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‘खेल’ में एआइ का ‘मेल’: चुनौतियां भी कम नहीं

हमारे देश की बात की जाए तो क्रिकेट के लिए 'लेवल प्ले' एआइ कंपनी ने ऐसी चमत्कारिक एआइ गेंद, 'थायंकबॉल' लॉन्च की है जो कि खिलाड़ी को खेलना सिखाती है।
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Jul 21, 2026
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डॉ. सचिन बत्रा, (वरिष्ठ पत्रकार एवं तकनीकी विशेषज्ञ)

इंटरनेट की दुनिया में एआइ आज एक ऐसा खेल बन गया है, जिससे फिल्मांकन ही नहीं मनोरंजन और ज्ञानार्जन के तरीके बहुत रोचक बन गए हैं। अब एआइ खेल के मैदान से हासिल डिजिटल रिसर्च और डेटा से जीत के नए मंत्र खोजने व तराशने के काम भी आ रहा है। जब कोई खिलाड़ी मामूली अंतर के चलते विजेता बनने से वंचित रह जाता था, तब सवाल उठता था कि आखिर ऐसा क्या हुआ, कमी कहां रह गई, और बार-बार होने वाली ऐसी विफलताओं को कैसे रोका जाए? सवाल बहुत थे लेकिन विशेषज्ञों के अनुभवी विश्लेषण के बावजूद, ऐसे कई पक्ष थे जो कि मानवीय दृष्टि की पकड़ में नहीं आते थे। लिहाजा खिलाडिय़ों के प्रदर्शन का विश्लेषण स्लो-मोशन वीडियो एनालिसिस से किया जाने लगा। इस तकनीक से खामियां खोजने में कुछ मदद मिली। लेकिन आज एआइ की एल्गोरिदम विश्लेषण तकनीक के जरिये अनगिनत पहलुओं को उजागर करने में आसानी के साथ-साथ पैटर्न पढऩा आसान हो गया है।

कायदे के इसी फायदे के चलते खेल संगठन, खेल प्रशिक्षक, खेल विज्ञानी, प्रशिक्षण अकादमियां ही नहीं मीडिया ने भी खेल की बारीक पड़ताल के लिए एआइ से खेलना शुरू कर दिया है। पहले तो क्रिकेट में सिर्फ तीसरे अंपायर के स्लो-मोशन डिटेक्शन सहित मीडिया इंफोग्राफिक्स से बल्लेबाज के चौके और छक्के मारने की रेंज का विश्लेषण करता था। लेकिन एआइ के कई मायावी यंत्र, आज जीत का तंत्र और मंत्र गढ़कर बताने में सक्षम हो गए हैं। हमारे देश की बात की जाए तो क्रिकेट के लिए 'लेवल प्ले' एआइ कंपनी ने ऐसी चमत्कारिक एआइ गेंद, 'थायंकबॉल' लॉन्च की है जो कि खिलाड़ी को खेलना सिखाती है। यह गेंद स्पीड मापती है, स्पिन और ट्रेजेक्टरी ट्रैक करती है, अंतत: एआइ रिपोर्ट भी तैयार करती है। इसी प्रकार 'स्तूपा स्पोट्र्स एनालिटिक्स' कंपनी अपने एआइ औजारों का उपयोग कर क्रिकेट, हॉकी, कबड्डी, बैडमिंटन और फुटबॉल में एआइ आधारित विश्लेषण की सुविधा प्रदान करती है। जिसमें खिलाडिय़ों के प्रदर्शन की ट्रेकिंग, विरोधी टीम की रणनीतियों का विश्लेषण, खिलाडिय़ों की कमियों की खोज व निवारण सहित विजेता बनने के लिए रणनीतिक सुझाव आदि शामिल हैं। दावा किया जाता है कि यह प्लेटफॉर्म 500 से अधिक परफॉर्मेंस पैरामीटर पर आकलन करते हुए कोचिंग की सही तकनीक, खेल की कमजोरी और फिटनेस के पहलुओं का वैज्ञानिक विश्लेषण करता है।

