नोएडा

सोशल मीडिया पर घिरा प्रशासन तो पीछे हटी पुलिस! GBU छात्र अक्षत त्रिपाठी को जारी 5 लाख का नोटिस वापस

Akshat Tripathi : सोशल मीडिया पर विवाद बढ़ने के बाद नोएडा पुलिस ने यू-टर्न लिया है। गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय के छात्र को शांति भंग की आशंका में जारी किया गया नोटिस पुलिस ने वापस ले लिया है।
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Updated: 8 Sep 2026, 3:49 PM IST
Noida Student Akshat Tripathi 9
गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय के छात्र अक्षत त्रिपाठी (फोटो x @SFI_CEC)

Noida Police U Turn Akshat Tripathi Notice: गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय के छात्र अक्षत त्रिपाठी को दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन में शामिल होने के आरोप में जारी 5 लाख रुपये के मुचलके वाला नोटिस वापस ले लिया गया है। सोशल मीडिया पर विवाद बढ़ने के बाद नोएडा पुलिस ने यू-टर्न लिया है। पुलिस का कहना है कि 4 सितंबर को जारी नोटिस उसी दिन निरस्त कर दिया गया था और छात्र को अवगत भी करा दिया गया।

ईकोटेक-वन कोतवाली का मामला

मामला ईकोटेक-वन कोतवाली में दर्ज वाद सरकार बनाम अक्षत त्रिपाठी पुत्र विनोद कुमार त्रिपाठी से जुड़ा है। कार्यपालक मजिस्ट्रेट तृतीय, ग्रेटर नोएडा कमिश्नरेट की अदालत ने एसीपी कोर्ट के माध्यम से 4 सितंबर को धारा 126/135 बीएनएसएस के तहत कार्रवाई करते हुए धारा 130 बीएनएसएस का नोटिस जारी किया था।

5 लाख रुपये का निजी मुचलका भरने का आदेश

छात्र को 5 लाख रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही राशि की दो स्थानीय संपन्न व्यक्तियों की जमानत पर छह माह तक शांति बनाए रखने के लिए कारण बताने को कहा गया था। सुनवाई 5 सितंबर को तय की गई थी। पुलिस रिपोर्ट के अनुसार अक्षत मूल रूप से प्रयागराज के रहने वाले हैं और वर्तमान में ईकोटेक-वन क्षेत्र में रहकर जीबीयू में पढ़ाई करते हैं।

छात्रों को उकसाने का आरोप

आरोप था कि वे एक राजनीतिक दल द्वारा प्रस्तावित धरने में शामिल होने के लिए विश्वविद्यालय के अन्य छात्रों को उकसा रहे थे और सरकार विरोधी भ्रामक बातें फैला रहे थे। यह आख्या थाना ईकोटेक-1 में तैनात उपनिरीक्षक शिवा पांडेय ने दी थी, जिसे प्रभारी निरीक्षक ने आगे बढ़ाया था। रिपोर्ट में कहा गया था कि छात्र की गतिविधियों से विश्वविद्यालय परिसर में तनाव की स्थिति बन गई है।

छात्र ने सभी आरोपों से किया इनकार

अक्षत त्रिपाठी ने सभी आरोपों से इनकार किया है। सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो में उन्होंने कहा कि उन्होंने शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन में हिस्सा लिया था। उस दौरान वे यूनिवर्सिटी की क्लास में नहीं थे क्योंकि संस्थान करीब तीन महीने से बंद था। उन्होंने दावा किया कि 20 जुलाई को संसद की ओर मार्च के दौरान दिल्ली पुलिस की कार्रवाई में वे घायल भी हो गए थे।

सोशल मीडिया बैकलैश के बाद पुलिस बैकफुट पर

नोटिस की कॉपी सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद छात्र संगठनों ने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला बताया। इसके बाद पुलिस बैकफुट पर आई और नोटिस वापस लेने की बात कही। पुलिस का आधिकारिक रुख है कि जानकारी संज्ञान में आने के तुरंत बाद नोटिस निरस्त कर दिया गया था। यह घटना छात्रों के प्रदर्शन अधिकार और प्रशासनिक कार्रवाई के बीच विवाद को फिर से चर्चा में लाई है।

Updated on:
8 Sep 2026, 3:49 PM IST
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