
(लेटर फ्रॉम चीन)
दा ली, किंग्सवे ग्लोबल के संस्थापक व सीईओ
मैंने 2012 में बीजिंग में अपनी पहली हाफ-मैराथन दौड़ लगाई थी। मेरा समय दो घंटे और दो मिनट रहा था। यह सम्मानजनक प्रदर्शन था, लेकिन जो धावक नब्बे मिनट से कम समय में दौड़ पूरी कर लेते थे, उनके लिए एक विशेष शब्द था- ‘बीस्ट्स ऑफ बर्डन’ (बोझा ढोने वाले जानवर) या ‘इनह्यूमन (गैर-मानव)। यह शब्द हम सर्वोच्च प्रशंसा के रूप में व्यक्त करते थे। उस समय मेरे मन में कभी यह बात नहीं आई कि एक दिन ‘गैर-मानव’ का अर्थ किसी जीवित प्राणी से नहीं, बल्कि किसी मशीन से होगा। 19 अप्रेल, 2025 को बीजिंग में एक हाफ-मैराथन में दौडऩे के लिए २१ मानवाकार रोबोट एक कतार में खड़े थे। उनमें से सबसे तेज रोबोट ने दो घंटे और चालीस मिनट में दौड़ पूरी की। कई रोबोट गिर पड़े। दर्शकों का भरपूर मनोरंजन हुआ।
ठीक एक साल बाद, उसी ट्रैक पर एक मानवाकार रोबोट ने पचास मिनट और बीस सेकंड में फिनिश लाइन पार कर ली। इतनी तेजी से आज तक कोई भी मनुष्य नहीं दौड़ा था। यह बेहद प्रभावशाली उपलब्धि थी। चीन में हमेशा से नई तकनीकों को अपनाने की प्रवृत्ति रही है। करीब बीस वर्ष पहले मेरे कार्यालय में फिंगरप्रिंट एक्सेस लॉक और डिजिटल अटेंडेंस सिस्टम लगाए गए थे। आज हर जगह चेहरे की पहचान से खुलने वाले दरवाजे दिखाई देते हैं। समय के साथ रेस्तरां में खाना परोसने के लिए रोबोट आने लगे और शॉपिंग मॉल्स के प्रवेश द्वारों पर रोबोट स्वागत करने लगे। लगभग एक दशक पहले मेरे एक कर्मचारी ने एक कस्बे में रिसेप्शन रोबोट बेचने का व्यवसाय शुरू करने के लिए इस्तीफा दे दिया था। वे ऐसे रोबोट थे, जो पहले से निर्धारित प्रश्नों के उत्तर दे सकते थे और तय रास्तों पर चल सकते थे। उसे कुछ ग्राहक भी मिले। लेकिन इस प्रकार के प्रोजेक्ट अक्सर समाचारों की सुर्खियां तो बन जाते हैं, पर कुछ समय बाद उनकी चमक फीकी पड़ जाती है और वे धूल फांकने लगते हैं। फिर इस वर्ष का सीसीटीवी स्प्रिंग फेस्टिवल गाला आया और मुझे रोबोटों के बारे में अपनी सोच बदलनी पड़ी। यदि आप चीनी नहीं हैं, तो यह समझने के लिए थोड़ा समय लगेगा कि इस गाला का क्या महत्व है। यह कुछ-कुछ आइपीएल फाइनल, फिल्मफेयर अवॉड्र्स और प्रधानमंत्री के स्वतंत्रता दिवस के भाषण को एक साथ मिलाकर देखने जैसा है, जिसे चीनी कैलेंडर की सबसे महत्त्वपूर्ण रात को करोड़ों लोगों के लिए प्रसारित किया जाता है। इस वर्ष के गाला समारोह में चार चीनी रोबोटिक्स कंपनियों ने अपने रोबोटों को मानव खिलाडिय़ों के साथ मार्शल आर्ट का प्रदर्शन करने के लिए मंच पर भेजा। उस रात के खत्म होने से पहले ही यह प्रदर्शन सोशल मीडिया पर वायरल हो चुका था। चीन के सबसे बड़े और प्रतिष्ठित सांस्कृतिक मंच के केंद्र में मानवाकार रोबोटों को स्थान देना, शीर्ष नेतृत्व की ओर से एक सोचा-समझा संदेश था कि मानवाकार रोबोटों को अब गंभीरता से लिए जाने की जरूरत है।
यहां यह समझने के लिए कि ‘गंभीरता’ का अर्थ क्या है, हमें यह समझना होगा कि चीन और अमरीका ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता की दौड़ को कितने अलग-अलग तरीके से खेलने का फैसला किया है। अमरीकी कंपनियां सबसे शक्तिशाली लैंग्वेज मॉडल यानी सबसे सक्षम मशीनी-मस्तिष्क बनाने की प्रतिस्पर्धा में लगी हैं। चीन ने एक अलग दांव खेला है। उसकी प्राथमिकता सबसे शक्तिशाली मॉडल बनाना नहीं है, बल्कि इनको इस्तेमाल में लेने का सबसे उपयोगी तरीका विकसित करना