टीम ने किया सर्वे, मिट्टी के सैम्पल लिए, 15 दिन में आएगी विस्तृत रिपोर्ट राजर्षि भर्तृहरि मत्स्य विश्वविद्यालय के दोनों भवन के बेसमेंट में बारिश के दौरान भरने वाले पानी की समस्या से स्थाई निजात मिलने की उम्मीद है। आइआइटी कानपुर की टीम इसका स्थाई समाधान करेगी। इस टीम ने शुक्रवार को विश्वविद्यालय परिसर का […]
टीम ने किया सर्वे, मिट्टी के सैम्पल लिए, 15 दिन में आएगी विस्तृत रिपोर्ट
राजर्षि भर्तृहरि मत्स्य विश्वविद्यालय के दोनों भवन के बेसमेंट में बारिश के दौरान भरने वाले पानी की समस्या से स्थाई निजात मिलने की उम्मीद है। आइआइटी कानपुर की टीम इसका स्थाई समाधान करेगी। इस टीम ने शुक्रवार को विश्वविद्यालय परिसर का दौरा किया और पानी भरने के मूल कारणों को जाना। बताया जा रहा है कि भवन के चारों ओर जल निकास व्यवस्था, मिट्टी की प्रकृति और पानी के रिसाव के कारण बेसमेंट में पानी भर रहा है। टीम ने यहां मिट्टी के सैंपल भी लिए। इनकी जांच के बाद 15 दिन में विस्तृत रिपोर्ट सौंपी जाएगी। जांच दल में आइआइटी कानपुर के प्रो. गौरव तिवारी, प्रो. अर्घाया दास और अमित प्रसाद रहे। आरएसआरडीसी के पीडी सतीश कुमार भी टीम के साथ मौजूद रहे।
अनुपयोगी हो रहे हैं बेसमेंट
विश्वविद्यालय के दोनों भवन के बेसमेंट का उपयोग लाइब्रेरी, प्रैक्टिकल लैब और अन्य शैक्षणिक गतिविधियों के लिए किया जाना था, लेकिन लगातार पानी भरने की समस्या के कारण अब तक इनका उपयोग नहीं हो सका। अब स्थाई समाधान हुआ तो विवि प्रशासन को अतिरिक्त जगह मिल सकेगी।
ग्राउटिंग और वाटरप्रूफिंग से रोकेगा रिसाव
आइआइटी की टीम ने सुझाव दिया है कि भवनों की ग्राउटिंग और वाटरप्रूफिंग कर पानी के रिसाव को रोका जा सकता है। पूरे कैंपस के लिए मजबूत ड्रेनेज सिस्टम विकसित करना जरूरी है, ताकि बारिश का पानी जमा होकर बेसमेंट तक न पहुंचे। बताया जा रहा है कि चिकनी मिट्टी में पानी सूख नहीं पाता है, जिससे रिसाव की समस्या और बढ़ जाती है।
राजभवन तक पहुंचा था मामला
बेसमेंट में पानी भरने का मुद्दा लंबे समय से चर्चा में रहा है। मामला राजभवन तक पहुंच चुका है। कई बार जांच टीमें भी आईं, लेकिन समाधान नहीं निकल पाया। राजस्थान पत्रिका ने भी इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया, जिसके बाद अब समाधान होने की उम्मीद है।