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Rafale Fighter Jet Deal: भारत-फ्रांस के बीच रक्षा संबंधों को नई धार और रणनीतिक विस्तार

फ्रांस ने विदेश नीति के मोर्चे पर भारत को हमेशा महत्व दिया है। पड़ोसियों के साथ हमारे संबंधों में हस्तक्षेप नहीं किया। दोनों देश न सिर्फ रणनीतिक साझेदार हैं बल्कि जटिल मुद्दों पर एक-दूसरे का समर्थन करते हैं।

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Feb 19, 2026
फ्रांस ने विदेश नीति के मोर्चे पर भारत को हमेशा महत्व दिया है।

डॉ. एन.के. सोमानी,

भारत-अमरीकी व्यापार समझौते की चर्चा और फ्रांस-अमरीकी संबंधों में तनाव की खबरों के बीच फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों का भारत दौरा अत्यंत महत्वपूर्ण है। हालांकि मैक्रों के तीन दिन के इस दौरे का आगाज भारत की आर्थिक राजधानी मुंबई से हुआ, जहां उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ लोकभवन में चल रहे भारत-फ्रांस ईयर ऑफ इनोवेशन का उद्घाटन किया। पीएम मोदी और राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की मौजूदगी में दोनों देशों के बीच डिफेंस, टेक्नोलॉजी, इनोवेशन और एनर्जी सेक्टर में 20 से अधिक समझौतों पर सहमति की घोषणा हुई। जाहिर है इन समझौतों से दोनों देशों के बीच की रणनीतिक साझेदारी और अधिक मजबूत होगी।

दोनों नेताओं ने कर्नाटक में एस125 हेलीकॉप्टर असेंबली लाइन का वर्चुअल उद्घाटन किया। कहा जा रहा है कि एस125 हेलीकॉप्टर माउंट एवरेस्ट की ऊंचाइयों तक उड़ान भरने वाला विश्व का इकलौता हेलीकॉप्टर है, जिसका निर्माण भारत में होगा और दुनियाभर के देशों को एक्सपोर्ट किया जाएगा। यूरोप में फ्रांस भारत का महत्वपूर्ण रणनीतिक सहयोगी है। 1947 में भारत की आजादी के बाद दोनों के बीच राजनयिक संबंध स्थापित हुए। राजनयिक संबंधों की आधारशिला रखे जाने के बाद दोनों देशों ने अपने रिश्तों को मजबूत करना शुरू किया, खासकर जनरल दी गॉल के शासन के दौरान। जनवरी 1998 में जब दोनों देशों के बीच रणनीतिक संबंधों की शुरुआत हुई, उस वक्त फ्रांस पहला पश्चिमी देश था, जिसके साथ भारत की रणनीतिक साझेदारी हुई।

1998 में अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के दौरान जब भारत ने परमाणु परीक्षण किया तो फ्रांस इकलौता पश्चिमी देश था जिसने अमरीका के खिलाफ जाकर भारत का साथ दिया। तत्कालीन राष्ट्रपति जैक्स शिराक ने अमरीकी प्रतिबंधों को खारिज करते हुए भारत के परमाणु परीक्षण का समर्थन किया था। अमरीकी प्रतिबंधों के चलते जब दुनिया के दूसरे देशों ने भारत को हथियार बेचना बंद कर दिया तो फ्रांस ने भारत के लिए अपना हथियार मार्केट खोल दिया। रफाल लड़ाकू विमान और स्कार्पियन पनडुब्बी आपूर्ति के सौदे के बाद फ्रांस (रूस के बाद) भारत का दूसरा सबसे बड़ा रक्षा सप्लायर बन गया है। फ्रांस पहला देश है जिसके साथ मिलकर भारत ने अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन की शुरुआत की थी। दोनों देश नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में भी काम कर रहे हैं।

अहम बात यह है कि फ्रांस ने विदेश नीति के मोर्चे पर भारत को हमेशा महत्व दिया है। पड़ोसियों के साथ हमारे संबंधों में कभी हस्तक्षेप नहीं किया। संक्षेप में कहा जाए तो दोनों देश न केवल रणनीतिक साझेदार हैं बल्कि कई जटिल मुद्दों पर एक-दूसरे का समर्थन करते हैं। दोनों देश इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चीन के प्रभाव को सीमित करने की रणनीति पर भी काम कर रहे हैं। ऐसे समय में जब हिंद प्रशांत क्षेत्र में चीन का प्रभुत्व बढ़ रहा है, मैक्रों के भारत दौरे के दौरान रक्षा क्षेत्र में जो महत्वपूर्ण समझौते हुए हैं उनमें 114 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद के सौदे को भी अंतिम रूप दिए जाने की संभावना है।

भारत सरकार ने वायुसेना के लिए 114 अतिरिक्त लड़ाकू विमानों की खरीद के 3.25 लाख करोड़ रुपए के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। यह हाल के वर्षों में सबसे बड़ा रक्षा सौदा है। इससे न केवल भारत की वायुसेना की ताकत में इजाफा होगा बल्कि भारत के रक्षा उत्पादन को बढ़ावा मिल सकेगा।

हालांकि इस बार मैक्रों 'हॉराइजन 2047' रोडमैप के अनुरूप भारत-फ्रांस रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने के लिए भारत आए हैं। जिस तरह से मोदी-मैक्रों के संयुक्त वक्तव्य में भारत-फ्रांस रणनीतिक साझेदारी को 'विशेष रणनीतिक साझेदारी' के स्तर तक ले जाने की बात कही गई है उससे जाहिर है कि दोनों नेता रोडमैप को लेकर किस कदर गंभीर हैं। 2047 भारत-फ्रांस राजनयिक संबंधों का भी शताब्दी वर्ष है। जुलाई 2023 में पीएम मोदी की फ्रांस यात्रा के दौरान द्विपक्षीय संबंधों के इस रोडमैप को तैयार किया गया था।

मार्च 2018 में जब मैक्रों भारत आए, उस वक्त उन्होंने कहा था कि नई दिल्ली ब्रिटेन को यूरोप के प्रवेश द्वार के रूप में इस्तेमाल करने के बजाय फ्रांस को यूरोप में भारत का सबसे अच्छा साथी समझे। उस वक्त मैक्रों ने कहा था कि यूरोप में ब्रिटेन आपका ऐतिहासिक साझेदार रहा है और मैं चाहता हूं कि फ्रांस नया साझेदार बन जाए। बहुत संभव है मैक्रों की भारत यात्रा उनकी इसी इच्छा का परिणाम है।

Published on:
19 Feb 2026 03:54 pm
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