शोध में यह भी सामने आया कि एक जैसे दर्द बढ़ाने वाले पदार्थों के लिए भी ये कोशिकाएं अलग प्रतिक्रिया देती है।
वाशिंगटन . एक ही तरह का दर्द महिला और पुरुषों को अलग-अलग क्यों महसूस होता है, इसका जवाब आज तक विज्ञान नहीं खोज पाया था, लेकिन अब एक रिसर्च में सामने आया है कि तंत्रिका कोशिकाओं में अंतर के कारण ऐसा होता है। दर्द महसूस करने वाली तंत्रिका कोशिकाएं महिला और पुरुष में अलग तरह से काम करती हैं।
शोध में यह भी सामने आया कि एक जैसे दर्द बढ़ाने वाले पदार्थों के लिए भी ये कोशिकाएं अलग प्रतिक्रिया देती है। इसका अर्थ है कि महिला और पुरुषों में शरीर के अंदर ही दर्द अलग तरीके से पैदा होता है। इस शोध की मदद से वैज्ञानिकों को ऐसी दवाइयां बनाने में मदद मिलेगी, जो महिला-पुरुषों पर अलग असर दिखाएगी।
एरिजोना यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों का अध्ययन
कुछ तरह के क्रॉनिक (लंबे चलने वाले) और एक्यूट (अचानक होने वाले) दर्द या तो सिर्फ महिलाओं में या फिर पुरुषों में होते है, लेकिन ऐसा क्यों होता है यह अभी तक पता नहीं चल पाया था। इसके पीछे का कारण जानने के लिए टक्सन की एरिजोना हेल्थ साइंस यूनिवर्सिटी के पेन रिसर्चर फ्रेंक पोरेका और उनके सहयोगियों ने नोसिसेप्टर नामक तंत्रिका कोशिकाओं का अध्ययन किया।
कैसे काम करती है नोसिसेप्टर कोशिकाएं
त्वचा, अंगों और शरीर के बाकी अंगों में मौजूद यह कोशिकाएं हमारे शरीर में दर्द का पता लगाती हैं और किसी भी तरह के खतरे को भांप लेती हैं। खतरा होने पर यह कोशिकाएं दिमाग को संकेत भेजती हैं और दिमाग उस संकेत को दर्द के रूप में समझता है। कभी-कभी यह कोशिकाएं ज्यादा संवेदनशील हो जाती हैं और हल्के स्पर्श को भी दर्द समझने लगती हैं। इसी कारण धूप से जली हुई त्वचा पर हल्की सी शर्ट के रगडऩे से भी दर्द महसूस होता है।
ऐसे किया अध्ययन
वैज्ञानिकों ने चूहों, बंदरों और इंसानों के टिश्यू का इस्तेमाल कर ये जांचा कि कैसे प्रोलैक्टिन और ऑरेक्सिन बी, तंत्रिका कोशिकाओं को दर्द के प्रति ज्यादा संवेदनशील बनाते हैं। प्रोलैक्टिन एक हार्मोन है और ऑरेक्सिन बी एक न्यूरोट्रांसमीटर है, जिन्हें महसूस करने पर तंत्रिका कोशिकाएं अधिक संवेदनशील हो जाती हैं, जिससे वह सीमा कम हो जाती है जिस पर कोशिकाएं मस्तिष्क को विद्युत संकेत भेजती हैं कि कुछ गलत है।
महिलाओं की तंत्रिका कोशिकाएं ज्यादा सक्रिय
इसमें पाया गया कि चूहों, बंदरों और इंसानों, तीनों प्रजातियों में ही प्रोलैक्टिन के संपर्क में आने से पुरुष की तुलना में महिलाओं की तंत्रिका कोशिकाएं ज्यादा सक्रिय हो जाती हंै। वहीं, ऑरेक्सिन बी का असर उल्टा था, इसने पुरुषों की तंत्रिका कोशिकाओं को ज्यादा सक्रिय बनाया। इस शोध के मुताबिक महिलाओं और पुरुषों में दर्द महसूस करने का तरीका अलग होता है और यह फर्क दर्द के संकेत शुरू होते ही, शरीर के अंदर दिखाई देता है।
दवाएं भी अलग बनाई जा सकती हैं
अध्ययन के प्रमुख शोधकर्ता फ्रेंक पोरेका ने कहा कि यदि दर्द पैदा करने वाले कारक महिलाओं और पुरुषों में अलग-अलग होते हैं, तो दर्द की दवाइयां भी महिलाओं या पुरुषों के लिए अलग-अलग बनाई जा सकती हैं। इनकी मदद से महिलाओं में प्रोलैक्टिन और पुरुषों में ऑरेक्सिन बी के प्रति संवेदनशीलता को रोका जा सकता है। उन्होंने कहा, हालांकि चूहों पर दर्द के बारे में की गई खोजें सीधे तौर पर इंसानों पर लागू नहीं होती, लेकिन इस अध्ययन में जांचे गए विशेष दर्द मार्ग चूहों, बंदरों और इंसानों में एक जैसे ही काम करते हैं।