भारतीय परंपरा में गरिमा का सर्वोत्तम उदाहरण श्रीराम के व्यक्तित्व में मिलता है। अन्याय सहने पर भी सीता माता से वियोग की पीड़ा के मध्य भी वे धैर्य व करुणा के साथ ही आगे बढ़ते हैं।
प्रो. हिमांशु राय - निदेशक, आइआइएम इंदौर,
गरिमा नेतृत्व का ऐसा गुण है, जिसकी प्रशंसा तो बहुत होती है, पर जिसका स्वरूप विरले ही स्पष्ट किया जाता है। यह कोमलता या बाह्य अलंकरण नहीं है, बल्कि जटिल परिस्थितियों में संतुलित रहकर चलने की क्षमता, चुनौतियों के बीच मर्यादा के साथ प्रतिक्रिया देने का सामथ्र्य और अधिकार का प्रयोग करुणा के साथ करने की वृत्ति है। गरिमामय नेतृत्वकर्ता अपने भीतर एक ऐसी लय धारण करते हैं जो अन्य लोगों को स्थिरता प्रदान करती है।
नेतृत्व की वास्तविक परीक्षा अनुकूल परिस्थितियों में नहीं, बल्कि प्रतिकूल समय में होती है। एक लीडर आलोचना या विफलता का सामना किस प्रकार करता है, यह उसके व्यक्तित्व का असल परिचय देता है। भारतीय परंपरा में गरिमा का सर्वोत्तम उदाहरण श्रीराम के व्यक्तित्व में मिलता है। अन्याय सहने पर भी सीता माता से वियोग की पीड़ा के मध्य भी वे धैर्य व करुणा के साथ ही आगे बढ़ते हैं।
गरिमा दुर्बलता नहीं है। इसका अर्थ कठिन संवादों से बचना या यथार्थ को मधुर शब्दों में ढक देना नहीं है। गरिमामय लीडर कठोर प्रतिपुष्टि भी देते हैं, पर इस प्रकार कि व्यक्ति की प्रतिष्ठा अक्षुण्य रहे। वे कठिन निर्णय भी लेते हैं, पर उन्हें सहानुभूति और सम्मान के साथ व्यक्त करते हैं।
गरिमामय लीडरों के कार्यस्थलों में गरिमा का रूप मनोवैज्ञानिक सुरक्षा के रूप में प्रकट होता है। लोग अपने विचार रखने, त्रुटि करने और नवीन प्रयास करने में सहज अनुभव करते हैं। यह इसलिए नहीं कि नेतृत्वकर्ता शिथिल है, बल्कि इसलिए कि उनका स्वर प्रोत्साहन का है, निर्णयात्मकता का नहीं। वे दण्ड देने में शीघ्रता नहीं करते, पहले स्थिति को समझने का प्रयास करते हैं। इससे गहरी निष्ठा और दीर्घकालीन उत्कृष्टता का विकास होता है।
संकट के समय गरिमा स्थिरता का शक्तिशाली आधार बन जाती है। ऐसे लीडर परिस्थिति की गंभीरता के मध्य भी विचलित नहीं होते। उनका शांत भाव निष्क्रिय नहीं, बल्कि सजग और जागरूक होता है। वे अधिक सुनते हैं, कम प्रतिक्रिया देते हैं और ऐसे निर्णय लेते हैं जो विभाजन नहीं, समन्वय उत्पन्न करें। उनके शब्द सत्य होते हुए भी संतुलित और शमनकारी होते हैं। आज जब आक्रामकता और तीव्रता को ही प्राय: सफलता का मानदंड माना जाता है, गरिमा एक शांत किंतु सशक्त प्रतिपक्ष प्रस्तुत करती है। यह बताती है कि शक्ति के साथ नेतृत्व किया जा सकता है, बिना अपनी आत्मिक संवेदना खोए।