ओजोन परत के कारण होने वाले अन्य कई दुष्प्रभावों से बचाने में मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल निश्चित रूप से बहुत बड़ा योगदान कर रहा है, अन्यथा यह नुकसान बहुत अधिक मात्रा में हो चुका होता। वैज्ञानिकों के अनुसार अंतरराष्ट्रीय समझौते के परिणाम स्वरूप अंटार्कटिका में ओजोन छिद्र धीरे-धीरे ठीक हो रहा है।
सी.पी. पोखरना
प्रोफेसर, रसायन शास्त्र एवं सदस्य, ग्रीन एजुकेटर्स नेटवर्क, सेंटर फॉर साइंस एंड इनवायरनमेंट, नई दिल्ली
पृथ्वी की सतह से लगभग पंद्रह किलोमीटर ऊपर की ओर समताप मंडल में ओजोन परत होती है। इसमें ओजोन गैस होती है, यह पृथ्वी पर रहने वाले सभी जीवों को सूर्य से आने वाली हानिकारक पराबैंगनी विकिरणों से बचाने के लिए अदृश्य ढाल के रूप में कार्य करती है। इन विकिरणों के साथ लंबे समय तक संपर्क में रहने से मानव स्वास्थ्य एवं पारिस्थितिकी तंत्र को नुकसान होता है। समताप मंडल में ओजोन का निर्माण और विनाश एक रासायनिक प्रक्रिया द्वारा निरंतर होता रहता है। समताप मंडल में हाइड्रोजन और नाइट्रोजन युक्त अन्य गैसें भी होती हैं जो रासायनिक चक्र में भाग लेती है और ओजोन को नष्ट करके इसे वापस ऑक्सीजन में परिवर्तित कर देती है। इसलिए ये अभिक्रियाएं ओजोन की मात्रा को कम करती हैं। ओजोन के निर्माण और नष्ट होने की प्राकृतिक प्रक्रिया से समताप मंडल में ओजोन की सांद्रता नियत बनी रहती है। विडंबना यह है कि मनुष्य ने इस प्राकृतिक प्रक्रिया को भी प्रभावित किया है।
ओजोन परत को नष्ट करने वाले पदार्थों का उत्पादन धीरे-धीरे कम करने के लिए 16 सितंबर 1987 को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सहमति बनी जिसे मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल के नाम से जाना जाता है। इसे 1 जनवरी 1989 को लागू किया गया। आज इसे पर्यावरण के क्षेत्र में सर्वाधिक सफल समझौता माना जाता है। इसी कारण 16 सितंबर विश्व ओजोन दिवस के रूप में जाना जाता है। पृथ्वी पर सभी जीवों के जीवन की रक्षा के लिए ओजोन परत को क्षय से बचाने के लिए इस समझौते ने दुनिया को एकजुट किया। ओजोन परत को नुकसान पहुंचाने वाले पदार्थों को धीरे-धीरे समाप्त करना बहुत महत्त्वपूर्ण साबित हुआ है । मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल के लागू होने के बाद से इसमें नौ संशोधन हुए हैं। 2016 के किगाली संशोधन के जरिए ओजोन परत के संरक्षण के काम को और तेज किया गया है। ओजोन परत का क्षरण रोकनेे वाले पदार्थों का स्थान ऐसी गैसों द्वारा लिया गया है जो जलवायु परिवर्तन में योगदान देने में कार्बन डाइऑक्साइड की तुलना में कई गुना शक्तिशाली हैं।
हाइड्रोक्लोरोफ्लोरोकार्बन (एचसीएफसी) के निर्माण और खपत को चरणबद्ध तरीके से कम करने के लिए विश्व के देश प्रतिबद्ध रहे हैं। ओजोन परत के कारण होने वाले अन्य कई दुष्प्रभावों से बचाने में मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल निश्चित रूप से बहुत बड़ा योगदान कर रहा है, अन्यथा यह नुकसान बहुत अधिक मात्रा में हो चुका होता। वैज्ञानिकों के अनुसार अंतरराष्ट्रीय समझौते के परिणाम स्वरूप अंटार्कटिका में ओजोन छिद्र धीरे-धीरे ठीक हो रहा है। जलवायु अनुमानों से संकेत मिलता है कि 2040 तक पूरी दुनिया में ओजोन परत 1980 के स्तर तक वापस आ जाएगी। मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल के व्यापक रूप से अपनाए जाने और कार्यान्वयन के कारण ही इसे अंतरराष्ट्रीय सहयोग के सफल उदाहरण के रूप में सराहा जाता है। वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं द्वारा पृथ्वी के अनुकूल जो उत्पाद बनाए जा रहे हैं, उन्हें ओजोन फे्रंडली या एचसीएफसी मुक्त लेवल के रूप में मार्केट में उपलब्ध करवाया जा रहा है। रेफ्रिजरेटर, एयर कंडीशनर और अन्य शीतलन उपकरणों का जिम्मेदारी से उपयोग करके हम ओजोन परत और जलवायु की सुरक्षा में अपना योगदान दे सकते हैं।