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सर्कुलर इकोनॉमी को प्रभावी बनाने में ब्लॉकचेन महत्त्वपूर्ण

भारत में तेजी से बढ़ते औद्योगिकीकरण, शहरीकरण और बढ़ती जनसंख्या के चलते संसाधनों पर अधिक दबाव महसूस किया जा रहा है। नीति आयोग एवं द एनर्जी एंड रिसोर्सेज इंस्टीट्यूट के वर्ष 2026 के प्रतिवेदन के अनुसार, भारत में वर्ष 2024 में विभिन्न उत्पादों एवं गतिविधियों के द्वारा लगभग 6.19 मिलियन मीट्रिक टन ई-कचरा उत्पन्न हुआ था, जिसके वर्ष 2030 तक बढकऱ लगभग 14 मिलियन मीट्रिक टन पहुंचने की संभावना है।
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Jul 17, 2026
DigitalInnovation
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मिलिंद कुमार शर्मा, प्रोफेसर
प्रदीप कुमार शर्मा, असिस्टेंट प्रोफेसर
(एम.बी.एम. विश्वविद्यालय, जोधपुर
)

यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि जिसे आज हम कबाड़ अथवा कचरा समझकर त्याग देते हैं, वही वास्तव में भविष्य की अर्थव्यवस्था का एक अमूल्य संसाधन है। लंबे समय तक हमारी अर्थव्यवस्था ‘लीनियर मॉडल’ पर आधारित रही है, जिसमें प्राकृतिक संसाधनों का दोहन, उत्पादों का अनवरत निर्माण, उनका निरंतर उपयोग और अंतत: उनका निस्तारण सम्मिलत था। नि:संदेह इस मॉडल ने जहां एक ओर औद्योगिक विकास को तो गति प्रदान की, परंतु दूसरी ओर इसके परिणामस्वरूप प्राकृतिक संसाधनों का निरंतर क्षय, बढ़ता प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन जैसी गंभीर वैश्विक चुनौतियां भी देखने को मिली है। परंतु अब समय एक नई आर्थिक सोच की स्वीकार्यता का है, जहां किसी उत्पाद का जीवनकाल केवल उसके उपयोग तक ही सीमित नहीं रहता, अपितु उसकी मरम्मत, पुन: उपयोग, पुनर्निर्माण और पुनर्चक्रण के माध्यम से उसे पुन: उत्पादन प्रक्रिया का हिस्सा बनाया जाता है। इसी सतत एवं संसाधन-कुशल आर्थिक मॉडल को ‘सर्कुलर इकोनॉमी’ भी कहा जाता है।

सर्कुलर इकोनॉमी के लिए प्रभावी ब्लॉकचेन और एआइ
सर्कुलर इकोनॉमी को प्रभावी, पारदर्शी और विश्वसनीय बनाने में ब्लॉकचेन तकनीक एक सशक्त डिजिटल आधार के रूप में उभर रही है। प्राय: ब्लॉकचेन तकनीक को मात्र क्रिप्टोकरेंसी से जोडकऱ देखा जाता है, किन्तु इसकी क्षमताएं इससे कहीं अधिक हैं। ब्लॉकचेन तकनीक सूचना संग्रहण का वह बहीखाता है जिसमें एक बार जानकारी इंद्राज होने के पश्चात उसमें परिवर्तन करना कठिन है। यह तकनीक उत्पादों और कच्चे माल की पूरी यात्रा का सुरक्षित, पारदर्शी और अपरिवर्तनीय डिजिटल विवरण बनाती है। इसमें एक बार डेटा दर्ज होने के पश्चात, यह स्थायी और भरोसेमंद रहता है, जिससे संसाधनों की ट्रेसीबिलिटी, आपूर्ति शृंखला की स्पष्टता और पुनर्चक्रण प्रक्रिया की विश्वसनीयता एवं पारदर्शिता सुनिश्चित होती है। अंतत: यही विशेषता इसे सर्कुलर इकोनॉमी के लिए उपयुक्त बनाती है, क्योंकि इसमें उत्पाद की कच्चे माल से लेकर पुनर्चक्रण तक की यात्रा का सटीक विवरण इंद्राज रहता है। यहां यह रेखांकित करना उचित होगा कि दूरसंचार विभाग, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, नीति आयोग और उद्योग जगत तक ने ब्लॉकचेन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डिजिटल प्लेटफॉर्म जैसी तकनीकों के प्रयोग को सर्कुलर इकोनॉमी के लिए अत्यंत प्रभावी बताया है।

