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Rajasthan Elections : राजस्थान में होने हैं पंचायत-निकाय चुनाव! बूथ पर धीमी पड़ी एजेंट नियुक्ति, कांग्रेस पिछड़ी

Rajasthan Elections : राजस्थान में आगामी दिनों में पंचायत-निकाय चुनाव होने वाले हैं। बढ़े हुए बूथों पर एजेंट नियुक्ति की प्रक्रिया धीमी हो गई है। इस प्रक्रिया में भाजपा आगे तो कांग्रेस पिछड़ी है।

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भाजपा-कांग्रेस झंडा। फोटो पत्रिका

Rajasthan Elections : राजस्थान में एसआइआर अभियान के दौरान बूथ मैनेजमेंट को लेकर सक्रिय दिखें राजनीतिक दल अब अभियान खत्म होते ही सुस्त पड़ गए है। बढ़े हुए बूथों पर एजेंट नियुक्ति की प्रक्रिया ठंडे बस्ते में जाती नजर आ रही है। हालांकि भाजपा ने अपनी स्थिति में कुछ सुधार करते हुए एजेंटों की संख्या बढ़ाई है, लेकिन कांग्रेस इस रफ्तार को बरकरार नहीं रख सकी है।

कांग्रेस नेताओं का कहना है कि ग्राम व वार्ड अध्यक्ष नियुक्ति के कारण बूथ एजेंट नियुक्ति प्रक्रिया धीमी हुई है, लेकिन जल्द सभी बूथों पर नियुक्ति का काम पूरा करेंगे। वहीं भाजपा नेताओं का मानना है कि जमीनी पकड़ मजबूत करने के लिए बूथ एजेंट की नियुक्ति जरूरी है। एसआइआर के दौरान ही बूथों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है, बढ़े हुए बूथों पर भी एजेंट नियुक्त किए जा रहे हैं। प्रदेश में एसआइआर अभियान के बाद बूथों की संख्या 52,439 से बढ़कर 61,404 हो गई है। इसके बावजूद भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दल अब तक सभी बूथों पर एजेंट नियुक्त नहीं कर पाए हैं, जबकि निकट भविष्य में पंचायत और निकाय चुनाव होने हैं।

अन्य दलों की स्थिति कमजोर

अन्य दलों की स्थिति अपेक्षाकृत कमजोर है। बीएसपी 363, सीपीआइएम 797, आम आदमी पार्टी 149, आरएलपी 1,306 और बीएपी करीब 1,303 बूथों पर ही एजेंट नियुक्त कर सके हैं। जबकि बूथ स्तर पर अधूरी तैयारी चुनावी रणनीति को प्रभावित करती है। ऐसे में समय रहते नियुक्तियां दलों को करनी होंगी।

दोनों दलों को अब भी 8 से 10 हजार बूथों पर एजेंट करने हैं नियुक्त

एसआइआर अभियान के दौरान कांग्रेस ने करीब 51,193 बूथों पर एजेंट नियुक्त कर लिए थे, जबकि भाजपा लगभग 47,555 बूथों तक ही पहुंच सकी थी, लेकिन बाद में भाजपा ने कुछ तेजी दिखाते हुए 53,564 को मजबूत बूथों पर एजेंट नियुक्त कर कांग्रेस को पीछे छोड़ दिया। फिलहाल कांग्रेस 51,399 बूथों तक ही एजेंट बढ़ा पाई है। इसके बावजूद दोनों दलों को अब भी करीब 8 से 10 हजार बूथों पर एजेंट नियुक्त करने बाकी हैं।

बूथ मजबूत तो पकड़ मजबूत

राजनीतिक दलों का मानना है कि बूथ मजबूत होने से पार्टियों की स्थिति को जमीनी मजबूती मिलती है। यदि किसी भी राजनीतिक दल ने बूथ स्तर पर अच्छा काम कर पकड़ बनाया है तो चुनाव में उसे सफलता भी मिली है। एसआइआर के दौरान भी राजनीतिक दलों ने बूथों पर फोकस कर वोटर लिस्ट को दुरूस्त कराने में अहम भूमिका निभाई थी।