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सरकारी दफ्तरों में बिना ‘चढ़ावे’ नहीं हो रहे काम, रिश्वतखोरी बेलगाम, सिस्टम पर गम्भीर सवाल

जिम्मेदारों की चुप्पी पर सवाल, निगरानी सिस्टम सही न होने से अटक रहे काम, लंबित प्रकरणों में नहीं होती जिम्मेदारों पर कार्रवाई

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कटनी

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Balmeek Pandey

Feb 28, 2026

Bribe Case

20 हजार रिश्वत लेते पकड़ाया कार्यपालन यंत्री (Photo Source- Patrika Input)

कटनी. जिले में सरकारी कार्यालयों में भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी आमजन के लिए रोज़मर्रा की बड़ी समस्या बनती जा रही है। हालात यह हैं कि छोटे से छोटे काम के लिए भी लोगों को बार-बार दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं, लेकिन बिना रिश्वत दिए फाइलें आगे नहीं बढ़ रहीं। इससे आम नागरिक आर्थिक, मानसिक और सामाजिक रूप से परेशान हैं। 10 दिन के अंदर रिश्वतखोरी के दो मामले सामने आ चुके हैं। 17 फरवरी को जहां जल संसाधन विभाग के ईई वीए सिद्दकी को लोकायुक्त ने दबोचा तो वहीं 10 दिन के अंदर जिला पंचायत के बाबू सत्येंद्र सोनी घूंस लेते धराए। (Corruption on Rise in Katni District)
सरकारी सेवाओं के लिए पहुंचे जरूरतमंदों का आरोप है कि अधिकारियों और कर्मचारियों का रवैया गैरजिम्मेदाराना है। दस्तावेज बनवाने, भुगतान, प्रमाण पत्र, स्वीकृति, नामांतरण, रिकॉर्ड सुधार, अनुकंपा नियुक्ति या अन्य आवश्यक कार्यों के लिए खुलेआम पैसे मांगे जा रहे हैं। मना करने पर काम टाल दिया जाता है या अनावश्यक आपत्तियां लगाई जाती हैं, जिससे जनता की परेशानी बढ़ती जा रही है।

बढ़ रही रिश्वतखोरी

कुछ जागरूक नागरिकों द्वारा रिश्वतखोरों को उजागर करने की कोशिशें जरूर हो रही हैं, लेकिन भय और मजबूरी के चलते अधिकांश लोग चुप रहने को विवश हैं। सवाल यह है कि यह सब जिला प्रशासन की जानकारी में होते हुए भी क्यों नहीं रुक पा रहा? कटनी में बढ़ती रिश्वतखोरी ने प्रशासनिक व्यवस्था की साख पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है। जनता अब ठोस कार्रवाई और पारदर्शी व्यवस्था की मांग कर रही है, ताकि सरकारी दफ्तर फिर से सेवा के केंद्र बनें, शोषण के नहीं। (lokagit)

हाल में सामने आये ये केस
केस 01

जल संसाधन विभाग के प्रभारी कार्यपालन यंत्री विकार अहमद सिद्दीकी को लोकायुक्त की टीम ने 10 फरवरी को सेवानिवृत्त चौकीदार कुंवरलाल रजक को 8 लाख रुपए के एरियर्स भुगतान के बदले 50 हजार की रिश्वत मांगी और 20 हजार की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया।

केस 02

वर्ष 2023 में लोकायुक्त में ट्रैप होने के बाद पंचायत सचिव आशीष दुबे की बहाली को लेकर जिला पंचायत के लेखापाल सत्येंद्र सोनी ने रिश्वत में 50 हजार रुपए कीमत का मोबाइल मांगा। 26 फरवरी को 5 हजार रुपए की किश्त लेते हुए लोकायुक्त ने गिरफ्तार किया।

