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पत्रिका टॉक शो में डॉक्टरों ने रखी बेबाक राय…: दवाओं की कीमत के साथ जीएसटी में मिले राहत, सुरक्षा जरूरी

बजट से पहले चिकित्सकों की उम्मीदें, आयुष्मान योजना व चिकित्सक सुरक्षा पर हो फोकस

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कटनी

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Balmeek Pandey

Jan 18, 2026

Budget talk show doctors in katni

Budget talk show doctors in katni

कटनी. फरवरी माह में केंद्र सरकार द्वारा आम बजट पेश किया जाना है। बजट से पूर्व विभिन्न वर्गों की अपेक्षाओं को लेकर पत्रिका द्वारा चर्चा का सिलसिला जारी है। इसी क्रम में शनिवार को शहर के डन कॉलोनी स्थित इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के बीच पत्रिका टॉक शो का आयोजन किया गया, जिसमें शहर के शासकीय एवं निजी चिकित्सकों ने अपनी उम्मीदें और सुझाव खुलकर रखे।
टॉक शो में चिकित्सकों ने कहा कि आगामी केंद्रीय बजट में सरकार को दवाओं की कीमतों पर विशेष ध्यान देना चाहिए। उन्होंने बताया कि कई दवाओं की एमआरपी अत्यधिक होती है, जबकि उनकी वास्तविक लागत काफी कम होती है। इससे आम मरीजों पर आर्थिक बोझ बढ़ता है।

उपचार सामग्री पर जीएसटी में राहत का मुद्दा

चिकित्सकों ने उपचार एवं ऑपरेशन में उपयोग होने वाली सामग्री पर लगने वाले जीएसटी को कम करने की मांग की। उनका कहना था कि इससे इलाज की कुल लागत घटेगी और मरीजों को राहत मिलेगी। टॉक शो में आयुष्मान भारत योजना में और सुधार किए जाने की आवश्यकता पर भी चर्चा हुई। चिकित्सकों ने कहा कि योजना के प्रावधानों को व्यावहारिक बनाया जाएं, ताकि मरीजों और अस्पतालों दोनों को लाभ मिल सके।

अस्पताल पंजीयन व चिकित्सक सुरक्षा पर जोर

चिकित्सकों ने अस्पतालों के पंजीयन और नवीनीकरण की प्रक्रिया को सरल बनाने की मांग की। साथ ही चिकित्सकों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई गई। उन्होंने कहा कि बिना जांच-पड़ताल के चिकित्सकों पर प्रकरण दर्ज न किए जाएं और उनकी सुरक्षा के लिए ठोस नीति बनाई जाए। टॉक शो में प्राथमिक चिकित्सा व्यवस्था को मजबूत करने की भी मांग उठी। चिकित्सकों का मानना है कि यदि प्राथमिक स्तर पर बेहतर इलाज उपलब्ध होगा, तो बड़े अस्पतालों पर दबाव कम होगा। कुल मिलाकर पत्रिका टॉक शो में चिकित्सकों ने आगामी बजट से स्वास्थ्य क्षेत्र में ठोस और जनहितकारी फैसलों की उम्मीद जताई।

सरकारी होना चाहिए था मेडिकल कॉलेज: आइएमए

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के चिकित्सकों ने पत्रिका टॉक शो में शहर में शुरू होने जा रहे पीपीपी मोड के मेडिकल कॉलेज से संतुष्ट नहीं हैं। चिकित्सकों का कहना है कि यदि यह सरकारी होता तो जिले को बड़ा फायदा होता। पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप वाले मेडिकल कॉलेज में इलाज महंगा होगा। इस पर सरकार को ध्यान देना चाहिए। जरुरतमंदों का समय पर सही इलाज हो, इस पर फोकस किया जाना नितांत आवश्यक है।

