ओपिनियन

कृष्ण गए राजनीति से

वाजपेयी जी ने संबंधों में दिल को ही सर्वोपरि रखा। दिमाग को बीच में नहीं आने दिया। किसी विवाद में नहीं फंसे। आत्मीयता के कारण बड़े-बड़े नेता उनके आगे बौने लगते थे।
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Aug 17, 2018
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वाजपेयी जी नहीं रहे। जाना तो था। राजनीति में शुचिता की मशाल थे, बुझ गई। अब नहीं लौटेंगे वे दिन। अब कोई कवि हृदय नहीं आएगा राजनीति में, जो क्रान्तदर्शी भी हो और संवेदनशील भी। स्पष्टवादी भी हो, कभी पद से बंधकर जीया नहीं हो, सदा साधारण व्यक्ति बनकर रहा हो। आज देखो, हर नेता को सुरक्षा चाहिए। सुविधा चाहिए। देश के लिए, देशवासियों के लिए कौन अब चिंतित होगा।

वाजपेयी जी ने संबंधों में दिल को ही सर्वोपरि रखा। दिमाग को बीच में नहीं आने दिया। किसी विवाद में नहीं फंसे। आत्मीयता के कारण बड़े-बड़े नेता उनके आगे बौने लगते थे। उनके व्यक्तिगत संबंध ही उनकी सफलता की कहानी बने। कवि होने के कारण विशाल हृदय रहे। दलगत राजनीति से सदा ऊपर रहे। तभी तो विपक्ष में रहकर भी देश का संयुक्त राष्ट्र में प्रतिनिधित्व कर गए। आज संभव है क्या? आज तो देश को विपक्ष मुक्त करने की मुहिम चालू है।

मेरे परिवार का सौभाग्य है कि तीन पीढिय़ों को उनका सानिध्य प्राप्त हुआ। पिताजी के तो अपने रिश्ते थे ही, मैं तो उनके आगे चिडिय़ा के बच्चे जैसा पत्रकार था। मुझे जो सम्मान प्राप्त हुआ उसे व्यवहार का श्रेष्ठ प्रमाण कह सकता हूं। मैं कभी भी उनके घर गया, तुरन्त बुलाया। जितनी देर चाहा बैठने दिया। अच्छी-बुरी हर तरह की चर्चा का अवसर दिया। उनके साथ विदेश दौरों का, यात्रा में अकेले चर्चा करने का भी कई बार अवसर मिला।

स्व. भैरोंसिंह जी द्वारा प्राप्त सम्मान से तो मैं अभिभूत रहा ही हूं। उनके निजी कारण भी रहे। किन्तु वाजपेयी जी ने व्यंग्य और गांभीर्य के बीच संतुलन बनाने का जो मार्ग दिया, वह अद्भुत था। वे स्वयं हिन्दूवादी थे, किन्तु सर्वधर्म समभाव को भी आदर्श की तरह स्थापित कर गए। कश्मीर के मुद्दे पर मानवीयता और कश्मीरीयत को कभी छोटा नहीं पडऩे दिया।

हां, भाजपा नेताओं के बड़बोलेपन से वे प्रसन्न नहीं थे। एक से अधिक बार कहा होगा कि ‘यह हमारा दुर्भाग्य है।’ बड़े लोग समय से पहले पैदा होते हैं, चले जाते हैं और जब समय आता है तब बहुत याद आते हैं। वे ऐसे कूटनीतिज्ञ थे, जिनकी बात का हर पक्ष विश्वास भी करता था और लोहा भी मानता था। वे लोकतंत्र के कुरुक्षेत्र को खाली कर गए। वाजपेयी जी राजनीति की एक ऐसी गीता लिख गए, जिसको पढऩे वाला अर्जुन राजनीति में कब जन्म लेगा, समय तय करेगा।

Published on:
17 Aug 2018 10:13 am