
Gulab Kothari Articles : स्पंदन : आत्मशुद्धि का साधन है प्रायश्चित्त : प्रायश्चित्त के लिए संकल्प भी चाहिए और पश्चात्ताप भी। यह रिक्तता को फिर से पूर्ण करने का कार्य है। प्रायश्चित्त-स्वरूप शरीर और मन से तपस्या की जाती है। इसके लिए मन को नया वातावरण देना पड़ता है, पुराने दाग-धब्बों की सफाई की जाती है। मन पर अंकुश लगाने का कार्य होता है, मन की निर्मलता और शुद्धता लक्षित की जाती है। इसी से व्यक्तित्व का फिर से निखार होता है।
Published on:
17 Apr 2026 05:08 pm
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