ओपिनियन

कुलिश जन्मशती पर्व: क्यों न नई संविधान परिषद बने? समग्र विचार हो

कुलिश जन्मशती पर्व पर पढ़िए, राजस्थान पत्रिका के संस्थापक संपादक कर्पूर चन्द्र कुलिश ने राजनीति में फैली कुरीतियों के बारे में क्या लिखा था...

3 min read
Mar 16, 2026
राजस्थान पत्रिका के संस्थापक संपादक कर्पूर चन्द्र कुलिश राजनीतिक दलों को लगातार उनकी जिम्मेदारियां याद दिलाते रहते थे। (फोटो सोर्स: पत्रिका)

देश में कई राजनीतिक कुरीतियां दशकों से चली आ रही हैं। ध्यान से देखा जाए तो इन सबके जड़ में एक ही प्रवृत्ति है। वह है संविधान, कानून-व्यवस्था का प्रयोग करते समय जनहित से ऊपर निजी हितों को ज्यादा वजन देना। हाल के वर्षों का एक उदाहरण गिनाया जाए तो मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) की नियुक्ति का मामला लिया जा सकता है।

2023 में सुप्रीम कोर्ट ने सीईसी या ईसी का चयन करने वाली समिति में सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) को भी रखे जाने की बात कही थी, लेकिन सरकार ने जो कानून बनाया उसमें यह प्रावधान नहीं रखा। सीजेआई की जगह कैबिनेट मंत्री को रखा गया। मतलब सरकार ने अपना पलड़ा भारी रखा।

ये भी पढ़ें

कुलिश जन्मशती पर्व: विकसित भारत चाहिए तो ये चार सूत्र आज भी हैं अहम

अपनी सुविधा के लिए बदल देते हैं संविधान

व्यवस्था में अपना पलड़ा भारी रखने की नेताओं (खास कर सत्ताधारी) की इस प्रवृत्ति पर राजस्थान पत्रिका के संस्थापक संपादक कर्पूर चन्द्र कुलिश ने लगातार कलम चलाई। 1990 के दशक की शुरुआत में नए संविधान संशोधन की चर्चाओं के बीच उन्होंने एक लेख में साफ लिखा, ‘संविधान में अब तक जितने भी संशोधन हुए हैं, प्रायः शासक वर्ग की सुविधा के अनुसार हुए हैं। इन संशोधनों में एक, दिल्ली के एक संसदीय चुनाव के रद्द हो जाने के बाद इसलिए हुआ है कि चुनाव खर्च में उम्मीदवार के अलावा उसके दल या  मित्रों के द्वारा किए गए खर्च को चुनाव खर्च की सीमा में न रखा जाए। एक संशोधन श्रीमती इंदिरा गांधी का चुनाव रद्द हो जाने के बाद यह भी हुआ कि प्रधानमंत्री के विरुद्ध कोई भी मुकदमा न चलाया जाए। शाह बानो वाला संशोधन तो अब राजनीतिक प्रचार का बड़ा मुद्दा ही बन गया है। ऐसी सूरत में यदि शासकों की सुविधा को देख कर सारा संविधान ही एक दिन बदल दिया जाए तो आश्चर्य नहीं होगा।’

मतलब, राहुल गांधी जो आज ‘संविधान खतरे में’ के नारे को अपनी चुनावी लड़ाई का हथियार बनाए हुए हैं, वो खतरा कांग्रेसी राज में भी बराबर था।

संविधान में संशोधन के बजाय समग्र विचार कर लें

कुलिश जी ने अपने उसी लेख में संविधान की कमजोरियां भी गिनाईं और कहा कि ‘यह देश के स्वरूप से विलग है।’ साथ ही, अनेक उदाहरणों के आधार पर लिखा, ‘कतिपय उदाहरणों से समझा जा सकता है कि हमने संविधान को भारत-राष्ट्र का मानचित्र बनाया ही नहीं और उसे राजनीति का एक सुविधाजनक दस्तावेज ही माना।’ उन्होंने संविधान में संशोधन के बजाय इस पर नए सिरे से, समग्र विचार की वकालत की और सवाल खड़ा किया, ‘क्यों न एक बार फिर संविधान परिषद का गठन किया जाए?’

ऊंच-नीच के खिलाफ राजनीति मौन

उत्तर प्रदेश में जब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने बहुजन समाज पार्टी (बसपा) को समर्थन देकर मुलायम सिंह यादव की सरकार गिराई थी तब इसकी समीक्षा करते हुए उन्होंने एक और राजनीतिक कुरीति के बहाने दलों पर वार किया था। उन्होंने लिखा था, ‘कैसी विडम्बना है कि राजनीति से एक पूरे संगठित समाज की ऊंच-नीच को मिटाने के लिए न तो कोई भौतिक प्रयास हुआ और न बौद्धिक अभियान। नारेबाजी ने संपूर्ण समाज व्यवस्था को एक भार बना डाला। समग्र दृष्टि को खंड-खंड कर दिया गया। कुप्रथाओं को सही माने में कभी आंका ही नहीं गया। इस दृष्टि से भारतीय जनता पार्टी भी दरिद्र रही है।’

सांप्रदायिक राजनीति और भाजपा

कुलिश जी ने सांप्रदायिक राजनीति के खिलाफ भी खुल कर अपनी राय रखी थी और इसमें भाजपा की जिम्मेदारी भी तय की थी। उन्होंने लिखा था, ‘सकारात्मक राजनीति की प्रतिष्ठा करने के लिए भाजपा को ही पहल करनी पड़ेगी। इस पहल का प्रथम चरण होगा हिन्दू को राष्ट्रीय पहचान बनाकर उसे सांप्रदायिक दायरे से बाहर निकालना। एक प्रबल अभियान छेड़ कर यह स्थापित करना होगा कि हिन्दू कोई धर्म-संप्रदाय नहीं है, बल्कि राष्ट्रीय पहचान है। देश के राजनीतिक जीवन में यह स्थापना करनी होगी कि यह देश हिंदुस्तान है, यहां का प्रत्येक नागरिक हिन्दू है और प्रत्येक पदार्थ हिन्दू है। हिन्दू को संप्रदाय और मत-पथ का रूप सांप्रदायिक गुरुओं ने दे रखा है, जो आम तौर पर दलितों से कतराते हैं। हिन्दू को धर्म के रूप में प्रस्तुत करने वालों से जवाब-तलब किया जाए कि वे हिन्दू की परिभाषा करें।’

(यह आलेख राजस्थान पत्रिका के संस्थापक संपादक कर्पूर चन्द्र कुलिश की जन्मशती पर प्रकाशित किए जाने वाले उनके विचारों की शृंखला के तहत पेश किया गया है।)

ये भी पढ़ें

कुलिश जन्मशती पर्व: इस एक विचार को अपना लें तो महिलाएं हो जाएंगी सुरक्षित

Also Read
View All

अगली खबर