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दक्षिण एशियाई क्षेत्र में खतरा बनता पाकिस्तान

अब उसने मौखिक हमलों से आगे बढ़कर सशस्त्र और हवाई हमले शुरू कर दिए हैं, विशेष रूप से अफगानिस्तान में। यह उस नीति की हूबहू नकल है, जिसे वह भारत में अपनाता रहा हैै। जम्मू और कश्मीर पाकिस्तान द्वारा दिए गए जख्मों का सबसे बड़ा उदाहरण है।
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Jul 02, 2026
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अरुण जोशी, (दक्षिण एशियाई कूटनीतिक मामलों के जानकार)

दक्षिण एशियाई क्षेत्र की शांति और स्थिरता के लिए पाकिस्तान एक बड़े खतरे के रूप में फिर से उभर रहा है। इसके क्रूर रवैये का ताजा उदाहरण अफगानिस्तान के क्षेत्र पर हुआ हमला है, जिसमें कम से कम 30 नागरिक मारे गए हैं। इन हमलों ने सभी अंतरराष्ट्रीय कानूनों के उल्लंघन में इस्लामाबाद की धृष्टता को उजागर कर दिया है। पाकिस्तान ने इस बहाने का इस्तेमाल किया कि 27 जून को कराची में हुआ हमला अफगानिस्तान की जमीन से निर्देशित और नियोजित था? समस्या की जड़ यह है कि पाकिस्तान अपने लोगों को बुनियादी सुविधाएं देने में असमर्थ है। जनता बेचैन हो गई है और उसने पाकिस्तानी सेना, जो वहां की सत्ता (एस्टेब्लिशमेंट) में मुख्य भूमिका निभाती है, पर खुलकर उंगली उठानी शुरू कर दी है।

पड़ोसी देश में सेना ही सर्वेसर्वा है इसलिए सेना किसी भी विरोध या हिंसा की घटना को अपने लिए एक चुनौती या अपमान के रूप में लेती है। सेना को लगता है कि उसकी नीतियों के सामने चुनौतियां बढ़ रही हैं, इसलिए पाकिस्तान में होने वाली हर हिंसा का इस्तेमाल वह पड़ोसी देशों को इसमें घसीटने के लिए करती है। इससे यह नैरेटिव गढ़ा जाता है कि सेना की कोई गलती नहीं है, बल्कि यह सब पड़ोसी देशों की करतूत है। अब उसने मौखिक हमलों से आगे बढ़कर सशस्त्र और हवाई हमले शुरू कर दिए हैं, विशेष रूप से अफगानिस्तान में। यह उस नीति की हूबहू नकल है, जिसे वह भारत में अपनाता रहा हैै। जम्मू और कश्मीर पाकिस्तान द्वारा दिए गए जख्मों का सबसे बड़ा उदाहरण है। अफगानिस्तान की सीमा पर होने वाले ये हवाई हमले न केवल पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच तनाव बढ़ाएंगे, बल्कि इसका पूरे क्षेत्र में एक बड़ा 'डोमिनोज प्रभाव' (शृंखला प्रतिक्रिया) देखने को मिलेगा, जो मध्य पूर्व के संघर्ष के कारण पहले से ही कई संकटों का सामना कर रहा है। भारत के लिए, यह बहुत गहरी चिंता का विषय है। दिल्ली ने क्षेत्र में हुए इन घटनाक्रमों पर अपनी चिंताओं को व्यक्त किया है, जिस पर पाकिस्तान को ध्यान देना चाहिए।

