
Sanwaliya Seth: भंडार से निकले नोटों की गिनती करते मंदिर कर्मचारी (फोटो- पत्रिका)
चित्तौड़गढ़: भगवान श्री सांवलिया जी सेठ मंडफिया के पावन धाम में 17 जनवरी चतुर्दशी को खोले गए भंडार की शेष राशि की गणना सोमवार को दूसरे चरण में संपन्न हुई। यह गिनती मंदिर बोर्ड अध्यक्ष हजारी दास वैष्णव की उपस्थिति में की गई।
बता दें कि दूसरे चरण की गिनती में भंडार से कुल 5 करोड़ 54 लाख 25 हजार रुपए नकद प्राप्त हुए। इससे पूर्व प्रथम चरण में 10 करोड़ 25 लाख रुपए नकद की प्राप्ति हुई थी। इस प्रकार अब तक दोनों चरणों को मिलाकर भंडार से कुल 15 करोड़ 79 लाख 25 हजार रुपए नकद प्राप्त हो चुके हैं। भंडार की तीसरे चरण की गिनती मंगलवार को की जाएगी।
इधर, रविवार को मौनी अमावस्या पर्व के अवसर पर श्री सांवलिया जी के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। मंदिर मंडल एवं प्रशासन की ओर से भक्तों को पंक्तिबद्ध और शांतिपूर्वक दर्शन कराने के लिए विशेष व्यवस्थाएं की गईं। सुरक्षा, यातायात, पेयजल और अन्य मूलभूत सुविधाओं का भी समुचित इंतजाम किया गया, जिससे श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
मौनी अमावस्या के अवसर पर शाम 5 बजे मंदिर मंडल की ओर से देवकी सदन धर्मशाला में महाप्रसादी का आयोजन किया गया, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने प्रेमपूर्वक बैठकर प्रसादी ग्रहण की। इस अवसर पर आयोजित दो दिवसीय अमावस्या मेला हर्षोल्लास और भक्तिमय वातावरण के साथ संपन्न हुआ।
भंडार की गिनती के दौरान मंदिर बोर्ड अध्यक्ष हजारी दास वैष्णव, बोर्ड सदस्य पवन तिवारी, लेखाधिकारी राजेंद्र सिंह, मंदिर प्रभारी भेरूगिरी गोस्वामी सहित मंदिर प्रशासन एवं विभिन्न बैंकों के कर्मचारी उपस्थित रहे।
आस्था जब कला का रूप ले लेती है, तो भक्ति की अभिव्यक्ति भी अनूठी हो जाती है। मेवाड़ के आराध्य ठाकुर श्री सांवलिया सेठ के प्रति श्रद्धा का ऐसा ही अनुपम उदाहरण आसींद (भीलवाड़ा) के स्वर्ण कलाकार धनराज सोनी ने प्रस्तुत किया है। उन्होंने अपनी आस्था और शिल्पकला का संगम करते हुए सांवलिया सेठ के लिए चांदी का विशेष ‘आधार कार्ड’ तैयार किया है।
यह प्रतिकृति शुद्ध 60 ग्राम चांदी से निर्मित है, जिस पर बारीक नक्काशी की गई है। कार्ड को हूबहू आधार कार्ड का स्वरूप दिया गया है। इसमें अशोक स्तंभ के साथ सांवलिया सेठ की छवि अंकित है। कार्ड पर नाम ‘श्री सांवलिया सेठ’, लिंग (पुरुष) तथा जन्म तिथि के रूप में ‘भाद्रपद कृष्ण अष्टमी 3112 ईसा पूर्व (श्रीकृष्ण जन्माष्टमी)’ दर्ज की गई है। कार्ड के नीचे एक प्रेरक संदेश भी लिखा है : 'मेरे सरकार मेरी पहचान', जो भक्त की अपने आराध्य के प्रति अटूट आस्था को दर्शाता है।
Updated on:
19 Jan 2026 10:30 pm
Published on:
19 Jan 2026 10:30 pm
