कर्ज के चलते युवक ने दी जान, फाइनेंसर पर धमकाने का आरोप, आरोपी की गिरफ्तारी की मांग को लेकर परिजनों ने शव लेने से किया इनकार, पुलिस ने आत्महत्या दुष्प्रेरण का मामला दर्ज कर आरोपी को किया राउंडअप
पीलीबंगा. शहर में पनप रहे अवैध फाइनेंस के धंधे ने एक और जिंदगी निगल ली।
फाइनेंसर ने चार घंटे में 35 से ज्यादा बार कर्ज लेने वाले युवक को फोन किया। इनमें पैसों की वसूली के लिए धमकाने का आरोप मृतक के परिजनों ने फाइनेंसर पर लगाया है। अंतत: सूदखोरों के चक्कर में फंसकर युवक को जान गंवानी पड़ी। पीलीबंगा कस्बे में शुक्रवार शाम 42 वर्षीय मुकेश कुमार ने घर के ऊपर कमरे में फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। मृतक के पिता मदनलाल की रिपोर्ट पर पुलिस ने शनिवार को आरोपी फाइनेंसर महेंद्र कुमार उर्फ सेंटर अग्रवाल के विरुद्ध आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज कर उसे राउंडअप कर लिया।
पुलिस के अनुसार वार्ड पांच निवासी मदनलाल धींगड़ा ने रिपोर्ट दी कि उसका पुत्र मुकेश कुछ समय से फाइनेंसर महेंद्र अग्रवाल से पैसों के लेनदेन के चलते मानसिक रूप से परेशान था। महेंद्र आए दिन मुकेश के घर में घुसकर उसके साथ गाली-गलौच करता और जान से मारने की धमकियां देता था। शुक्रवार को भी आरोपी ने मुकेश के परिवार के सामने अपमानजनक व्यवहार किया और धमकियां दी। मृतक के मोबाइल में महेंद्र के किए गए 35 से अधिक व्हाट्सएप और सामान्य कॉल्स मिले हैं, जो दोपहर तीन से शाम सात बजे तक किए गए थे। मानसिक उत्पीडऩ से क्षुब्ध होकर मुकेश ने आत्मघाती कदम उठा लिया। घटना के बाद मृतक के परिजनों ने शनिवार को आरोपी की गिरफ्तारी की मांग को लेकर शव लेने से इनकार करते हुए राजकीय चिकित्सालय में धरना शुरू कर दिया। धरने में शामिल मृतक के पिता मदनलाल धींगड़ा, देवेंद्र धींगड़ा, जगदीश चंद्र, वेद प्रकाश चुघ, राजेश धींगड़ा, महेश कालड़ा, सतीश दुआ, ममता धींगड़ा, शिल्पा आदि ने आरोपी को गिरफ्तार नहीं करने तक शव उठाने से इनकार कर दिया। आखिरकार शनिवार दोपहर को पुलिस ने महेंद्र को उसके घर से राउंडअप किया। इसके बाद परिजनों ने धरना समाप्त कर दिया तथा गमगीन माहौल में मृतक के शव का अंतिम संस्कार किया गया। गौरतलब है कि मृतक मुकेश के बड़े भाई राकेश धींगड़ा की करीब पांच साल पहले सडक़ दुर्घटना में मौत हो चुकी है।
शहर में कुछ लोग अवैध रूप से किए जा रहे फाइनेंस के धंधे में 10 रुपए से अधिक प्रति सैकड़ा की भारी ब्याज दर से धन वसूली करते हैं। गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए अवैध फाइनेंस का धंधा आर्थिक शोषण का जरिया बन चुका है। बीते शुक्रवार की शाम की यह घटना शहर में हो रहे अवैध फाइनेंस कारोबार की भयावहता को उजागर करती है। मुकेश कुमार की आत्महत्या करने के पीछे फाइनेंस का भारी भरकम ब्याज ही कारण बताया जा रहा है। नागरिकों ने बताया कि फाइनेंसर भारी भरकम ब्याज के लालच में युवाओं को आसानी से रुपए उपलब्ध करवा देते हैं। घरवालों से छिपकर इन फाइनेंसरों को चेक सहित अन्य दस्तावेज सौंपकर रुपए ले लेते है। लेकिन भारी भरकम ब्याज की राशि अदा नहीं कर पाने के चलते आखिरकार वह मौत को गले लगा लेते हंै।(पसं.)