ओपिनियन

वर्चस्व के लिए रणनीति

निगहबान  
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Feb 03, 2023
Sandeep_purohit
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संदीप पुरोहित

राज्य के विधानसभा चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आ रहे हैं वैसे ही राजनीतिक दल व नेताओं की हलचल भी बढ़ने लगी हैं। कांग्रेस एक बार फिर सत्ता पाने की कोशिश में है तो दूसरी तरफ भारतीय जनता पार्टी फिर से सत्ता पर काबिज होना चाहती है। तीसरे मोर्चे के रूप में रालोपा जड़ें और मजबूत करने के लिए भरसक प्रयास में हैं। हरियाणा की जेजेपी के नेताओं की आहट से भी चर्चा जोरों पर हैं।

मतदाताओं को जोड़ने और वोट बैंक साधने के लिए राजनीतिक दल सक्रिय हो गए हैं। भाजपा ने कुछ दिन पहले ही जनाक्रोश यात्रा निकाली थी और अब नव मतदाता अभियान से मतदाताओं को जोड़ने के प्रयास में हैं। पार्टी के पदाधिकारी व कार्यकर्ता अभियान को गति देने की पूरी तैयारियों में लगे हुए हैं। उधर, कांग्रेस भी भारत जोड़ो यात्रा के बाद अब हाथ से हाथ जोड़ो यात्रा निकालने की तैयारियों में हैं। इस यात्रा की तैयारियों को लेकर जिले के प्रभारी मंत्री सुभाष गर्ग ने पिछले दिनों जिलेभर का दौरा किया था। उन्होंने विधायक व पदाधिकारियों की बैठक लेकर यात्रा को सफल बनाने की नसीहत दी थी। यह अलग बात है कि बैठक में आधे विधायक भी शामिल नहीं हुए थे।

पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट भी अपने वजूद को बनाए रखने के लिए यात्रा पर निकले हुए हैं। पिछले दिनों सादड़ी में किसान सम्मेलन में सचिन पायलट शामिल हुए थे। उन्होंने खुद की सरकार को घेरते हुए कहा था कि भाजपा व वसुंधरा राजे की पिछली सरकार के कार्यकाल में हुए घोटालों को उजागर क्यों नहीं किए जा रहे हैं। देश में भू-माफिया, शराब और बैंक घोटाले हुए हैं, लेकिन इन पर कार्रवाई करने की बजाय देश की सरकारी एजेंसियां सोनिया व राहुल गांधी से पूछताछ कर परेशान कर रही हैं। राज्य सरकार भी भाजपा सरकार के घोटाले के आरोपियों को बख्शेगी तो जनता माफ नहीं करेगी। चार साल बाद भी घोटाला करने वालों पर कार्रवाई नहीं की जा रही है।

चुनावी वर्चस्व के रणनीति के तहत हरियाणा की जेजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अजयसिंह चौटाला ने गत दिनों किसान केसरी बलदेराम मिर्धा जयंती समारोह में शिरकत कर चर्चाओं का माहौल गर्मा दिया। उन्होंने किसान जाट छात्रावास में मुख्य गेट के लिए 51 लाख रुपए की घोषणा की। वे पहले भी खरनाल में लोक देवता तेजाजी मंदिर निर्माण में भी बड़ी राशि की घोषणा कर चुके हैं। उनकी हलचलों को चुनावी माहौल से जोड़कर देखा जा रहा है। कुल मिलाकर यह माना जा सकता है कि कांग्रेस व भाजपा ही नहीं बल्कि रालोपा व अन्य पार्टियां भी वर्चस्व की रणनीति बनाने के लिए मैदान में उतर चुकी हैं।

Published on:
03 Feb 2023 05:00 pm