आनुवंशिक रोग कभी माता या पिता से संतान में स्थानांतरित हो सकते हैं और कभी नए आनुवंशिक परिवर्तनों से। आनुवंशिक बीमारियां जटिल और गंभीर होती हैं। चिकित्सा विज्ञान ने इसके निदान की उम्मीद जगाई है।
ऋतुपर्ण दवे, स्वतंत्र लेखक एवं स्तंभकार
आनुवंशिक बीमारी या विकार सुनकर ही एक अजीब सी सिरहन हो उठती है। डर समा जाता है क्योंकि धारणा है कि इनका कोई निदान नहीं है। आनुवंशिक बीमारियां ज्यादातर वो होती हैं जो माता-पिता या बहुत नजदीकी रिश्तेदार के जीन से आती हैं। इन्हें असाध्य माना जाता रहा, लेकिन नए-नए शोधों और प्रयोगों ने नया रास्ता खोल दिया है। कई रोग दिनचर्या में सुधार तथा नियमित चिकित्सा से ठीक हो सकते हैं। हालांकि कई रोग अभी भी असाध्य हैं जिन पर तेजी से शोध हो रहे हैं। संभव है कि भविष्य में ये भी असाध्य नहीं रह जाएंगे।
दरअसल, आनुवंशिक बीमारियां बच्चों में दोषपूर्ण जीन से पहुंचती है। इसमें सभी जीवित प्राणियों की आनुवंशिक (जेनेटिक) जानकारी होती है। यही निर्धारित करता है कि शरीर कैसे विकसित होगा, बढ़ेगा और काम करेगा। यह शरीर का वो ब्लूप्रिंट या गाइड है जो बालों-आंखों के रंग जैसी विशेषताएं भी निर्धारित करता है। यही आनुवंशिकता की मूल इकाई है, जो गुणसूत्रों यानी क्रोमोसोम्स में होती है। पीढ़ी-दर-पीढ़ी गुणों को स्थानांतरित करती है। इनके निर्देशों में परिवर्तन से ही शरीर के कार्य बाधित हो रोग उत्पन्न हो सकते हैं। आनुवंशिक रोग कभी माता या पिता से संतान में स्थानांतरित हो सकते हैं और कभी नए आनुवंशिक परिवर्तनों से। आनुवंशिक बीमारियां जटिल और गंभीर होती हैं। चिकित्सा विज्ञान ने इसके निदान की उम्मीद जगाई है। भविष्य में ये ठीक हो सकेंगी। क्रिस्पर यानी क्लस्टर्ड रेगुलरली इंटरस्पेस्ड शॉर्ट पैलिंड्रोमिक रिपीट्स (सीआरआइएसपीआर) प्रणाली का उपयोग करके जीनोम को टारगेट कर संशोधित करते हैं। यह वो जीन-संपादन तकनीक है, जिसमें सीएएस-9 प्रोटीन जो कि एक महत्वपूर्ण एंजाइम होता है, का उपयोग करते हैं। एक बेहद महत्वपूर्ण आनुवंशिकी इंजीनियरिंग में यह ताकतवर उपकरण सरीखे काम करती है।
जेनेटिक इंजीनियरिंग में अपार संभावनाएं हैं। भविष्य में यह तकनीक बीमारियों के इलाज के तरीके और मानव जीनोम के बारे में चिकित्सा जगत के नजरिए को भी बदल सकती है। इसकी शुरुआत बैक्टीरिया और आर्किया खोज से हुई लेकिन शोध और प्रयोगों के नतीजों ने जीन संपादन या सुधार (दूषित जीन) के लिए एक बेहद शक्तिशाली उपकरण बना दिया। बस फिर क्या था, इस खोज ने पूरे खेल को बदल दिया और असाध्य माने जाने वाली आनुवंशिक बीमारी के इलाज में आनुवंशिक इंजीनियरिंग की प्रगति और लक्षित जीन थेरेपी ने बड़ी सफलता के लिए द्वार खोल दिए। सीआरआइएसपीआर प्रणाली का उपयोग मलेरिया न फैलाने वाले मच्छर बनाने, जलवायु परिवर्तन के लिए फसलों को बेहतर बनाने और मनुष्यों में बीमारियों का इलाज करने में बड़ी उपलब्धि होगी। लेकिन इसके दुरुपयोग और नैतिक उपयोग को लेकर भी सोचना होगा क्योंकि हर सिक्के के दो पहलू होते हैं।