केस 03

आनंद चौधरी आईटीआई प्रशिक्षण अधिकारी (टीओ) की शिकायत पर 4 मार्च 25 से आईटीआई के बाबू संदीप बर्मन ने 6 हजार रुपए की रिश्वत मांगी थी। 10 वर्षों की वेतन वृद्धि के एरियर 8 लाख 50 हजार के बिल तैयार करने और भुगतान करवाने के एवज में मांगने पर लोकायुक्त ने रंगेहाथ दबोचा था।

केस 04

बड़वारा बीआरसीसी मनोज गुप्ता को 20 फरवरी 25 को ईओडब्ल्यू की टीम ने 10 हजार रुपए की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया था। बीआरसीसी ने स्कूल की मान्यता नवीनीकरण करने के लिए रिश्वत मांगी थी, जिसे टीम ने दबिश देकर रंगे हाथ गिरफ्तार किया था।

इन पर भी हो चुकी है कार्रवाई
केस 01


23 मई 2022 को नागरिक आपूर्ति निगम के जिला प्रबंधन संजय सिंह व कर्मचारी दीपक मिश्रा को लोकायुक्त की टीम ने 60 हजार रुपए की रिश्वत लेते पकड़ा है। डीएम ने 20 लाख रुपए के बिल पास करने के एवज में ईश्वर रोहरा से रिश्वत ली थी।

केस 02

10 नवंबर 2021 को रंजीत पटेल से राजस्व निरीक्षक मंडल ढीमरखेड़ा के आरआइ राकेश कुमार पांडेय ने सीमांकन उपरांत फील्ड बुक तैयार करने एवं बेदखली आदेश पारित कराने के एवज में 10 हजार रुपए की रिश्वत मांगी थी, जिसे लोकायुक्त ने पकड़ा था।

केस 03

15 दिसंबर 2021 को नगर निगम में पदस्थ सहायक राजस्व निरीक्षक राकेश श्रीवास्तव ने पैतृक मकान बेटे के नाम चढ़ाने के एवज में सुरेश वंशकार से 6 हजार रुपए की रिश्वत लेते जबलपुर लोकायुक्त की टीम ने गिरफ्तार किया है।

केस 04

22 मार्च 2022 को जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में पदस्थ बाबू अजय खरे द्वारा शिक्षक की मौत पर बेटे को अनुकंपा नियुक्ति देने के मामले में राघवेंद्र सिंह से 80 हजार रुपए की रिश्वत की मांग की गई थी। जिसे लोकायुक्त ने 55 हजार रुपए घूस लेने पर रंगेहाथ पकड़ा है।

केस 05

10 मार्च 2022 को बरही तहसील कार्यालय में पदस्थ बाबू उमेश निगम को लोकायुक्त की टीम ने रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया था। बाबू दिलराज अग्रवाल से जमीन संबंधी मामले में घूस की मांग की गई थी।

केस 06

रीठी जनपद क्षेत्र के ग्राम पंचायत देवरीकला के सचिव सुरेंद्र मोहन मिश्रा को लोकायुक्त ने पांच हजार रुपए की रिश्वत लेते हुए 4 अक्टूबर को दबोचा है। आरोपी ने पीएम आवास की किश्त व कन्या विवाह योजना की राशि दिलाने महपाल चौधरी से घूस मांगी थी।

केस 07


कटनी जनपद क्षेत्र के कुलुआ बडख़ेरा रोजगार सहायक प्रवीण कुमार तिवारी ने संबल योजना की सहायता राशि दिलाने के लिए जीरा बाई से 12 अप्रेल 24 को 20 हजार रुपए की रिश्वत की मांग की थी। जैसे ही रुपए लिए तो लोकायुक्त ने दबोच लिया।

