ओपिनियन

Opinion : शिक्षा में डिजिटल युग की चुनौतियों से निपटना होगा

Jan 29, 2025
Feature image

यह संतोष की बात है कि कोविड-19 महामारी के बाद देश में शिक्षा क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव देखने को मिला है। एनुअल स्टेटस ऑफ एजुकेशन रिपोर्ट (असर) की ताजा सर्वे रिपोर्ट में यह तथ्य उजागर हुआ है। देश के करीब 18 हजार गांवों के साढ़े 6 लाख बच्चों पर हुए सर्वे में शिक्षा में आए सुधार के साथ ही डिजिटल युग की नई चुनौतियां भी सामने आई हैं। सरकारी स्कूलों में बच्चों की बुनियादी पढ़ाई और गणितीय कौशल में उल्लेखनीय सुधार से स्पष्ट है कि राज्य सरकारों और संबंधित विभाग के संयुक्त प्रयास रंग ला रहे हैं। मिशन निपुण भारत के अंतर्गत पाठ्यक्रम, शिक्षण सामग्री, प्रशिक्षण और मूल्यांकन में सुधारों ने पहली और दूसरी के बच्चों में सीखने के परिणामों को मजबूत किया है।
'असर 2024' के सर्वेक्षण में पहली बार डिजिटल लिटरेसी पर विशेष ध्यान दिया गया, जिसके नतीजे चिंताजनक और उत्साहजनक दोनों हैं। रिपोर्ट के अनुसार, 14-16 वर्ष के 82.2 फीसदी स्कूली बच्चे स्मार्टफोन का उपयोग करना जानते हैं, लेकिन इनमें से केवल 57 फीसदी ही इसे शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं। यह तथ्य दर्शाता है कि डिजिटल उपकरणों का अधिकतम उपयोग अभी भी मनोरंजन व इससे इतर दूसरे कार्यों की ओर ज्यादा झुका हुआ है। चिंता की एक और बात यह है कि स्मार्टफोन तक पहुंच में लड़कों और लड़कियों के बीच असमानता बनी हुई है। साथ ही सुरक्षा फीचर्स की जानकारी में भी लड़के आगे हैं। यह असमानता लड़कियों की डिजिटल दुनिया में सीमित भागीदारी और सुरक्षा जोखिम को दर्शाती है। शिक्षा की गुणवत्ता को और अधिक सशक्त बनाने के लिए सरकार को सतत प्रयास करने होंगे।
डिजिटल साक्षरता को बढ़ाने और इसे शिक्षा से जोडऩे के लिए विशेष कार्यक्रमों की जरूरत है। स्कूलों में डिजिटल जागरूकता अभियान चलाने और पाठ्यक्रम में साइबर सुरक्षा को शामिल करने से इस असमानता को कम किया जा सकता है। इसके लिए शिक्षा विभाग को स्कूलों और समुदायों के बीच कार्यशालाएं आयोजित कर बच्चों को डिजिटल प्लेटफॉम्र्स के सुरक्षित उपयोग के लिए जागरूक करना होगा। यह रिपोर्ट शिक्षा में हुई प्रगति की झलक दिखाने के साथ-साथ यह चेतावनी भी देती है कि डिजिटल दौर की चुनौतियों से निपटना अभी बाकी है। राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, यूपी, हरियाणा आदि राज्यों में बुनियादी साक्षरता और संख्यात्मकता को सुनिश्चित करने के साथ ही डिजिटल विभाजन को पाटने की भी जरूरत है। यही वक्त है जब नीति-निर्माता, शिक्षक और अभिभावक शिक्षा के नए आयामों को अपनाते हुए बच्चों का भविष्य बनाएं।

Updated on:
29 Jan 2025 09:58 pm
Published on:
29 Jan 2025 09:58 pm