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संपादकीय: साइबर ठगी के चिंताजनक आंकड़े, सतर्कता ही बचाव

इसके लिए केवल पुलिस या साइबर सेल पर्याप्त नहीं हैं। बैंकों, दूरसंचार कंपनियों, सोशल मीडिया मंचों, फिनटेक कंपनियों और तकनीकी संस्थानों के बीच वास्तविक समय में समन्वय स्थापित करना होगा।
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Jul 23, 2026
cyber crime
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डिजिटल भारत की सबसे बड़ी ताकत उसकी तेजी से बढ़ती ऑनलाइन अर्थव्यवस्था है। यह सच है कि मोबाइल बैंकिंग, यूपीआइ, ई-कॉमर्स और डिजिटल सेवाओं ने आम नागरिक का जीवन आसान बनाया है, पर यह भी चिंताजनक तथ्य है कि ये सुविधाएं साइबर अपराधियों के निशाने पर हैं। पिछले पांच वर्ष में देश में साइबर ठगी के जरिए लगभग 55,050 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी होना केवल आर्थिक नुकसान का आंकड़ा नहीं है, बल्कि नागरिकों के भरोसे पर भी हमला है। इस दौरान 65.89 लाख से अधिक शिकायतें और 1.95 लाख एफआइआर इस बात का प्रमाण हैं कि यह संगठित अपराध का नया चेहरा बन चुका है।

इस चिंताजनक तस्वीर में आंशिक राहत देने वाला पहलू यह है कि सरकार की विभिन्न एजेंसियों ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 11,158 करोड़ रुपए की राशि बचाने में सफलता प्राप्त की है लेकिन यह सफलता चुनौती की विशालता को कम नहीं करती। साइबर अपराधियों की तकनीक हर दिन बदल रही है। वे फर्जी निवेश योजनाओं, डिजिटल गिरफ्तारी, केवाईसी अपडेट, नौकरी, लॉटरी, ओटीपी, क्यूआर कोड और अब एआइ आधारित डीपफेक तक का इस्तेमाल कर लोगों को जाल में फंसा रहे हैं। सबसे बड़ी चिंता यह है कि साइबर अपराध अब केवल महानगरों तक सीमित नहीं रहे बल्कि कस्बों और गांवों के लोग भी इसके शिकार बन रहे हैं। डिजिटल साक्षरता की कमी, लालच, भय और जल्दबाजी अपराधियों के सबसे प्रभावी हथियार हैं। कई मामलों में पढ़े-लिखे और तकनीक से परिचित लोग भी ठगी का शिकार हो जाते हैं। इसका अर्थ है कि समस्या केवल जानकारी की नहीं, बल्कि साइबर सुरक्षा संस्कृति के अभाव की भी है। ऐसे मामलों में सरकार के सामने चुनौती दोहरी है। पहली, अपराध होने के बाद त्वरित कार्रवाई और दोषियों को कठोर दंड। दूसरी, अपराध होने से पहले रोकने की प्रभावी व्यवस्था। इसके लिए केवल पुलिस या साइबर सेल पर्याप्त नहीं हैं। बैंकों, दूरसंचार कंपनियों, सोशल मीडिया मंचों, फिनटेक कंपनियों और तकनीकी संस्थानों के बीच वास्तविक समय में समन्वय स्थापित करना होगा। संदिग्ध खातों, फर्जी सिम कार्ड और संदिग्ध डिजिटल गतिविधियों पर तत्काल रोक लगाने वाली एआइ आधारित प्रणाली विकसित करनी होगी। सड़क पर यातायात नियमों की पालना की तरह ही डिजिटल दुनिया में भी सतर्कता ही बचाव है।

अनजान लिंक पर क्लिक नहीं करना, ओटीपी या बैंक संबंधी जानकारी साझा नहीं करना, डिजिटल गिरफ्तारी के डर व निवेश के लालच में नहीं आना और संदिग्ध कॉल की तुरंत शिकायत करने को आदत बनाना होगा। साइबर सुरक्षा को व्यवहारिक शिक्षा का हिस्सा बनाया जाना चाहिए जिससे नई पीढ़ी तकनीक के साथ सुरक्षा भी सीख सके। साइबर अपराधियों से उसी स्तर की तकनीक, तत्परता के साथ मुकाबला करना होगा।

Updated on:
23 Jul 2026 03:28 pm
Published on:
23 Jul 2026 03:28 pm