2 अप्रेल को हाईकोर्ट में आवेदन-आपत्तियों पर सुनवाई से पहले दायर की अर्जी
धार. भोजशाला के धार्मिक स्वरूप को लेकर चल रहे विवाद में नया मोड़ आ गया है। उच्च न्यायालय में प्रस्तावित सुनवाई से ठीक पहले मुस्लिम पक्ष सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। कमाल मौलाना वेलफेयर सोसायटी की ओर से अब्दुल समद ने विशेष आवेदन प्रस्तुत कर एएसआइ द्वारा कराए गए सर्वे की वीडियोग्राफी साक्ष्य उपलब्ध कराने की मांग उठाई है। आवेदन में कहा गया है कि सर्वे के दौरान की वीडियोग्राफी साक्ष्य मांगे गए थे, लेकिन 16 मार्च की सुनवाई में इस पर कोई स्पष्ट निर्देश नहीं दिया गया। इसके बाद सीधे 2 अप्रेल की तारीख आवेदन और आपत्तियों की सुनवाई के लिए तय कर दी गई, जिससे मुस्लिम पक्ष को अपनी आपत्तियां प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने में कठिनाई हो रही है।
मामले में मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की डबल बेंच के न्यायाधीश विजय कुमार शुक्ला और आलोक अवस्थी के समक्ष 2 अप्रेल को संबंधित याचिकाओं और आवेदनों पर सुनवाई प्रस्तावित है। मूल याचिका वर्ष 2022 में हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की ओर से दायर की गई थी। इस दौरान चार अन्य व्यक्तियों और संस्थाओं ने भी हस्तक्षेपकर्ता के रूप में आवेदन दिए हैं, जिन पर भी सुनवाई की जाएगी।
कमाल मौलाना वेलफेयर सोसायटी के अध्यक्ष अब्दुल समद ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा पूर्व में दिए गए अधिकारों के तहत उन्होंने 23 मार्च को आवेदन प्रस्तुत किया है। इसमें एएसआइ सर्वे की वीडियोग्राफी उपलब्ध कराने की मांग की गई है। इस आवेदन पर 1 अप्रेल को सुनवाई संभावित है।
मुस्लिम पक्ष का कहना है कि यदि वीडियोग्राफी साक्ष्य उपलब्ध कराए जाएं, तो वे तथ्यात्मक आधार पर अपनी आपत्तियां दर्ज कर सकते हैं। साक्ष्य नहीं मिलने से उनका अधिकार प्रभावित हो रहा है, इसलिए सुप्रीम कोर्ट से हस्तक्षेप की मांग की गई है।