यह 27 जून की रात की बात है, जब कराची के गुलिस्तान-ए-जौहर इलाके में संदिग्ध आतंकवादियों ने विस्फोटकों से लदे एक वाहन को रेंजर्स परिसर के मुख्य द्वार से टकरा दिया, जिससे एक बड़ा धमाका हुआ और उसके बाद लगभग डेढ़ घंटे तक गोलीबारी होती रही। इसमें चार रेंजर्स और छह आतंकवादी मारे गए थे। मीडिया रिपोट्र्स के मुताबिक, पाकिस्तान ने इस हमले के लिए अफगानों को दोषी ठहराया और तालिबान द्वारा संचालित अफगान सरकार को अपनी धरती पर आतंकवादी समूहों के खिलाफ कोई कार्रवाई न करने का जिम्मेदार माना। उसने सभी 'अवैध रूप से रह रहे अफगानों' को देश छोडऩे का फरमान जारी कर दिया और अगले 24 घंटों के भीतर, उसने अफगानिस्तान पर हमले शुरू कर दिए, जिसमें आम नागरिक मारे गए। भारतीय सरकार ने अफगानिस्तान के क्षेत्रों में पाकिस्तान के हवाई हमलों पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा, 'पाकिस्तान द्वारा आक्रामकता का यह खुला कृत्य अफगानिस्तान की संप्रभुता पर एक हमला और क्षेत्रीय शांति एवं स्थिरता के लिए सीधा खतरा है।' सोमवार, 29 जून 2026 को अपने बयान में, विदेश मंत्रालय ने अफगान नागरिकों के खिलाफ पाकिस्तान की हिंसा की गैर-जिम्मेदार हरकतों की निंदा करते हुए कहा कि अफगानिस्तान पर मौजूदा हमला पाकिस्तान के लापरवाह व्यवहार के निरंतर पैटर्न को दर्शाता है। यह अपनी सीमाओं के पार हिंसा के हताश कृत्यों के माध्यम से अपनी आंतरिक विफलताओं को दूसरों पर मढऩे का उसका एक व्यर्थ प्रयास है।

विदेश मंत्रालय के बयान में अफगानिस्तान की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के लिए भारतीय समर्थन को भी रेखांकित किया गया। यह इस बात को रेखांकित करता है कि भारत अपनी संप्रभुता की रक्षा करने में काबुल के साथ खड़ा रहेगा और पाकिस्तान को अपनी आंतरिक विफलताओं के नैरेटिव (आख्यान) को अपने पड़ोसियों की ओर मोडऩे नहीं देगा। पाकिस्तान हमेशा से ऐसा करता रहा है और अपनी ही हर मोर्चे पर विफल नीतियों के कारण पैदा हुई सभी समस्याओं के लिए भारत और अफगानिस्तान को दोषी ठहराता रहा है। बलूचिस्तान से लेकर खैबर पख्तूनख्वाह तक लोग सड़कों पर उतर रहे हैं। यहां तक कि पंजाब और सिंध प्रांतों के लोगों ने भी पाकिस्तानी प्रतिष्ठान के खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है। हर जगह कुशासन है और गरीब भुखमरी से मर रहे हैं, क्योंकि इन कठिन परिस्थितियों में उनके लिए कोई उम्मीद नहीं बची है, जो शासकों द्वारा आम जनता पर थोपी गई हैं। यह हमेशा से धोखे का सहारा लेता रहा है और आज भी ऐसा ही कर रहा है।

अब, पाकिस्तान के पास ऐसा करने का एक अतिरिक्त कारण भी है, क्योंकि वह अमरीका और पश्चिमी दुनिया द्वारा अमरीका और ईरान के बीच बातचीत में मध्यस्थता के उसके कथित प्रयासों की सराहना का आनंद ले रहा है। वह इस विश्वास में चीजों को हल्के में ले रहा है कि उसे अमरीका (ट्रंप) और यूरोप के साथ-साथ अपने सर्वकालिक मित्र चीन के बिना शर्त समर्थन के कारण, पड़ोसी देशों में नागरिकों को मारने जैसे भयानक कृत्यों से छूट मिल सकती है। इस झांसे को खत्म करने की जरूरत है। दक्षिण एशियाई क्षेत्र की सुरक्षा, शांति और स्थिरता को स्थायी रूप से अस्थिर करने का स्रोत बनने से पहले, भारत को पाकिस्तान को उसकी ही राह पर रोकने के लिए अपने राजनयिक प्रयासों को तेज करना चाहिए। इसे केवल भारत ही कर सकता है क्योंकि अन्य राष्ट्र छोटे हैं और अमरीका तथा चीन की जकड़ के बीच फंसे हुए हैं।

Published on:
02 Jul 2026 03:49 pm