चिकित्सकों ने रखी यह राय

सर्जरी के लिए लगने वाली सामग्री बहुत महंगी है। वास्तविक कीमत व एमआरपी में बड़ा अंतर होता है। इससे अस्पताल के खर्चे बढ़ जाते हैं, जिसका बोझ मरीज व उनके परिजनों पर पड़ता है। चिकित्सका के क्षेत्र में लगने वाली सामग्री व दवाओं के दाम पर सरकार का नियंत्रण बेहद आवश्यक है। दवाओं के दाम पर नियंत्रण होगा तो सीधा लाभ जनता को मिलेगा।

डॉ. एलएन खंडेवाल, वरिष्ठ चिकित्सक।

आयुष्मान योजना जब शुरू हुई थी तो प्राइवेट व नर्सिंग होम व सरकारी मेडिकल कॉलेज के लिए एक पैकेज था। सरकारी में सभी पैकेज हैं, लेकिन निजी के काट लिए गए हैं, जिसे चालू होना चाहिए। इससे कई बीमारियों का इलाज चाहकर भी नहीं कर पा रहे हैं। एक बराबर दर्जा दिए जाने से मरीजों को बड़ा फायदा मिलेगा। इस पर सरकार को गंभीरता से ध्यान देना चाहिए।

डॉ. विकास गुप्ता, चिकित्सक।

प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधाओं को और बेहतर होना चाहिए। चिकित्सा के परिवहन सुविधा सुदृढ़ हो। सरकार की बेहतर योजनाएं चल रही हैं। जिला स्तर से लेकर मेडिकल कॉलेज, स्वास्थ्य केंद्रों में सुविधाएं और सुधरें। किसी भी चिकित्सक पर बगैर जांच के कार्रवाई न हो। हाइकोर्ट व सुप्रीप कोर्ट की गाइड लाइन का पालन किया जाए।

डॉ. मनीष मिश्रा, आरएमओ।

शासन के द्वारा बहुत अच्छी योजनाएं चलाई जा रही हैं। आयुष्मान बहुत खास है। इसमें और सुधार हों। इसमें सेवानिवृत्त कर्मचारियों को शामिल किया जा रहा है। ऐसे ही शासकीय कर्मचारियों को सेवाकाल में, रिटायरमेंट के बाद भी शामिल किया जाए, ताकि उनको भी लाभ मिले। क्योंकि उम्र के चौथे पड़ाव में इलाज प्रमुख समस्या होती है। बड़ी अस्पताल में खर्चों के कारण इलाज महंगा है, वह कम हो। चिकित्सकों की सुरक्षा पर फोकस हो।

डॉ. अशोक चौदहा, पूर्व सीएमएचओ।

अस्पताल व क्लीनिक के पंजीयन का सरलीकरण होना चाहिए। कई विभागों से अनुमति में परेशानी होती है। सिंगल विंडो सिस्टम लागू हो। खर्चें कम हों। चिकित्सा सेवा का क्षेत्र है, लेकिन जीएसटी अधिक है। एएमसी में सर्विस टैक्स लग रहा है। बायो मेडिकल वेस्ट में प्रतिमाह एक बेड का 400 रुपए खर्च आ रहा है। 5 प्रतिशत जीएसटी लग रहा है, बारकोड में 18 प्रतिशत जीएसटी अधिक है। सरकार खुद हेल्थ के क्षेत्र को व्यवसाय बना रही है।

डॉ. राजेंद्र गुप्ता, चिकित्सक।

सरकार की बहुत अच्छी योजनाएं हैं। निक्षय प्रोग्राम चल रहा है, लेकिन देखने में आया है कि समय पर दवाएं नहीं मिलती। निजी व सरकारी सेम्पलों की जांच एक स्थान पर होते हैं। जब मशीनें खराब होती हैं तो समस्या होती है। ऐसे में मरीज को समय पर उपचार नहीं मिल पाता। मरीज के पंजीयन प्रक्रिया कठिन है, जिससे समय पर प्रक्रिया न होने से नियमित उपचार मरीज को नहीं मिल पाता, जिस पर सरलीकरण आवश्यक है।

डॉ. अनमोल चौदहा, चिकित्सक।