
शहर की सफाई को लेकर हम सबके पास शिकायत है। किसी को सड़क पर पड़ा कचरा दिखता है, किसी को नाली में भरा कूड़ा, किसी को खाली भूखंड में बना कूड़ाघर। लेकिन शिकायत के साथ एक सुविधा भी है… इसके के लिए जिम्मेदार हमेशा कोई दूसरा है। जनता कहती है, सफाईकर्मी नहीं आता। सफाईकर्मी कहता है, कचरा फिर सड़क पर डाल दिया जाता है। निकाय कहता है, घर-घर कचरा संग्रहण हो रहा है। और अफसर शायद यह मानकर चल रहे हैं कि शहर अपनी व्यवस्था खुद संभाल लेगा।
नतीजा सामने है। मारवाड़ हो या मेवाड़, हाड़ौती हो या शेखावाटी, ब्रज-मेवात या ढूंढाड़… हर शहर और कस्बे में गंदगी की कहानी बहुत नहीं बदलती। स्वच्छता रैंकिंग में भी राजस्थान बेहाल ही है। प्रदेश 2021 में 12वें, 2022 में 8वें और 2023 में फिसलकर 25वें स्थान पर पहुंच गया। 2024-25 में राज्य की अलग रैंकिंग नहीं हुई। सरकार भाजपा की हो या कांग्रेस की। सवाल दल का नहीं, नतीजे का है। सरकारें आती-जाती रहीं, लेकिन शहरों की सफाई स्थायी प्राथमिकता क्यों नहीं बन पाई?
वैसे, सिर्फ सरकार को दोष देकर भी हम बच नहीं सकते। सफाईकर्मी रोज नहीं आता, तो सवाल होना चाहिए। आता है और सफाई नहीं होती, तो निगरानी का सवाल होना चाहिए। जनता सड़क पर कचरा डालती है, तो नागरिक जिम्मेदारी का सवाल होना चाहिए। लेकिन इन सबसे ऊपर सवाल उन अफसरों से होना चाहिए जिनकी जिम्मेदारी ही यह सुनिश्चित करना है कि शहर व्यवस्था से चले, भगवान भरोसे नहीं।
दरअसल, शहरों के हाल देखकर लगता है कि अफसरों का शहर से उतना ही रिश्ता बचा है, जितना फाइल में दर्ज एक पते का। फाइल में पूरी 'सफाई' और जमीन पर पूरी 'ढिलाई'।
अब चुनाव सामने हैं। इसलिए इस बार केवल यह मत पूछिए कि उम्मीदवार सड़क कब बनवाएगा। उससे पूछिए, 'वार्ड साफ कैसे रखेगा?' पार्षद बनने आ रहे उम्मीदवार से सफाई का लिखित संकल्प लीजिए। हस्ताक्षर करवाइए। वीडियो बनाइए। पूछिए…घर-दुकान से रोज कचरा कैसे उठेगा, सफाईकर्मियों की निगरानी कौन करेगा, गीले-सूखे कचरे का क्या होगा और शिकायत का समाधान कितने समय में होगा? जो शहर को गंदा रखे, उसे वोट से साफ कर दीजिए। जो साफ सोच, साफ छवि और साफ संकल्प लेकर आए, उसे वोट की ताकत दीजिए। क्योंकि इस चुनाव में सिर्फ पार्षद नहीं चुनना है। यह भी तय करना है कि अगले पांच साल हमारे नगर, हमारे कस्बे स्वच्छता में राष्ट्रीय पहचान बनाएंगे या गंदगी से अपना रिश्ता यूं ही निभाते रहेंगे।
राजस्थान पत्रिका के ‘शहरी सरकार, आपकी राय’ सर्वे में 63.9 प्रतिशत लोगों ने सफाई और कचरा प्रबंधन को अपने क्षेत्र की सबसे बड़ी समस्या बताया।
प्रदेश के शहर रोज करीब 10 हजार टन कचरा उगल रहे हैं, जबकि निस्तारण की क्षमता केवल 2,998 टन प्रतिदिन है। 750 एकड़ से ज्यादा जमीन पर कचरे के पहाड़ खड़े हैं।