शरीर ही ब्रह्माण्ड : ब्रह्म की यात्रा : सूक्ष्म से स्थूल तक
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राग सात्विक-राजसिक-तामसिक होता है। प्रेम गुणातीत होता है।
Gulab Kothari Article : माया विद्या भी, अविद्या भी : आज तो दाम्पत्य भाव एक कठिन दौर से गुजर रहा है। एक ओर पुरुष का पौरुष भाव नरम पड़ता जा रहा है। उसकी आक्रामक क्षमता परीक्षा के दौर से गुजर रही है। स्त्री का माया भाव भी करवट बदल रहा है। उसका भी स्त्रैण भाव उतार पर है। अब अग्नि उसके भीतर भी बढ़ रही है। माया भाव दोनों में तटस्थ है।