पाठकों ने इस विषय पर विविध प्रतिक्रियाएं व्यक्त की हैं। प्रस्तुत हैं उनकी कुछ चुनिंदा प्रतिक्रियाएं...
किशोरों को यदि काम करने के तरीकों में कुछ विकल्प दिए जाएं, तो वे स्वयं को अधिक जिम्मेदार और प्रेरित महसूस करते हैं। केवल परिणामों पर ध्यान देने के बजाय उनके प्रयास और मेहनत की सच्ची सराहना करना जरूरी है। इससे उनका आत्मविश्वास मजबूत होता है और वे भीतर से प्रेरित रहते हैं। परिवार और शिक्षक ऐसा सुरक्षित वातावरण बनाएं, जहां किशोर बिना डर अपनी बात कह सकें। उनकी भावनाओं को समझना और उन्हें अपने निर्णय लेने का अवसर देना आवश्यक है। अपने फैसलों के परिणामों से सीखकर उनमें जिम्मेदारी की भावना स्वाभाविक रूप से विकसित होती है। - प्रवेश भूतड़ा, सूरत
किशोरों को संतुलित और व्यवस्थित जीवन के लिए पोष्टिक आहार अपनाने की आदत डालनी चाहिए। रोजाना निश्चित समय पर व्यायाम और पर्याप्त विश्राम भी जरूरी है। जंक फूड और बाहरी हानिकारक खाद्य पदार्थों से दूरी बनाए रखना उनके स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है। साथ ही, सकारात्मक व्यवहार और अच्छी संगति जीवनशैली को सही दिशा देती है। वर्तमान समय में नशीले पदार्थों से दूर रहना और असामाजिक गतिविधियों से बचना बेहद आवश्यक है। स्वस्थ शरीर और साफ सोच ही बेहतर भविष्य की मजबूत नींव रखते हैं। - जितेन्द्र मोकलसर, बालोतरा
किशोरों को अनुशासित जीवन की ओर प्रेरित करने में परिवार और शिक्षकों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। यदि बड़े स्वयं अनुशासन और समय-पालन का उदाहरण प्रस्तुत करें, तो किशोर सहज ही उसे अपनाते हैं। छोटे-छोटे लक्ष्य तय कराना, समय-सारणी बनवाना और डिजिटल अनुशासन सिखाना उपयोगी कदम हैं। उन्हें जिम्मेदारियां देकर आत्मनिर्भर बनाया जा सकता है। खेल, योग और उद्देश्यपूर्ण मार्गदर्शन से उनमें आत्मनियंत्रण और धैर्य विकसित होता है। यह आदतें आगे चलकर उनके जीवन में दीर्घकालिक सफलता का आधार बनती हैं। - अभिषेक सांखला, बीकानेर
किशोर वही सीखते हैं जो वे घर में देखते हैं। इसलिए परिवार के प्रत्येक सदस्य की जिम्मेदारी है कि वे स्वयं अनुशासित जीवन जिएं। समय पर कार्य पूरा करना, नियमित दिनचर्या का पालन करना और जिम्मेदारी निभाना बच्चों के लिए जीवंत उदाहरण बनता है। केवल उपदेश देने से अधिक प्रभाव व्यवहार का होता है। जब घर का माहौल व्यवस्थित और सकारात्मक होता है, तो किशोर भी उसी दिशा में आगे बढ़ते हैं। इस प्रकार, संगठित जीवनशैली की शुरुआत परिवार से ही होती है। - वसंत बापट, भोपाल
किशोरों के लिए सकारात्मक और सहयोगपूर्ण वातावरण बेहद जरूरी है। घर और विद्यालय में स्पष्ट व संतुलित नियम बनाए जाएं, ताकि वे सही-गलत का अंतर समझ सकें। महत्वपूर्ण निर्णय लेते समय उन्हें उचित सुझाव और मार्गदर्शन दिया जाना चाहिए। स्वास्थ्य संबंधी जानकारी और जागरूकता भी जीवनशैली का अहम हिस्सा है। बड़ों का सम्मान, संस्कारयुक्त शिक्षा और नैतिक मूल्यों पर जोर देना समय की आवश्यकता है। इन मूल्यों से ही किशोर जिम्मेदार और संवेदनशील नागरिक बन सकते हैं। - बिहारी लाल बालान, सीकर
आज के समय में मोबाइल फोन किशोरों की दिनचर्या पर गहरा असर डाल रहा है। गैर-शैक्षणिक स्क्रीन टाइम को सीमित रखना जरूरी है, ताकि पढ़ाई और अन्य गतिविधियों के लिए समय मिल सके। विशेषज्ञों के अनुसार, इसे दो घंटे के आसपास रखना बेहतर है। पर्याप्त नींद, नियमित व्यायाम और भरपूर पानी पीना भी स्वस्थ जीवनशैली के आवश्यक तत्व हैं। साथ ही, अपने शौक को जीवित रखना मानसिक संतुलन बनाए रखने में मदद करता है। संतुलन ही व्यवस्थित जीवन का मूल मंत्र है। - हरेंद्र कुमार त्यागी, कोटपुतली
आज का युवा अक्सर मोबाइल की दुनिया में इतना व्यस्त रहता है कि आसपास के वास्तविक जीवन से उसका जुड़ाव कम हो जाता है। जरूरत है कि वह कुछ समय डिजिटल माध्यमों से बाहर निकलकर प्रकृति, परिवार और मित्रों के साथ समय बिताए। जब किशोर वास्तविक अनुभवों से जुड़ते हैं, तो उनका दृष्टिकोण व्यापक होता है। वे समझ पाते हैं कि जीवन केवल स्क्रीन तक सीमित नहीं है। यह जागरूकता ही उन्हें संतुलित और सार्थक जीवनशैली की ओर ले जाती है। - प्रियव्रत चारण, जोधपुर
किशोरों को व्यवस्थित जीवनशैली के लिए स्कूल और कॉलेज स्तर पर प्रेरित किया जाना चाहिए। स्वास्थ्य के मूलभूत सिद्धांतों और संतुलित दिनचर्या की जानकारी उन्हें प्रारंभिक अवस्था में ही दी जानी चाहिए। अभिभावकों की भी जिम्मेदारी है कि वे घर पर सही आदतों को बढ़ावा दें। आज के दौर में किसी भी प्रकार के नशे से दूर रहने के लिए विशेष जागरूकता अभियान जरूरी हैं। संयुक्त प्रयासों से ही युवाओं को स्वस्थ, अनुशासित और जागरूक नागरिक बनाया जा सकता है। - ललित महालकरी, इंदौर