शहरीकरण और बढ़ती जनसंख्या का दबाव
भारत में तेजी से बढ़ते औद्योगिकीकरण, शहरीकरण और बढ़ती जनसंख्या के चलते संसाधनों पर अधिक दबाव महसूस किया जा रहा है। नीति आयोग एवं द एनर्जी एंड रिसोर्सेज इंस्टीट्यूट के वर्ष 2026 के प्रतिवेदन के अनुसार, भारत में वर्ष 2024 में विभिन्न उत्पादों एवं गतिविधियों के द्वारा लगभग 6.19 मिलियन मीट्रिक टन ई-कचरा उत्पन्न हुआ था, जिसके वर्ष 2030 तक बढकऱ लगभग 14 मिलियन मीट्रिक टन पहुंचने की संभावना है। साथ ही, इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती मांग के कारण लिथियम-आयन बैटरियों की बाजार मांग में तेजी से वृद्धि देखी गई है जो वर्ष 2025 में लगभग 29 गीगावाट-घंटे थी, उसके वर्ष 2035 तक 248 गीगावाट-घंटे तक पहुंच की संभावना है। दूसरी ओर इसके अतिरिक्त नीति आयोग के एक प्रतिवेदन में चेतावनी दी गई है कि भारत में अनुपयोगी वाहनों की संख्या वर्ष 2025 में लगभग 2.3 करोड़ थी, जो तेजी से बढकऱ वर्ष 2030 तक 5 करोड़ से अधिक हो जाने की संभावना है। भविष्य में इन अनुपयोगी वाहनों का सही प्रकार से उचित प्रबंधन एवं पुनर्चक्रण किया जाए, तो यह केवल पर्यावरण संरक्षण ही नहीं, अपितु अरबों रुपए की नई आर्थिक संभावनाएं भी उत्पन्न कर सकता हैं।
नि:संदेह ब्लॉकचेन तकनीक एक विश्वसनीय प्रयोग की तरह उभर रहा है। उदाहरण स्वरूप, यदि किसी कंपनी ने एक मोबाइल फोन विकसित किया है तो उसके विनिर्माण में मोबाइल में प्रयुक्त धातुएं तांबा, एल्यूमिनियम, कोबाल्ट या लिथियम कहां से आया, वह नया था या पुनर्चक्रित, यह जानकारी ब्लॉकचेन पर सुरक्षित इंद्राज की जा सकती है। जब वही मोबाइल कई वर्षों के उपयोग पश्चात ई-कचरे में परिवर्तित होगा, तब उसके प्रत्येक भाग को पुन: उपयोग या पुनर्चक्रण के लिए सुलभता से पहचाना जा सकेगा। नि:संदेह इससे उद्योगों को नई खदानों पर कम निर्भर रहना पड़ेगा, ऊर्जा की बचत होगी और कार्बन उत्सर्जन भी घटेगा।

अपनाई जाए ब्लॉकचेन आधारित डिजिटल प्रणाली
यह रोचक है कि आज विश्वभर के बड़े बाजार केवल उत्पाद ही नहीं खरीदते, अपितु यह भी जानना चाहते हैं कि उत्पाद पर्यावर्णानुकूल विधि से बनाया गया है या नहीं। यदि किसी उत्पादककर्ता के पास ब्लॉकचेन आधारित विवरण होगा तो वह आसानी से प्रमाणित कर सकेगा कि उसने उत्पादन में पुनर्चक्रित सामग्री का उपयोग किया है और पर्यावरणीय मानकों का पालन भी सुनिश्चित किया है।
यह तकनीक भारत को सामाजिक स्तर पर सशक्त बनाने में भी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। देश के लाखों परिवार कबाड़ संग्रह, प्लास्टिक छंटाई तथा छोटे पुनर्चक्रण उद्योगों से अपनी आजीविकार्जन करते हैं। चूंकि इन क्षेत्रों में कार्यरत अधिकांश श्रमिक असंगठित क्षेत्र से जुड़े हुए हैं, इसलिए उनको उचित पारिश्रमिक, सामाजिक सुरक्षा और पारदर्शी भुगतान की सुविधाएं नहीं मिल पातीं। यदि ब्लॉकचेन आधारित डिजिटल प्रणाली अपनाई जाए तो प्रत्येक कचरा संग्रहकर्ता और पुनर्चक्रण उद्योगों के उत्पाद निर्माण का विवरण सुरक्षित रहेगा, उसके द्वारा जमा किए गए कचरे का सही मूल्य निर्धारित होगा और भुगतान सीधे उसके बैंक खाते में किया जा सकेगा। इससे बिचौलियों की भूमिका कम होगी और मेहनतकश लोगों को उनके श्रम का उचित लाभ मिलेगा।

सर्कुलर इकोनॉमी रोडमैप किया तैयार
सरकार भी इस दिशा में अनवरत प्रयास कर रही है। नीति आयोग ने ई-कचरे और लिथियम-आयन बैटरियों के लिए सर्कुलर इकोनॉमी रोडमैप तैयार किया है, जिसमें डिजिटल ट्रैकिंग, पुनर्चक्रण क्षमता बढ़ाने और संसाधन दक्षता पर विशेष जोर दिया गया है। भारत सरकार द्वारा लागू एक्सटेंडेड प्रोड्यूसर रिस्पॉन्सिबिलिटी व्यवस्था के तहत कंपनियों को अपने उत्पादों के उपयोग के बाद उत्पन्न कचरे के संग्रह और पुनर्चक्रण का दायित्व दिया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस पूरी व्यवस्था को ब्लॉकचेन प्लेटफॉर्म से जोड़ा जाए तो नकली प्रमाणपत्रों पर रोक लगेगी और पूरी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बन जाएगी। परंतु भारत में तीव्र डिजिटल परिवर्तन के बाद भी छोटे एवं मध्यम उद्योगों के लिए इस तकनीक की उच्च लागत, प्रशिक्षित कर्मचारियों की कमी तथा विभागों के बीच डेटा मानकीकरण व उचित समन्वय जैसी चुनौतियां विद्यमान हैं। नि:संदेह नीति निर्धारकों को निजी सूचना प्रौद्योगिकी कंपनियों के साथ सामंजस्य साधकर इनके समाधान खोजने होंगे।

Updated on:
17 Jul 2026 06:59 pm
Published on:
17 Jul 2026 06:58 pm