28 जनवरी 2026,

बुधवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

आरटीओ में सेवा ठप: फिटनेस करवाने जबलपुर और सतना जाने मजबूर वाहन चालक

जिले से 100 किलोमीटर दूर जाना बना मजबूरी, स्कूल बस और ऑटो में नियम आ रहे आड़े, जिले में नहीं ऑटोमेटेड फिटनेस टेस्टिंग स्टेशन

4 min read
Google source verification

कटनी

image

Balmeek Pandey

Jan 27, 2026

Vehicle Fitness Services Disrupted at Katni RTO Office

Vehicle Fitness Services Disrupted at Katni RTO Office

कटनी. जिले के हजारों वाहन चालकों और परिवहन व्यवसाय से जुड़े लोगों की मुश्किलें अचानक बढ़ गई हैं। जिला परिवहन कार्यालय (आरटीओ) में वाहन फिटनेस जांच और फिटनेस सर्टिफिकेट जारी करने की व्यवस्था पूरी तरह बंद हो चुकी है। अब वाहन मालिकों को अपने वाहनों की फिटनेस कराने के लिए करीब 100 किलोमीटर दूर जबलपुर या सतना जाना पड़ रहा है। यह स्थिति न सिर्फ आर्थिक बोझ बढ़ा रही है, बल्कि समय, रोजगार और सडक़ सुरक्षा… तीनों पर गंभीर असर डाल रही है।
जानकारी के अनुसार भारत सरकार के सडक़ परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय द्वारा देशभर में वाहन फिटनेस व्यवस्था को ऑटोमेटेड फिटनेस टेस्टिंग स्टेशन के माध्यम से लागू किया जा रहा है। इसी नीति के तहत कई जिलों में मैनुअल फिटनेस जांच बंद कर दी गई है। कटनी जिले में भी मैनुअल फिटनेस प्रणाली बंद कर दी गई, लेकिन यहां अब तक ऑटोमेटेड फिटनेस टेस्टिंग स्टेशन की सुविधा शुरू नहीं हो सकी। नतीजतन, जिले के सभी व्यावसायिक वाहनों को फिटनेस के लिए सतना और जबलपुर स्थित केंद्रों पर भेज दिया गया है। स्थिति यह है कि नई व्यवस्था लागू होने से पहले ही पुरानी व्यवस्था समाप्त कर दी गई, जिससे वाहन चालकों के सामने कोई स्थानीय विकल्प ही नहीं बचा।

ऑटो, टैक्सी, बस और ट्रक सबसे ज्यादा प्रभावित

फिटनेस जांच की बाध्यता मुख्य रूप से व्यावसायिक वाहनों पर लागू होती है। ऐसे में ऑटो, ई-रिक्शा, टैक्सी, बस, ट्रक, डंपर और अन्य मालवाहक वाहन सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। कटनी व जिले के अलग-अलग स्थानों से सतना और जबलपुर की दूरी 50 से 100 किलोमीटर के बीच है। वाहन चालकों को फिटनेस कराने के लिए ईंधन खर्च, टोल टैक्स, एक से दो दिन का समय, काम का नुकसान सब झेलना पड़ रहा है। छोटे वाहन चालकों के लिए यह खर्च कई बार उनकी दैनिक कमाई से भी ज्यादा बैठ रहा है।

फिटनेस नहीं तो 5 हजार तक जुर्माना

मोटर वाहन अधिनियम के तहत किसी भी व्यावसायिक वाहन के पास वैध फिटनेस सर्टिफिकेट नहीं पाया जाता है, तो उस पर 5,000 रुपए तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। ऐसे में वाहन मालिकों के सामने दोहरी मार है। या तो 100 किमी दूर जाकर फिटनेस कराएं या जुर्माने का जोखिम उठाएं। कई चालकों का कहना है कि वे नियम मानना चाहते हैं, लेकिन व्यवस्था ही उनके खिलाफ खड़ी है।

छोटे वाहन चालकों पर सबसे ज्यादा मार

फिटनेस सर्टिफिकेट की वैधता केवल एक वर्ष होती है। छोटे वाहन चालक—खासतौर पर ग्रामीण क्षेत्रों के ऑटो चालक, ई-रिक्शा चालक और छोटे ट्रांसपोर्टर-हर साल इतनी लंबी दूरी तय करने की स्थिति में नहीं हैं। कई चालकों ने बताया कि वे फिटनेस के लिए आरटीओ कार्यालय पहुंचे, लेकिन वहां से उन्हें सीधे जबलपुर या सतना भेज दिया गया।

