ओपिनियन

…तो समझ लीजिए ‘पीएम’ भी हो गया

कभी कम्युनिस्ट पार्टी की छात्र इकाई के सक्रिय कार्यकर्ता रहे पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी पर आरएसएस के सरसंघचालक माधवराव सदाशिवराव गोलवलकर के व्यक्तित्व का असर पड़ा।
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Aug 17, 2018
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सन् 1999 में वाजपेयी ने एनडीए के साथ मिलकर दोबार अपनी सरकार बनाई थी। इसमें बीजेपी—एनडीए को लोक सभा की 303 सीटें मिली थी। हैरानी की बात तो यह है कि जिस दिन अटल बिहारी को प्रधानमंत्री के पद की शपथ लेनी थी उस दिन भी 13 तारीख थी। उन्होंने अक्टूबर महीने में शपथ ली थी।

- प्रवीण चंद्र छाबड़ा

जननायक और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के निधन के समाचार से समूचा देश स्तब्ध है। मुझे बरबस ही, उनके साथ बिताए गए पल याद हो आते हैं। याद आती है उनकी जबरदस्त स्मरण शक्ति, वाकपटुता और स्नेहपूर्ण व्यवहार, जिससे वे सामने वाले को चंद मिनटों में ही अपना बना लिया करते थे।

मुझे याद है कि जब वे जनता पार्टी सरकार में विदेश मंत्री थे तो वे राजस्थान में विधानसभा चुनाव प्रचार के लिए आए। उस दौर में विदेश मंत्री के लिए अलग से रेलवे कोच की व्यवस्था हुआ करती थी। उनके साथ अन्य किसी को साथ बैठने की अनुमति नहीं थी। तब जनता पार्टी के जनरल सेक्रेटरी थे आचार्य गिरिराज किशोर। और तब मैं एक समाचार एजेंसी में कार्यरत था।

गिरिराज किशोर ने मुझसे आग्रह किया कि मैं वाजपेयी जी के साथ इस विशेष कोच में कोटा से छबड़ा तक की यात्रा करूं। उनके कहने पर और विशेष इजाजत से मैंने यह यात्रा की। वाजपेयी के साथ उस विशेष रेलवे कोच में, मेरे और वाजपेयी जी के सिवाय अन्य कोई नहीं था। कोटा से छबड़ा तक चार घंटे की यात्रा थी। मुझे जानकारी थी कि वाजपेयी अपने विद्यार्थी जीवन में ही छात्र राजनीति से जुड़ गए थे और वे कम्युनिस्ट पार्टी की स्टूडेंट फेडरेशन के सक्रिय कार्यकर्ता रहे थे।

यात्रा के दौरान मैंने उनसे सवाल कर लिया कि वे कम्युनिस्ट पार्टी से नाता तोडक़र जनसंघ के साथ क्यों और कैसे जुड़े? उन्होंने बताया, ‘जब मैं कानपुर में पढ़ाई कर रहा था तो कभी-कभी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की शाखा में भी जाना हो जाता था। ऐसे में जब आरएसएस के तत्कालीन सरसंघचालक माधवराव सदाशिवराव गोलवलकर कानपुर आए तो उनसे भेंट हुई। गोलवलकर, मेरी कविताओं से काफी प्रभावित हुए और उनके व्यक्तिव का मुझ पर भी काफी असर पड़ा। इसके बाद मेरा झुकाव आरएसएस की ओर बढ़ता चला गया और मैं सदा के लिए आरएसएस से जुड़ गया।’

एक बार जब वे लखनऊ से लोकसभा चुनाव लड़ रहे थे, तब भी मेरी उनसे भेंट हुई। वे चुनाव सभा को संबोधित करने के लिए मंच पर चढ़ रहे थे, उस समय सभा में आई भीड़ को देखकर मैंने उनसे कहा कि आप तो अभी ‘एमपी’ (मेंबर ऑफ पार्लियामेंट) हो गए। उन्होंने वाकचातुर्य का परिचय देते हुए मुझे उत्तर दिया यदि मैं एमपी हो गया तो समझ लीजिए कि मैं ‘पीएम’ भी हो गया। बाद में वे वाकई प्रधानमंत्री बन गए।

Published on:
17 Aug 2018 01:28 pm