है। हांगझोऊ स्थित यूनिट्री रोबोटिक्स के संस्थापक वांग शिंगशिंग ने सार्वजनिक रूप से कहा है कि मानवाकार रोबोट दो से तीन साल के भीतर अपने चैटजीपीटी मोमेंट में पहुंच जाएंगे। जब आप किसी रोबोट को एक ऐसे कमरे में रखेंगे जिसे उसने पहले कभी न देखा हो और उससे केवल इतना कहेंगे-‘मुझे एक गिलास पानी लाकर दो’ और वह स्वयं समझ जाएगा कि आगे क्या करना है। आज दुनिया में बिकने वाले सभी मानवाकार रोबोटों में से 80 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी चीन की है। इस विषय पर मेरे बहनोई के साथ हुई एक हालिया बातचीत ने मेरे मन की बची-खुची शंका भी दूर कर दी। वह एक वरिष्ठ कॉर्पोरेट अधिकारी हैं और पारंपरिक चीनी मूल्यों में गहरा विश्वास रखते हैं। वह समझते हैं कि उनकी संस्कृति एक परिवार से उम्मीद करती है कि बच्चे अपने माता-पिता के बूढ़े होने पर उनकी देखभाल करें। लेकिन यह सांस्कृतिक अपेक्षा जनसांख्यिकीय वास्तविकताओं से टकरा रही है।
तीन दशकों की 'एक बच्चा नीति' का परिणाम है कि आज एक अकेले बच्चे के ऊपर दो माता-पिता और चार दादा-दादी की जिम्मेदारी हो सकती है। अर्थात छह लोगों का बोझ उठाने वाला एक अकेला व्यक्ति। दूसरी ओर घरेलू नौकर रखना भी मुश्किल होता जा रहा है, क्योंकि घटते श्रमबल के कारण ऐसी सेवाएं लगातार दुर्लभ और महंगी होती जा रही हैं। सांस्कृतिक आदर्श और वास्तविकता विपरीत दिशाओं में खींच रहे हैं और अंतत: किसी न किसी को तो झुकना ही होगा। मेरे बहनोई उन रोबोटों के विज्ञापन देख रहे थे जो खाना बना सकते हैं, दवाओं का प्रबंधन कर सकते हैं, घर साफ कर सकते हैं और मौसम अच्छा होने पर किसी व्यक्ति को टहलाने के लिए भी ले जा सकते हैं। वह गंभीरता से सोच रहे हैं कि वृद्धावस्था में अपने लिए ऐसा एक रोबोट खरीदेंगे। मैंने उनसे पूछा कि वे केवल एक केयरटेकर क्यों नहीं रख लेते, या समय आने पर अपने बच्चों पर भरोसा क्यों नहीं करते? उन्होंने कहा कि मेरे लिए सबसे महत्त्वपूर्ण चीज निरंतरता है। कोई भी इंसान, चाहे वह कितना ही समर्पित क्यों न हो, हर दिन एक जैसा व्यवहार नहीं कर सकता। लेकिन रोबोट कर सकता है। उसका कोई बुरा दिन नहीं होता। वह आपके लिए कभी इतना व्यस्त नहीं होता कि समय न निकाल पाए। जब मेरे बहनोई जैसे व्यक्ति इस प्रकार सोचने लगते हैं, तो समझ लीजिए कि बुनियादी रूप से कुछ बदल गया है। तकनीक में नहीं, बल्कि संस्कृति में भी। और यह परिवर्तन रातोंरात नहीं हुआ, भले ही बाहर से ऐसा प्रतीत होता हो। चीन कोई भव्य रणनीति प्रकाशित करके दुनिया को उसका मूल्यांकन करने के लिए आमंत्रित नहीं करता। वह केवल एक दिशा तय करता है और फिर चुपचाप नीति, पूंजी, विनिर्माण क्षमता और मानवीय महत्त्वाकांक्षा को उसी दिशा में मोड़ देता है, जब तक कि ये सभी शक्तियां मिलकर ऐसी वास्तविकता न बना दें जिसे दुनिया अनदेखा न कर सके।
मेरे बहनोई 15 साल बाद जब साठ वर्ष के होंगे, यह रोबोट खरीदने की योजना बना रहे हैं। उन्हें लगता है कि वह तकनीक के परिपक्व होने का इंतजार कर रहे हैं। लेकिन मुझे लगता है कि उन्हें इतना धैर्य रखने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। मेरे हिसाब से यह समय तीन वर्ष से अधिक नहीं है। रोबोट आ रहे हैं और चीन उनके स्वागत के लिए तैयार है।
(लेखक सक्रिय उद्यमी हैं, जो वर्तमान में टिकाऊ घरेलू उत्पादों, चीनी बाजार के लिए लग्जरी ब्रांड विपणन और वृत्तचित्र फिल्म निर्माण जैसे क्षेत्रों में कार्यरत हैं)