नोएडा में दिनदहाडे़ हुई अंकित चौहान की हत्या के मामले में एक साल बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मामला सीबीआई को सौंप दिया है। इसका कारण नोएडा पुलिस को हत्यारों के विषय में कोई भी तथ्य न निकाल पाना है। पुलिस एक साल में आरोपी तो दूर हत्या की वजह तक नहीं पता लगा सकी है। पुलिस जांच के इसी रवैये को देखते हुए अंकित के परिजन पिछले काफी समय से मामले की जांच सीबीआई को सौंपने की मांग कर रहे थे, जिस पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मोहर लगा दी है।
इलाहाबाद कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि इस केस को लेकर नोएडा पुलिस पहले ही काफी देर कर चुकी है। ऐसे में सीबीआई को इसमें देरी न करते हुए तत्काल जांच शुरू कर देनी चाहिए। वहीं इलाहाबाद कोर्ट के इस आदेश का अंकित के परिजनों ने स्वागत किया है। वे पिछले काफी समय से नोएडा पुलिस के बजाए मामले की जांच सीबीआई से कराना चाहते थे। कोर्ट ने मामला सीबीआई को सौंपने के साथ ही तीन माह में जांच रिपोर्ट पेश करने के आदेश दिए हैं। कोर्ट ने कहा कि सीबीआई इसमें तेजी से काम करे।
मूलरूप से मेरठ निवासी अंकित चौहान इंद्रापुरम की कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर था। उसकी शादी हत्या से डेढ़ माह पूर्व ही मुजफ्फनगर निवासी अमीषा चौहान से हुई थी। अमीषा भी सेक्टर-135 स्थित एक कंपनी सॉफ्टवेयर इंजीनियर थी। 5 अप्रैल 2015 को ही अंकित अपनी पत्नी के साथ सेक्टर-76 स्थित प्रतीक लोरियल सोसायटी के एक फ्लैट में शिफ्ट हुआ था। 13 अप्रैल 2015 की दोपहर वह अपने दोस्त गंगन के साथ अपनी पत्नी अमीषा को उसकी कंपनी छोड़ने गया था। यहां से लंच कर वह अपनी फार्च्यूनर कार से दोस्त गंगन के साथ लौट रहा था।
इसी दौरान दिनदहाडे सेक्टर-76 के पास ही होंडा अकॉर्ड कार सवार बदमाशों ने उसे ओवरटेक कर रोक लिया। जब तक अंकित कुछ समझ पाता बदमाशों ने उस पर गोलियां बरसानी शुरू कर दी। बदमाश अंकित को तीन से गोलियां मारकर फरार हो गए। वहीं अंकित का दोस्त गंगन उसे राहगीरों की मदद से अस्पताल लेकर पहुंचा। जहां डॉक्टरों ने अंकित चौहान को मृत घोषित कर दिया।
अंकित की हत्या कोतवाली सेक्टर-49 क्षेत्र में हुई थी। ऐसे में जांच कोतवाली में उस समय तैनात एसओ मनोज यादव को सौंपी गई। वहीं सीओ राजकुमार मिश्रा मौजूद रहे। धीरे-धीरे कर अब तक कोतवाली में चार एसओ और दो सीओ बदल चुके हैं, लेकिन अंकित की हत्या मामले में आरोपियों तक पहुंचने के लिए किसी को कोई सुराग हाथ नहीं लगा।