केस 08

बरही निवासी किराना कारोबारी दिलराज किशोर अग्रवाल से स्टेट जीएसटी कटनी वृत्त-2 में पदस्थ सहायक ग्रेड-3 नंदकिशोर गर्ग ने जीएसटी नंबर जारी कराने व कभी भी दुकान में जीएसटी की कार्रवाई न होने देने की गारंटी के नाम पर रिश्वत की मांग की थी। लोकायुक्त ने 23 दिसंबर 23 को पांच हजार रुपए की रिश्चत लेते दबोचा है।

संबंधित खबरें

केस 09

19 जून 23 को लोकायुक्त ने पांच हजार रुपए की रिश्वत लेते हुए बड़वारा कृषि विस्तार अधिकारी संतोष गाठे को गिरफ्तार किया था। आरोपी द्वारा खाद-बीज विक्रय का लाइसेंस देने के नाम पर रिश्वत की मांग की गई थी।

केस 10

20 मार्च 23 को खाद्य विभाग में कनिष्ट आपूर्ति अधिकारी को लोकायुक्त ने 30 हजार रुपए की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया था। एस नंदनवार ने स्व सहायता समूह को राशन दुकान दिलाने के नाम पर 50 हजार रुपए मांगे थे।

यह रहा सबसे चर्चित मामला

रेलवे के सीनियर डीमएई एसके सिंह को 23 मार्च 23 को सीबीआई ने दबोचा था। अपने आप को हमेशा ईमानदान व तेज तर्रार अधिकारी साबित करने वाले इंजीनियर द्वारा मशीन सप्लाई करने वाले ठेकेदार के 25 लाख 84 हजार रुपए के बिल पास करने के नाम पर 3 प्रतिशत कमीशन की मांग की गई थी। रिश्वत लेते आरोपी अफसर को गिरफ्तार किया गया था।

रिश्वतखोरों को मिल रहीं सजाएं

-  जून 25 में पटवारी जयकुमार चौधरी को धारा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम में 4 वर्ष का सश्रम कारावास एवं 5 हजार रुपए के अर्थदण्ड की सजा सुनाई गई।
- 27 जुलाई को बिल पास करने के एवज में 35 हजार रुपए की रिश्वत लेने वाले उमरियापान के बीएमओ डॉ. योगेश कुमार झा को न्यायालय विशेष न्यायाधीश की अदालत ने सुनाई तीन वर्ष के कठोर कारावास की सजा।
- 25 मार्च को विशेष न्यायालय भ्रष्टाचार की अदालत ने तहसील कार्यालय के तत्कालीन रीडर संतोष कुमार सोनी को नामांतरण के प्रकरण 15 हजार रुपए की रिश्वत लेने के मामले में 4 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई।
- 7 जनवरी 2022 को भ्रष्टाचार तहसीलदार मनोज सिंह को विशेष न्यायालय भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की अदालत ने 5 वर्ष के कठोस कारावास की सजा सुनाई है। घूसखोर तहसीलदार ने जमीन के मामले में रोहणी प्रसाद से 50 हजार रुपए लिए थे।
- 23 अक्टूबर को विशेष न्यायालय भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की अदालत ने भ्रष्टाचारी सेल्समैन जयकुमार पटेल को 4 वर्ष के कठोस कारावास की सजा सुनाई है। किसान आरके तिवारी से 8 मई 2015 को 2350 रुपए की रिश्वत लेते पकड़ा गया था।
- भ्रष्टाचारी सचिव बुद्धुलाल पटेल ग्राम पंचायत दुर्जनपुर को विशेष न्यायालय भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की अदालत ने कठोर कारावास की सजा सुनाई, सचिव ने अरुण सोनी से 10 हजार रुपए की रिश्वत ली थी।

वर्जन

भ्रष्टाचार करने वालों पर लगातार कार्रवाई हो रही है। लोगों के काम समय पर हों, इसकी लगातार निगरानी की जा रही है। शिकायत प्राप्त होने पर संबंधितों के खिलाफ जांच कार्रवाई कार्रवाई की जाएगी।

आशीष तिवारी, कलेक्टर।