नोएडा

गल्फ देशों में युद्ध का असर: नोएडा की इंडस्ट्री पर गहराया संकट, 800 करोड़ का माल डंपिंग यार्ड में

Noida export crisis : ईरान-अमेरिका युद्ध का असर भारत पर दिखने लगा है। नोएडा का निर्यात कारोबार बुरी तरह प्रभावित हुआ है।

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Mar 03, 2026
युद्ध की वजह से नोएडा का निर्यात बुरी तरह से प्रभावित, PC- IANS

नोएडा : गल्फ देशों में जारी युद्ध का असर अब भारत के प्रमुख औद्योगिक शहर नोएडा में साफ तौर पर दिखाई देने लगा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़े तनाव और समुद्री शिपिंग सेवाओं के प्रभावित होने से नोएडा का निर्यात कारोबार बुरी तरह प्रभावित हुआ है।

उद्योग संगठनों के अनुसार, यहां से हर महीने लगभग 1200 करोड़ रुपए का तैयार उत्‍पाद गल्फ देशों को निर्यात किया जाता है, जो फिलहाल ठप पड़ता नजर आ रहा है।

जानकारी के मुताबिक, करीब 800 करोड़ रुपए का उत्‍पाद दो सप्ताह पहले विभिन्न बंदरगाहों के लिए रवाना किया गया था, लेकिन जहाजों की आवाजाही रुकने और शिपिंग लाइनों के बंद होने के कारण यह माल पोर्ट और डंपिंग यार्ड में फंसा हुआ है। कंटेनरों की लंबी कतारें लगी हैं और निर्यातक कंपनियां असमंजस की स्थिति में हैं।

फंसे हुए उत्‍पाद में पैकेज्ड फूड आइटम, रेडीमेड गारमेंट्स, ज्वेलरी, इलेक्ट्रॉनिक्स सामान और मशीनरी पार्ट्स शामिल हैं। खासतौर पर फूड और फैशन से जुड़े उत्पाद समय-सीमा के प्रति संवेदनशील होते हैं। यदि शिपमेंट में अधिक देरी होती है तो न केवल उत्पादों की गुणवत्ता प्रभावित होगी, बल्कि निर्यातकों को भारी आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ सकता है।

नोएडा के कारोबारियों के मुताबिक, सऊदी अरब, कुवैत, कतर, बहरैन, इराक और ईरान जैसे देशों को बड़े पैमाने पर निर्यात किया जाता है। मौजूदा हालात में इन देशों के साथ सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हुई है। जो उत्‍पाद भेजा जा चुका है वह यार्ड में अटका पड़ा है, जबकि जो तैयार माल फैक्ट्रियों से नहीं निकल पाया है, वह कंपनियों के गोदामों में डंप हो रहा है।

स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अधिकांश निर्यातक कंपनियों को गल्फ क्लाइंट्स की ओर से ‘ऑर्डर होल्ड’ के ईमेल प्राप्त हो चुके हैं। कई कंपनियों को साफ संकेत दे दिए गए हैं कि फिलहाल नए ऑर्डर जारी नहीं किए जाएंगे। इससे आने वाले महीनों में उत्पादन घटने, कैश फ्लो पर दबाव बढ़ने और रोजगार पर असर पड़ने की आशंका गहरा गई है।

उद्योगपतियों का कहना है कि यदि हालात जल्द सामान्य नहीं हुए तो सबसे अधिक मार छोटे और मध्यम उद्योगों (एमएसएमई) पर पड़ेगी। जिन इकाइयों ने पहले ही कच्चा माल खरीदकर उत्पादन कर लिया है, उनके लिए स्टॉक को लंबे समय तक होल्ड करना महंगा साबित होगा। बैंकों की ईएमआई, कर्मचारियों का वेतन, बिजली बिल और लॉजिस्टिक्स लागत के बीच कारोबारियों के सामने आर्थिक संकट गहराता जा रहा है।

Published on:
03 Mar 2026 08:05 pm
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