
sharir hi brahmand
Gulab Kothari Article शरीर ही ब्रह्माण्ड: पंचपर्वा विश्व में पृथ्वी-चन्द्रमा-सूर्य ये तीन पर्व दिखाई पड़ते हैं। चौथा तत्व अव्यक्त है। इन चारों से ही विश्व का निर्माण होता है- तीन भाव व्यक्त, एक भाव अव्यक्त। चारों तत्वों से ही मानव का स्वरूप निर्माण हुआ है। तीन व्यक्त पर्वों से क्रमश: शरीर-मन-बुद्धि का भाग प्राप्त होता है। अव्यक्त के अंश से आत्मा आता है। यही प्राणात्मक आत्मा ‘मनु’ कहलाता है। चारों की समन्वित अवस्था का नाम ‘मानव’ है।
पत्रिका समूह के प्रधान संपादक गुलाब कोठारी की बहुचर्चित आलेखमाला है - शरीर ही ब्रह्माण्ड। इसमें विभिन्न बिंदुओं/विषयों की आध्यात्मिक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से व्याख्या प्रस्तुत की जाती है। गुलाब कोठारी को वैदिक अध्ययन में उनके योगदान के लिए जाना जाता है। उन्हें 2002 में नीदरलैन्ड के इन्टर्कल्चर विश्वविद्यालय ने फिलोसोफी में डी.लिट की उपाधि से सम्मानित किया था। उन्हें 2011 में उनकी पुस्तक मैं ही राधा, मैं ही कृष्ण के लिए मूर्ति देवी पुरस्कार और वर्ष 2009 में राष्ट्रीय शरद जोशी सम्मान से सम्मानित किया गया था। 'शरीर ही ब्रह्माण्ड' शृंखला में प्रकाशित विशेष लेख पढ़ने के लिए क्लिक करें नीचे दिए लिंक्स पर-
Updated on:
17 Jul 2026 07:05 pm
Published on:
17 Jul 2026 07:05 pm
