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Success Story: सीतामाता की तलहटी में सफेद सोने की फसल ने बदली तकदीर, बिना मंडी गए बिक रही फसल

Smart Village Payri: चित्तौड़गढ़ जिले में सीतामाता वन्यजीव अभयारण्य की गोद में बसे राज्यपाल स्मार्ट गांव पायरी में अब खेती का पारंपरिक ढर्रा बदल रहा है। दुर्गम और पथरीले इलाके के रूप में पहचाने जाने वाले इस क्षेत्र में अब मशरूम की खुशबू महक रही है।

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किसान लाल सिंह मीणा ने मशरूम की खेती से बदली तस्वीर, पत्रिका फोटो

किसान लाल सिंह मीणा ने मशरूम की खेती से बदली तस्वीर, पत्रिका फोटो

Smart Village Payri: चित्तौड़गढ़ जिले में सीतामाता वन्यजीव अभयारण्य की गोद में बसे स्मार्ट गांव पायरी में अब खेती का पारंपरिक ढर्रा बदल रहा है। दुर्गम और पथरीले इलाके के रूप में पहचाने जाने वाले इस क्षेत्र में अब मशरूम की खुशबू महक रही है।

नाबार्ड की वाडी परियोजना और अरुणोदय संस्था के मार्गदर्शन में किसान लाल सिंह मीणा ने वह चमत्कार कर दिखाया है, जिसकी कल्पना इस क्षेत्र में कम ही की जाती थी। लाल सिंह मीणा के अनुसार, मक्का में साल भर की मेहनत के बाद जो बचता है, मशरूम उससे तीन गुना ज्यादा मुनाफा सिर्फ दो कमरों में दे रहा है।

बिना मंडी गए बिक रही फसल

आमतौर पर किसान फसल बेचने के लिए मंडी के चक्कर काटता है, लेकिन लाल सिंह के मामले में गणित उलट गया है। मशरूम की बेहतरीन क्वालिटी के कारण खरीदार खुद उनके घर पहुंच रहे हैं। बिक्री को सुगम बनाने के लिए किसान उत्पादक कंपनी (एफपीओ) अमरबन नेचुरल के साथ समझौता भी किया गया है, जिससे किसानों को बिचौलियों की चिंता नहीं रहेगी।

शुभारंभ और बाजार से जुड़ाव

हाल ही में बड़ीसादड़ी में नाबार्ड परियोजना के अंतर्गत उत्पादित इन ताजे मशरूमों का नाबार्ड डीडीएम महेंद्र सिंह डूडी द्वारा आधिकारिक रूप से बिक्री के लिए शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर परियोजना अधिकारी महेश पंवार, सहायक राजेश राठौर, सागर चौधरी और प्रगतिशील किसान लाल सिंह मीणा उपस्थित रहे।डीडीएम महेंद्र सिंह डूडी ने कहा कि यह पहल किसानों की आय बढ़ाने और स्थानीय बाजार में गुणवत्ता युक्त मशरूम की उपलब्धता सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। आगामी दिनों में मशरूम से अन्य मूल्यवर्धित उत्पाद बनाने के प्रयास भी किए जाएंगे।

मुनाफे की नई छलांग: एक तुलनात्मक नजर

फसललागत (प्रति इकाई)समयसंभावित मुनाफा
मक्का / गेहूंसामान्य4–5 महीने20% – 30%
मशरूमकम (कचरे पर आधारित)1–2 महीने150% – 200%

तकनीकी सहयोग और सराहना

इस नवाचार के लिए अरुणोदय संस्था की सराहना की गई है। साथ ही, कृषि विज्ञान केंद्र चित्तौड़गढ़ के वरिष्ठ वैज्ञानिक रतनलाल सोलंकी और उद्यान विभाग के अधिकारी शंकरलाल जाट ने भी तकनीकी सहायता प्रदान की है। उद्यान विभाग द्वारा लाल सिंह के नाम को आगामी 'नवाचार पुरस्कार' के लिए प्रस्तावित करने की बात भी कही गई है।

क्यों खास है यह मशरूम?

  • यह न केवल आर्थिक रूप से मजबूत बना रहा है, बल्कि स्थानीय स्तर पर पोषण की कमी को भी दूर कर रहा है।
  • इम्युनिटी बूस्टर: एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर।
  • याददाश्त: दिमागी सेहत और एकाग्रता बढ़ाने में सहायक।
  • विटामिन का खजाना: विटामिन-डी और बी-कॉम्प्लेक्स का प्राकृतिक स्रोत।
  • थकान से मुक्ति: आयरन से भरपूर, ऊर्जा स्तर बनाए रखता है।