय में मार्कशीट और डिग्री से जुड़े लंबित मामलों को निपटाने के लिए प्रशासन ने अवकाश के दिनों में भी कर्मचारियों को बुलाना शुरू कर दिया है, लेकिन इसके बावजूद स्थिति में खास सुधार नहीं हो पा रहा है। करीब 12 हजार लंबित मामलों में से अब भी 5 हजार से अधिक प्रकरण पेंडिंग हैं। डिग्री और मार्कशीट नहीं मिलने के कारण सैकड़ों छात्रों का भविष्य अधर में लटका हुआ है।

मार्कशीट और डिग्री में देरी के चलते छात्रों को नौकरी, उच्च शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। कई छात्र महीनों से विश्वविद्यालय के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन उन्हें अब तक स्पष्ट जवाब नहीं मिल पा रहा है।

अवकाश में भी काम, फिर भी अधूरा समाधान

लगातार मिल रही शिकायतों के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने छुट्टी के दिनों में भी अतिरिक्त स्टाफ तैनात किया है। अलग-अलग काउंटर खोलकर शिकायतों के त्वरित निराकरण का दावा किया जा रहा है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि पेंडेंसी का आंकड़ा अब भी 5 हजार से ऊपर बना हुआ है।

प्रशासन का कहना है कि रोजाना मामलों की संख्या घट रही है, लेकिन छात्रों के अनुसार कई प्रकरण अब भी लंबे समय से अटके पड़े हैं और उन्हें बार-बार विवि आना पड़ रहा है।

क्यों नहीं घट रही पेंडेंसी

सूत्रों के मुताबिक पेंडेंसी कम न होने के पीछे कई कारण हैं। स्टाफ की कमी, रिकॉर्ड का अधूरा डिजिटाइजेशन, पुराने प्रकरणों का लंबा वेरिफिकेशन और जिम्मेदारी तय न होना मुख्य वजह मानी जा रही है। पुराने बैकलॉग के कारण नए मामलों का निपटारा भी धीमी गति से हो रहा है।

छात्र संगठनों की मांग

छात्र संगठनों ने विश्वविद्यालय प्रशासन से मांग की है कि विशेष अभियान चलाकर एक निश्चित समय-सीमा तय की जाए और हर छात्र को लिखित रूप में उसके प्रकरण की स्थिति बताई जाए, ताकि अनिश्चितता खत्म हो सके और छात्रों का भविष्य सुरक्षित रह सके।

कुलसचिव डॉ. राजीव मिश्रा ने बताया कि कर्मचारियों को लगातार अतिरिक्त समय में काम कराया जा रहा है और पेंडेंसी की संख्या धीरे-धीरे कम हो रही है।

Updated on:
23 Jan 2026 06:03 pm
Published on:
23 Jan 2026 06:01 pm
Also Read
View All

अगली खबर