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PODCAST : आत्मभाव ही मानव की संस्कृति

भारतीय जीवन पद्धति आत्मा-बुद्धि-मन: शरीर-नामक चार पर्वों से समन्वित है।

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Gulab Kothari Article : स्पंदन : आत्मभाव ही मानव की संस्कृति : मनुष्य के आध्यात्मिक और आधिभौतिक स्वरूप से सम्बन्ध रखने वाले अन्त: और बाह्य आचार को ही संस्कृति और सभ्यता माना जाता है। इस संस्कृति और सभ्यता को समझने के लिए मानव का स्वरूप जानना आवश्यक है। शरीर-बुद्धि-मन-आत्मा इन चारों की समष्टि ही मानव है।