बिना परमिट कैसे जाएं जबलपुर और सतना

फिटनेस के लिए बाहर जाना तय कर दिया गया है, लेकिन दूसरी ओर परमिट नियम ही वाहन चालकों के सामने सबसे बड़ी बाधा बन गए हैं। ऑटो रिक्शा को सामान्यत: जिले से बाहर का परमिट नहीं दिया जाता। ऐसे में ऑटो चालक बिना परमिट जबलपुर या सतना कैसे जाएं?। स्कूल बसों को भी जिले से बाहर संचालन की अनुमति नहीं होती। इन बसों को बच्चों की सुरक्षा से जुड़ी जिम्मेदारी के कारण विशेष नियमों में बांधा गया है। वाहन चालकों का सवाल है कि जब शासन खुद उन्हें दूसरे जिले भेज रहा है, तो परमिट में अस्थायी छूट या विशेष अनुमति क्यों नहीं दी जा रही है।

8,576 व्यावसायिक वाहनों की फिटनेस एक्सपायर

फिटनेस सेवा बंद होने का सीधा असर आंकड़ों में साफ दिख रहा है। परिवहन विभाग के ताजा आंकड़ों के अनुसार 8,576 व्यावसायिक वाहनों की फिटनेस अवधि समाप्त हो चुकी है जबकि 7,092 वाहन अब भी सडक़ों पर सक्रिय (ऑन रोड) हैं। यह स्थिति न केवल यातायात नियमों का उल्लंघन है, बल्कि सडक़ सुरक्षा के लिहाज से भी बेहद खतरनाक मानी जा रही है।

किस श्रेणी में कितने वाहन बिना फिटनेस

  • थ्री-व्हीलर (यात्री): 3,676 वाहनों की फिटनेस एक्सपायर, 1,612 वाहन ऑन रोड।
  • गुड्स कैरियर (मालवाहक): 2,348 फिटनेस एक्सपायर, 3,462 वाहन सक्रिय।
  • ई-रिक्शा (पैसेंजर): 1,384 फिटनेस एक्सपायर, 741 ऑन रोड।
  • मैक्सी कैब: 282 फिटनेस विहीन, 39 सक्रिय
  • मोटर कैब: 146 फिटनेस एक्सपायर, 103 ऑन रोड।
  • बसें: 67 फिटनेस एक्सपायर, 172 बसें संचालित।
  • डंपर: 67 फिटनेस विहीन, 248 सक्रिय

सडक़ सुरक्षा पर गंभीर सवाल

बिना फिटनेस वाले वाहन ब्रेक फेल, टायर घिसे, लाइट और सिग्नल खराब, प्रदूषण मानकों का उल्लंघन जैसी समस्याओं के साथ सडक़ों पर दौड़ रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यही स्थिति बनी रही, तो दुर्घटनाओं की आशंका कई गुना बढ़ सकती है।

वाहन चालकों का दर्द: नियमों में फंसे, रास्ता नहीं सूझ रहा

आरटीओ में फिटनेस सेवा बंद होने से वाहन चालकों में भारी नाराजगी है। कई वाहन मालिकों ने बताया कि वे नियमों का पालन करना चाहते हैं, लेकिन व्यवस्था ही उन्हें मजबूर कर रही है। ऑटो चालक रमेश केवट कहते हैं कि हम रोज की कमाई से घर चलाते हैं। फिटनेस के लिए जबलपुर भेज रहे हैं, लेकिन ऑटो का जिले से बाहर परमिट ही नहीं है। बिना परमिट जाएंगे तो चालान कटेगा। उन्होंने बताया कि एक दिन जबलपुर जाने-आने में ही 800 से 1000 रुपए खर्च हो जाएंगे, जबकि उनकी रोज़ की कमाई 400-500 रुपए से ज्यादा नहीं होती। बड़वारा क्षेत्र के स्कूल बस चालक इरफान खान का कहना है स्कूल बस बच्चों की सुरक्षा से जुड़ी होती है। हमें जिले से बाहर जाने का परमिट नहीं मिलता, लेकिन फिटनेस के लिए बाहर जाना अनिवार्य कर दिया गया है। अगर बस खड़ी रख दें तो स्कूल और बच्चों दोनों को परेशानी होगी। इरफान ने सवाल उठाया कि जब शासन खुद बाहर भेज रहा है, तो स्कूल बसों के लिए विशेष अनुमति या कैंप व्यवस्था क्यों नहीं की जा रही। मालवाहक वाहन चालक लल्लू यादव बताते हैं कि ट्रक से माल ढोकर ही परिवार चलता है। दो दिन जबलपुर में लग जाएंगे तो काम ठप हो जाएगा। ऊपर से डीजल, टोल और खाने का खर्च अलग। अगर फिटनेस नहीं कराएं तो 5 हजार जुर्माना दोनों तरफ नुकसान ही नुकसान है।

इनका कहना है

सडक़ परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय द्वारा वाहन फिटनेस व्यवस्था को ऑटोमेटिक फिटनेस टेस्टिंग स्टेशन के माध्यम से लागू किया गया है। इसके तहत जबलपुर और सतना जैसे बड़े जिलों में पहले से ऑटोमैटिक स्टेशन चालू हैं। कटनी जिले के वाहन चालकों की समस्या से वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत कराया गया है। शासन स्तर पर समाधान के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।

संतोष पॉल, जिला परिवहन अधिकारी, कटनी