वहीं 'देशरन' एआइ प्लेटफार्म तो खेलों के लिए ग्रामीण प्रतिभाओं को खोजने में कारगर साबित हो रही है। इसमें मोबाइल आधारित एआइ टेस्टिंग, खिलाड़ी का मूल्यांकन, कोचिंग सिस्टम जैसे सभी विश्लेषणों में लगभग 94 प्रतिशत की सटीकता का दावा किया गया है। ऐसे ही भारतीय स्कूल स्पोट्र्स इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म द्वारा एआइ मूल्यांकन औजार 'एथलॉस' का उपयोग बच्चों में भविष्य की खिलाड़ी प्रतिभा की संभावनाओं का अनुमान लगाने के लिए किया जा रहा है। साथ ही, स्पोट्र्स टेक व प्रसारण कंपनियां भी लाइव डेटा एनालिटिक्स, एआइ कमेंट्री, स्मार्ट हाइलाइट्स और फैन इंगेजमेंट के लिए एआइ व जीपीएस आधारित सिस्टम का उपयोग करती हैं। सच तो यह है कि खेल में एआइ को अब पूरी दुनिया ने अपना लिया है।

अमरीका में एनबीए यानी बास्केटबॉल के लिए टेक कंपनियां, एआइ आधारित प्रसारण से लेकर 360 डिग्री मैच व्यू और आटोमेटेड रिप्ले की सुविधा विकसित कर चुकी हैं। ब्रिटेन में 'हॉक-आइ-एआइ' का टेनिस खेल में उपयोग किया जा रहा है। ऑस्ट्रेलिया में यूस्टार स्पोट्र्स का 'लिओ' एआइ सिस्टम फुटबॉल खिलाडिय़ों के प्रदर्शन और मैच पर एक्सपर्ट रिपोर्ट के लिए सराहनीय साबित हुआ है। इंडोनेशिया में विविध खेलों में ट्रेनिंग से लेकर ट्रैकिंग ही नहीं चोट की चेतावनी भविष्यवाणी करने में 'अप्पा' स्पोर्ट एआइ को लाजवाब माना गया है। इंग्लैंड की फुटबॉल टीम को पेनल्टी कम करने के लिए कोच को एआइ सीख दी जा रही है। एआइ यह भी बता रहा है कि गोलकीपर कब, कहां व किस तकनीक से डाइव लगाएगा और गोल कैसे होगा। स्फिनिक्स सॉल्यूशन की रिपोर्ट में कहा गया है कि स्पोट्र्स एनालिटिक्स का कारोबार 2030 तक 22 बिलियन डॉलर तक पहुंच जाएगा। वहीं ग्लोबल एआइ स्पोट्र्स मार्केट अगले आठ साल में 29 बिलियन डॉलर के पार पहुंचने के आसार हैं। हालांकि एआइ के भारी भरकम खर्च पर सवाल उठाते हुए आइसलैंड के विशेषज्ञ टॉम गुडऑल ने कहा था कि 'इंग्लैंड के पास पर्याप्त धन और स्टाफ है, जबकि हमारे पास संसाधनों की कमी है। एआइ फुटबॉल में अमीर और गरीब टीमों के बीच की खाई को और गहरा कर देगा।' उनका मानना था कि खेल में भी एआइ डिवाइड के चलते समद्ध देश व उनकी टीमें हार-जीत के अंतर को बढ़ा देंगी।

वैसे कहा जाता है कि हर तकनीक का अच्छा ही नहीं बुरा पक्ष भी होता है। इसी प्रकार खेल में एआइ औजार जहां कौशल को विकसित करने, कमियों को दूर करने और जीत सुनिश्चित करने में सहायक भूमिका निभा रहे हैं। वहीं चुनौतीपूर्ण पक्ष यह है कि एआइ मॉडलों पर पूर्ण निर्भरता से फाउल भी होना तय है। जैसे कि प्रतिभा खोज और खेलों में चयन के लिए एआइ की वैज्ञानिक राय ली जा रही है। ऐसा हो सकता है कि आगे चलकर एआइ सुझाव से खिलाडिय़ों के चयन को कथित तौर पर पारदर्शी और पक्षपात रहित मान लिया जाए। किंतु यह तो तय है कि निर्णय प्रक्रिया में एआइ मनुष्यों की असीमित क्षमता, प्रतिस्पर्धाओं व खेल में नवाचार सहित मूल नवप्रयोग का आकलन नहीं कर सकता। लिहाजा, खेल में एआइ का मेल तो खेल से तालमेल बनाने के लिए होना चाहिए न कि भविष्य के खिलाडिय़ों का चयन करने के लिए।

Updated on:
21 Jul 2026 06:23 pm
Published on:
21 Jul 2026 06:23 pm