-शिशु मृत्युदर पर अंकुश लगाने किए जा रहे प्रयास नहीं ला पा रहे रंग, पोषण आहार वितरण पर उठ रहे सवाल
दमोह. जिले में शिशु मृत्युदर पर अंकुश लगाने के तमाम प्रयास किए जा रहे हैं। बावजूद इसके इस पर अंकुश नहीं लग पा रहा है। अभी भी प्रसव के दौरान अतिकम वजन के शिशु पैदा हो रहे हैं, जिन्हें बचाने के लिए डॉक्टर्स को एढ़ी चोटी का जोर लगाना पड़ रहा है। कई मामलों में चिकित्सकों ने सफलता पाई है। इसकी वजह अस्पताल में गंभीर शिशुओं के स्वस्थ्य होने के बाद उनका फॉलोअप पर ध्यान देना है।
एक मामला 3 दिसंबर 2024 का है, जहां प्री टर्म डिलिवरी के दौरान अत्याधिक कम वजन के शिशु ने जन्म लिया था। जन्मजात सांस लेने की समस्या थी। डॉ. जलज बजाज व डॉ. सोनू शर्मा ने नवजात को एसएनसीयू में भर्ती कराया था। भर्ती के समय नवजात का वजन महज 760 ग्राम था। जो बहुत बढ़ी चिंता की बात थी। डॉ. रोहित जैन की निगरानी में करीब 3 दिन तक नवजात को मशीन पर रखा गया। पीलिया की समस्या के चलते फोटोथेरपी शुरू की गई। साथ ही फस्र्ट लाइन एंटीबायोटिक दी गई। 28 दिन तक नवजात को एसएनसीयू में भर्ती करना पड़ा। बच्चा सामान्य स्थिति में आ गया। बच्चे का वजन बढ़कर 1.37 किग्रा हो गया था। सभी समस्या दूर होने पर डॉक्टरों की सलाह पर नवजात को अस्पताल से घर जाने डिस्चार्ज कर दिया।
-फॉलोअप के लिए बुलाया गया था मां और बच्चे को
अच्छी बात यह है कि गंभीर शिशुओं के मामले में फॉलोअप भी किया जा रहा है। दो माह बाद नवजात की मां दान बाई बच्चे को पुन: फॉलोअप के लिए जिला अस्पताल लेकर आई। उसने बताया कि बड़ी मन्नतों के बाद घर में खुशियां आई थी। एसएनसीयू से ही मेरे बेटे को नया जीवन दान मिला है। जांच के दौरान बच्चा पूरी तरह स्वस्थ्य मिला।
-आंगनबाड़ी केंद्रों पर सुधार की जरूरत
जिले में पोषण आहार का वितरण आंगनबाड़ी केंंद्रां से किया जा रहा है। गर्भवती महिलाओं को पोषण आहार उपलब्ध कराना कार्यकर्ताओं व सहायिकाओं की जिम्मेदारी है। अंचलों में पोषण आहार का क्रियान्वयंन ठीक ढंग से नहीं हो रहा है। इस वजह से प्रसव के दौरान अतिकम वजन के शिशु जन्म ले रहे हैं। हालांकि कलेक्टर ने इस मामले में भी सख्ती दिखाई है। आंगनबाड़ी केंद्रों का खुद कलेक्टर भी औचक निरीक्षण कर रहे हैं।