पाठकों की मिलीजुली प्रतिक्रियाएं मिलीं, पेश हैं चुनिंदा प्रतिक्रियाएं
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हर दिन खुलें सरकारी विभाग
सरकारी विभागों में ज्यादा छुट्टियां होने के कारण आम आदमी को बहुत परेशानी होती है। बेहतर तो यह है कि सभी अवकाशों को खत्म कर दिया जाए और इसके एवज में अतिरिक्त वेतन दे दिया जाए। सबका साप्ताहिक अवकाश एक ही दिन न हो। सरकारी दफ्तर हर दिन खुलने चाहिए। इसके लिए सरकारी कार्यालयों में स्टाफ बढ़ाया जाया जा सकता है।
-के. उमाशंकर राव, भिलाई, छत्तीसगढ़
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आम जनता को नुकसान
सरकारी विभागों में छुट्टियों से आमजन बहुत पीड़ित है। उसका काम समय पर नहीं होता। इससे उसे नुकसान होता है।
-अजीतसिह सिसोदिया, खारा, बीकानेर
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चक्कर लगाती है जनता
सरकारी कर्मचारी सार्वजनिक अवकाशों के साथ अपनी दूसरी छुट्टियों को जोड़कर दफ्तर से नदारद रहते हैं। इससे लोगों को दफ्तरों के ज्यादा चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। विभागों के कार्यों में देरी हो रही है तथा सरकारी योजनाएं भी धरातल पर लागू नहीं हो पा रही हैं।
-गजेंद्र चौहान, कसौदा, डीग
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राष्ट्र के विकास में बाधा
सरकारी विभागों में बढ़ती छुट्टियों से जनता का काम समय पर नहीं होता है। नतीजा रिश्वत देनी पड़ती है। कर्मचारी आलसी होते जा रहे हैं। विद्यार्थियों का शैक्षणिक स्तर गिर रहा है। राष्ट्र के विकास में बाधा उत्पन्न होती है।
-राजेश भाटी, जैतारण,ब्यावर
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अटक जाते हैं जरूरी काम
सरकारी विभागों में बढ़ती छुट्टियों से जनता की परेशानी बढ़ी है। जरूरी काम अटक जाते हैं। अदालतों में मुकदमों की सुनवाई नहीं होती। शिकायतों का समय पर निराकरण नहीं होता।
शिवजी लाल मीना, जयपुर
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कामकाज प्रभावित
सरकारी विभागो में बढ़ती छुट्टियों से कार्यालयों का काम प्रभावित होता है। इससे न्याय प्राप्ति में विलम्ब होता है, कर्तव्यनिष्ठ कर्मियों पर काम का दबाव बढ़ता है। महापुरुषों की जयंती पर अवकाश की जरूरत नहीं है। ऐसे अवसरों पर उनके जीवन से प्रेरणा लेनी चाहिए।
-बाल कृष्ण जाजू जयपुर
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सरकारी कर्मचारियों की बिगड़ती छवि
सरकारी विभागों में बढ़ती छुट्टियों के कारण आम जनता मे सरकारी कर्मचारियों की छवि नकारात्मक बनती जा रही हैं। इससे सरकारी विभागों पर भी प्रश्न चिह्न लगा रहा है।
-सीएम महावर, रामगंज मण्डी, कोटा
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कार्मिकों की अकर्मण्यता को बढ़ावा
सरकारी विभागों में बढ़ती छुट्टियों से आमजन को परेशानी होती है। साथ ही प्रशासनिक दक्षता में कमी आती है और कार्मिकों में अकर्मण्यता को बढ़ावा मिल रहा है।
-रमेश कुमार जाट, निवाई, टोंक