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मानसून पर निर्भरता छोड़ अपनाएं टिकाऊ जल प्रबंधन तकनीक

इससे खेती की बारिश की अनिश्चितता का सामना करने की क्षमता भी कमजोर पड़ जाती है। भारत को वर्षा आधारित कृषि को मजबूत बनाने पर सबसे अधिक ध्यान देना चाहिए, क्योंकि देश की लगभग 60 प्रतिशत कृषि भूमि बारिश पर निर्भर है।
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Jul 23, 2026
water problems
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मुनीष कुमार उपाध्याय,(प्रोग्राम एसोसिएट, काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वाटर)

मानसून ने इस साल एक बार फिर याद दिलाया है कि भारत में पानी की सबसे बड़ी चुनौती कम बारिश नहीं, बल्कि इसकी बढ़ती अनिश्चितता है। कहीं पर बाढ़ तो कहीं पर सूखे जैसे हालात बन रहे हैं। खासतौर पर जब अल-नीनो के मजबूत होने की संभावना बनी हुई है, तब सवाल यह नहीं है कि बारिश कितनी कम होगी, बल्कि यह है कि हम इसका सामना करने के लिए कितने तैयार हैं? एक धीमी शुरुआत के बाद दक्षिण-पश्चिम मानसून ने दोबारा रफ्तार पकड़ी है। लेकिन जल सुरक्षा सिर्फ इस बात पर निर्भर नहीं करती है कि कितनी बारिश हुई है, बल्कि इस बात पर निर्भर करती है कि बारिश कब और कहां पर हुई है और इसका प्रबंधन कितने प्रभावी ढंग से किया गया है। जून में सामान्य से लगभग 40 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई, जिससे कई क्षेत्रों में खरीफ फसलों की बुआई में देरी हुई है। 5 जुलाई 2026 तक, भारत के लगभग 58 प्रतिशत जिलों में कम या बहुत कम बारिश हुई, जो मानसूनी बारिश का असमान वितरण दर्शाता है।

केंद्रीय जल आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, 2 जुलाई को भारत के 166 प्रमुख जलाशयों में सिर्फ 47.7 अरब घन मीटर पानी था, जो उनकी कुल जल संग्रहण क्षमता का सिर्फ 26 प्रतिशत है और पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में 39 प्रतिशत कम है। मानसूनी बारिश की असमानता का सबसे ज्यादा असर कृषि क्षेत्र पर पड़ता है। ऐसे में, अगर मानसून में जलाशयों में पर्याप्त पानी नहीं जमा होता है तो खरीफ और रबी, दोनों मौसम में फसलों के लिए नहरों से मिलने वाले सिंचाई के पानी की उपलब्धता और विश्वसनीयता प्रभावित होती है। इससे खेती की बारिश की अनिश्चितता का सामना करने की क्षमता भी कमजोर पड़ जाती है। भारत को वर्षा आधारित कृषि को मजबूत बनाने पर सबसे अधिक ध्यान देना चाहिए, क्योंकि देश की लगभग 60 प्रतिशत कृषि भूमि बारिश पर निर्भर है। इसके लिए मिट्टी में नमी को सुरक्षित रखना जरूरी है। सीईईडब्ल्यू के अनुसार, मृदा स्वास्थ्य सुधार, मल्चिंग, जलद्रोणि विकास और संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन जैसे उपाय मिट्टी की जल धारण क्षमता बढ़ाते हैं, जिससे फसलें सूखे का बेहतर सामना कर पाती हैं। साथ ही, मृदा स्वास्थ्य कार्ड कार्यक्रम को इन प्रयासों से जोडऩे और जल-संकट वाले क्षेत्रों में बाजरा, दलहन व तिलहन जैसी कम पानी वाली फसलों को बढ़ावा देने से खेती अधिक टिकाऊ और जलवायु-अनुकूल बन सकती है। सिंचित क्षेत्रों में पानी की हर बूंद का कुशल उपयोग आवश्यक है। सीईईडब्ल्यू और गुजरात ग्रीन रिवोल्यूशन कंपनी के अध्ययन के अनुसार, सूक्ष्म सिंचाई और विशिष्ट कृषि अपनाने से पानी की खपत 70-80 प्रतिशत तथा ऊर्जा की खपत 25-77 प्रतिशत तक घट सकती है, जबकि फसल उत्पादकता 90 प्रतिशत तक बढ़ सकती है।

इन तकनीकों से भूजल दोहन भी कम होता है। यदि सूक्ष्म सिंचाई, मल्चिंग और नीतिगत सुधारों को बढ़ावा दिया जाए, तो 2030 तक सिंचाई जल का लगभग 20 प्रतिशत बचाया जा सकता है। विशेषकर जल-संकट वाले क्षेत्रों में इन उपायों का विस्तार प्राथमिकता होनी चाहिए। तीसरा, जल-संरक्षण तकनीकों का लाभ सबसे पहले छोटे और सीमांत किसानों तक पहुंचाना जरूरी है, क्योंकि देश की 85 प्रतिशत से अधिक कृषि जोतें इन्हीं के पास हैं और वे मानसून की अनिश्चितता से सबसे अधिक प्रभावित होते हैं। समय पर मौसम संबंधी सलाह, जलवायु-अनुकूल फसलों की जानकारी, सस्ता ऋण, कृषि विस्तार सेवाएं और किसान उत्पादक संगठनों का सहयोग मिलने से ये किसान नई तकनीकों को तेजी से अपनाते हैं। साथ ही, राज्यों को ऐसी नीतिगत बाधाएं दूर करनी चाहिए, जो छोटे किसानों की सूक्ष्म सिंचाई तक पहुंच में रुकावट बनती हैं। चौथा, गांवों के साथ-साथ शहरों को भी जल संकट के लिए तैयार होना होगा।

शहरी भारत को पानी का नुकसान घटाने, वर्षा जल संचयन बढ़ाने, शोधित अपशिष्ट जल के दोबारा इस्तेमाल, ग्राउंड वाटर रिचार्ज सुधारने और मौसमी जल-नियोजन को मजबूत बनाने जैसे कदम उठाने चाहिए। इससे शहरों को पानी से तंग ग्रामीण और अद्र्ध-शहरी स्रोतों से अधिक मात्रा में पानी लाने की जगह पर अपने यहां उपलब्ध पानी के बेहतर ढंग से उपयोग करने में मदद मिलेगी। भारत को अब जल प्रबंधन में 'बारिश-केंद्रित दृष्टिकोण' से हटकर 'लचीलापन-केंद्रित दृष्टिकोण'(रेजिलिएंस-सेंट्रिक अप्रोच) की दिशा में बढऩे की जरूरत है। यहां तक कि सामान्य के करीब रहने वाला मानसून भी देश के बड़े हिस्सों में जल संकट पैदा कर सकता है, क्योंकि सभी समय और जगहों पर एक समान बारिश नहीं होती है। भारत मानसून को तो नियंत्रित नहीं कर सकता है, लेकिन इसके लिए खुद को बेहतर ढंग से तैयार जरूर कर सकता है।

Updated on:
23 Jul 2026 04:53 pm
Published on:
23 Jul 2026 04:53 pm