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असर ‘पड़ोस पहले’ की नीति का

प्रधानमंत्री मोदी की ‘पड़ोस पहले’ की नीति में चीन के बढ़ते प्रभाव के चलते भारत की रणनीति में अब कुछ खास बदलाव नजर आने लगा है।

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May 12, 2018
india nepal relation

- स्वर्ण सिंह, अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकार

इस सप्ताह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की नेपाल औ विदेश मंत्री सुषमा स्वराज की म्यांमार यात्रा हुई। इसी महीने के अंत तक बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना, शांति निकेतन में बांग्लादेश भवन का उद्घाटन करेंगी। इस मौके परबांग्लादेश के महान् कवि काजी नजरूल इस्लाम को डी.लिट् की उपाधि से भी नवाजा जाएगा। अटकलें यह भी हैं कि प्रधानमंत्री मोदी, कोलकाता एयरपोर्ट पर शेख हसीना की अगवानी के लिए जा सकते हैं।

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चीन की ‘बेल्ट एंड रोड’ की मुखर रणनीति के सामने यह भारत की ‘पड़ोस पहले’ की नीति के महत्व को दर्शाता है। चीन के बढ़ते प्रभाव के चलते भारत के पड़ोसी देशों के साथ संबंधों में कुछ खटास आने लगी है। ऐतिहासिक संबंध और अनेक परियोजनाएं जो भारत को पड़ोसी देशों से जोड़ती थीं, आलोचना का विषय बन गई हैं। चीनी निवेश के लुभावने प्रस्ताव से बड़ी परियोजनाएं तीव्रता से बन रहीं है। यह भारतीय परियोजनाओं की गति और आकार को छोटा बना रही है।

भारत-चीन संबंधों में ऐतिहासिक उलझनें, चीन के इस प्रभाव को और भी पेचीदा बना देती हैं। जिसके चलते भारत-नेपाल संबंधों में छोटी अड़चनों पर भी प्रतिक्रिया का अतिरेक देखने को मिलता है। उदाहरण के तौर पर नेपाल के 2015 में लागू किए गए नए संविधान में मधेसी और जनजाति के लोगों के प्रतिनिधित्व को लेकर भारत की ङ्क्षचता को नेपाल ने उसके अंदरूनी मामलों हस्तक्षेप का प्रयास बताया था। प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली ने तो अगस्त 2016 में भारत पर अपनी सरकार का तख्ता पलटने का भी आरोप लगाया था।

म्यामांर में भी रोहिंग्या शरणार्थियों के प्रति भारत के रुख को लेकर कई गलतफहमियां सामने आईं हैं। भारत में रह रहे 40 हजार रोहिंग्या शरणार्थियों को लेकर सावधानी, म्यांमार से अति संवेदनशील संबंधों के अलावा भारत की बदलती नीतियों का भी हिस्सा है। पूर्व में भारत जिसके दरवाजे सभी के लिए खुले रहते थे, वह अब केवल चुनींदा शरणार्थियों को ही शरण की बात करता है। हालांकि इस सतर्कता के साथ भारत ने रोहिंग्या शरणार्थियों के रखीन प्रांत में पुनर्वास के लिए दिसंबर 2017 में 2.5 करोड़ डॉलर की सहायता घोषित की थी। अब विदेश मंत्री की यात्रा के दौरान उनके प्रत्यावर्तन पर विस्तार से वार्ता हुई।

बांग्लादेश के साथ भी चाहे तीस्ता जल संधि को लेकर हो या चीन के बढ़ते प्रभाव को लेकर, कई तरह की उलझनें लगातार बनी रहती हैं। हालांकि सीमा विवाद को सुलझा लेना बहुत बड़ी उपलब्धि है। इन तीनों देशों के साथ इस तरह का तालमेल बनाने में भारत की नजर नेपाल में अगले माह होने वाले ‘बे ऑफ बंगाल इनीशिएटिव फॉर मल्टी सेक्टोरल टेक्निकल एंड इकोनॉमिक कोऑपरेशन’ (बिम्सटेक) शिखर सम्मेलन पर भी है।

पिछले तीन साल से ‘साउथ एशियन एसोसिएशन फॉर रीजनल कोऑपरेशन शिखर सम्मेलन’ के न हो पाने के संदर्भ में मोदी सरकार ने ‘बिम्सटेक’ क्षेत्रीय सम्मेलन को एक अतिरिक्त प्लेटफॉर्म के तौर पर उभारने की कोशिश की है। यह भारत की ‘पड़ोस पहले’ की नीति सुदृढ़ करने में सहायक हो सकता है। हो सकता है कि प्रधानमंत्री अगले महीने फिर नेपाल जाएं। प्रधानमंत्री मोदी की ‘पड़ोस पहले’ की नीति में चीन का बढ़ता प्रभाव सबसे बड़ी चुनौती है। यही वजह है कि भारत की रणनीति में अब कुछ खास बदलाव नजर आने लगा है। अब चीन के साथ बराबरी की होड़ से हटकर, भारत की कोशिश पड़ोसी देशों से अपने ऐतिहासिक, सामाजिक, सांस्कृतिक संबंधों को उभारकर सामने लाने और परस्पर आर्थिक निर्भरता के ढांचे में साझा प्रगति में हिस्सेदारी बनाने की है।

यही वजह है कि मोदी की नेपाल यात्रा की शुरुआत जनकपुर में जानकी मंदिर की पूजा और समापन मुक्तिनाथ मंदिर में पूजा से हुई। उन्होंने नेपाली प्रधानमंत्री के साथ जनकपुर को ‘रामायण पर्यटन सर्किट’ में शामिल करने की घोषणा के साथ बौद्ध और जैन पर्यटन सर्किट आरंभ करने पर भी बात की।
मोदी, नेपाल की राष्ट्रपति बिद्यादेवी भंडारी, उपराष्ट्रपति नंद बहादुर पुन, पूर्व प्रधानमंत्री शेर बहादुर देऊबा और नेपाली कांग्रेस नेता पुष्प कमल दहल प्रचंड से भी मिले।

ओली से परस्पर संबंधों को सुधारने के लिए भी प्रधानमंत्री को अनौपचारिक बातचीत के कई मौके मिले। हालांकि किसी नई संधि पर हस्ताक्षर नहीं हुए परंतु पहले से हो चुकी संधियों को लेकर परियोजनाओं को क्रियान्विति पर जोर रहा। इसमें दोनों नेताओं ने अरुण नदी पर 5800 करोड़ रुपए की लागत वाली तीसरी जलविद्युत परियोजना और नेपाल को ऊर्जा मुहैया कराने वाली दक्षिण एशिया की पहली पाइपलाइन की शुरुआत की। मोटे तौर पर यह साफ है कि भारत की ये कोशिशें चीन और पाकिस्तान से बढ़ती उलझनें और दोनों के दक्षिण एशिया में बढ़ते प्रभाव को लेकर, ‘पड़ोसी पहले’ ही नीति को सुदृढ़ करने के लिए है।

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Published on:
12 May 2018 09:33 am
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