गुरुवार को प्राप्त आंकड़ों के अनुसार तेरह लाख से अधिक लोगों ने चेन्नई छोड़ा ताकि वे मतदान के वक्त अपने घरों में हों। वे निश्चित रूप से सौभाग्यशाली थे, लेकिन हजारों लोग ऐसे थे जिनको बस नहीं मिलीं अथवा बुक की गई बस समय पर नहीं पहुंची और वे चेन्नई सहित अन्य इलाकों में ही अटक गए।
टीवीके प्रमुख विजय ने उठाई मतदान का समय बढ़ाने की मांग, तेरह लाख से अधिक लोग घर लौटे, हालांकि चेन्नई समेत राज्य के विविध कोनों में हजारों मतदाता ऐसे थे, जो परिवहन सुविधा के अभाव का शिकार रहे
चेन्नई. विधानसभा चुनाव में तेरह लाख से अधिक लोगों का पैतृक शहर पलायन हुआ ताकि वे वोट डाल सकें। हालांकि चेन्नई समेत राज्य के विविध कोनों में हजारों मतदाता ऐसे थे, जो परिवहन सुविधा के अभाव का शिकार रहे। बता दें कि चेन्नई राजधानी है और मुख्यालय होने की वजह से सुदूर दक्षिण से लाखों लोग चेन्नई में आकर बस गए हैं। वार-त्यौहार व मतदान के वक्त वे अपने गांव जाते हैं। उनका वोट भी गृह क्षेत्रों में ही हैं। मतदान की तारीख घोषित होने के साथ ही मंगलवार से ही लोगों ने चेन्नई छोड़ना शुरू कर दिया था। गुरुवार को प्राप्त आंकड़ों के अनुसार तेरह लाख से अधिक लोगों ने चेन्नई छोड़ा ताकि वे मतदान के वक्त अपने घरों में हों। वे निश्चित रूप से सौभाग्यशाली थे, लेकिन हजारों लोग ऐसे थे जिनको बस नहीं मिलीं अथवा बुक की गई बस समय पर नहीं पहुंची और वे चेन्नई सहित अन्य इलाकों में ही अटक गए।तेनकाशी जाने वाले यात्री परशुरामन ने आरक्षण करा रखा था। उनकी बस सेवा बुधवार रात की थी लेकिन यह बस गुरुवार सुबह ही पिक करने आई। उनका गुस्सा निजी ट्रेवल सेवा पर फूटा तो साथ ही वे सरकार को भी कोस रहे थे कि उनकी तरह हजारों लोग किलाम्बाक्कम बस टर्मिनस पर रात को धरने पर बैठ गए कि उचित व्यवस्था कराई जाए।
एक अन्य यात्री स्टीफन ने बताया कि उनकी मंगलवार रात की टिकट बुकिंग थी जो ट्रेवल एजेंसी ने कैंसिल कर दिया और अब बुधवार को दोगुनी कीमत पर कोयंबत्तूर जा रहे हैं। वहीं, विमल भारी भाड़े की वजह से नाखुश नजर आया और बोला कि वह मतदान के लिए सेलम नहीं जा रहा है।, वहीं तिरुचि मूल के मतदाता जो चेन्नई में बसे हैं सुबह पांच बजे ही कार लेकर रवाना हो गए।इस बीच हजारों चौपहिया वाहन मतदान की सुबह ही चेन्नई और उपनगरीय इलाकों से अन्य जिलों के लिए निकले। इसका स्पष्ट दबाव पेरुंगलत्तूर से किलाम्बाक्कम बस टर्मिनस तक के तीन किमी के दायरे में दिखाई दिया। हजारों कारें कतारबद्ध थी और मतदान केंद्र में लाइन में लगे लोगों का अनुभव करा रही थी। यहां यातायात पुलिस ट्रैफिक मैनेज करने में विफल दिखाई दी।
बस टर्मिनस का भी यही हाल था। भारी भीड़ के बीच जो भी बस मिल रही थी यात्री उसमें खचाखच थे। ऊपर से गर्मी की मार ने उनका जीना मुहाल कर रखा था लेकिन वे इस उम्मीद में थे कि घर जाकर वोट कर सकेंगे।
विजय ने उठाया मसला, सुनियोजित कुप्रबंधन का आरोप
टीवीके प्रमुख विजय ने नीलांगरै में वोट डालने के तत्काल बाद चुनाव आयोग को पत्र लिखा और उक्त समस्या को ध्यान में रखते हुए वोटिंग का समय दो घंटे बढ़ाकर आठ बजे तक करने की मांग की।उन्होंने लिखा, चेन्नई और अन्य शहरों के बस टर्मिनलों पर फंसे हजारों मतदाताओं के लिए आपातकालीन सार्वजनिक परिवहन सेवा तत्काल शुरू की जाए। कोयंबेडु, किलाम्बाक्कमऔर माधवरम जैसे बस अड्डों पर भारी संख्या में नागरिक फंसे रहे, जिससे वे अपने मतदान केंद्रों तक नहीं पहुंच सके।पत्र में कहा गया कि तमिलनाडु के कई शहरों में सामान्य यात्रियों के लिए बस या वैकल्पिक सार्वजनिक परिवहन उपलब्ध नहीं है। विजय ने आरोप लगाया कि यह राज्य परिवहन निगम और प्रशासन की गंभीर चूक है, जिससे मतदाताओं के संवैधानिक अधिकार प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने लिखा, "यह न सिर्फ असुविधा है, बल्कि यह सुनियोजित कुप्रबंधन का प्रयास लगता है।" विजय ने कहा कि अगर तुरंत कार्रवाई नहीं हुई तो मतदाता प्रभावित होगा और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में जनता का विश्वास डगमगाएगा।
अन्नामलै का भी सवाल
तमिलनाडु भाजपा के पूर्व अध्यक्ष के. अन्नामलै ने भी कोयम्बत्तूर में वोट डालने के बाद पत्रकारों से वार्ता में माना कि परिवहन सुविधा प्रभावित हुई है। उन्होंने किलाम्बाक्कम बस टर्मिनस में यात्रियों के फंसे होने व प्रदर्शन करने का हवाला देते हुए कहा कि चुनाव आयोग को परिवहन विभाग का नियंत्रण अपने हाथों में रखना चाहिए था ताकि बस सेवाओं में किसी भी तरह का व्यवधान डाले जाने की आशंका नहीं रहती।