बिरेन्द्र पाण्डेय, भाषाविद् एवं स्तम्भकार
हाल ही केंद्रीय बजट 2025-26 में भारतीय भाषाओं के संवर्धन और शिक्षा के क्षेत्र में महत्त्वपूर्ण वित्तीय प्रावधान किए गए हैं। भारतीय भाषाओं के संवर्धन के लिए 347.03 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं, जो पिछले वर्ष की तुलना में 11.91 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाता है। इन वित्तीय प्रावधानों का उद्देश्य भारतीय भाषाओं में शिक्षा, विज्ञान, तकनीकी और चिकित्सा के विकास को बढ़ावा देना है, जिससे मातृभाषा में ज्ञान के प्रसार को प्रोत्साहन मिले और देश की समग्र प्रगति में योगदान हो। भारत अपनी भाषाई विविधता के बावजूद सांस्कृतिक रूप से एकीकृत राष्ट्र है। पूरे देश में भाषाई विविधता के बावजूद राष्ट्रीय, सामाजिक जीवन में मूल्यों की समानता रही है, जो एकात्मता स्थापित करती हैं। विज्ञान भी यह सिद्ध कर चुका है कि व्यक्ति की सोचने और समझने की क्षमता उसकी मातृभाषा में अधिक विकसित होती है। सपने देखना, विचार करना और निर्णय लेने जैसी बौद्धिक प्रक्रियाएं मातृभाषा में ही संपन्न होती हैं। यदि शिक्षा मातृभाषा में दी जाए, तो बच्चों की रचनात्मकता और नवाचार क्षमता अधिक विकसित होती है। मातृभाषा में शिक्षा से विद्यार्थियों में जटिल विषयों को समझने की क्षमता बढ़ती है, जिससे उनका आत्मविश्वास और सृजनात्मकता विकसित होती है। उदाहरण के लिए तकनीकी शिक्षा, चिकित्सा, इंजीनियरिंग और अन्य विज्ञान आधारित पाठ्यक्रम यदि मातृभाषा में पढ़ाए जाएं, तो विद्यार्थी अधिक सहजता से ज्ञान प्राप्त कर सकते हैं।
मातृभाषा में कौशल विकास और तकनीकी शिक्षा से युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार के बेहतर अवसर मिलेंगे। भारत के साथ स्वतंत्र हुए कई देशों ने अपनी मातृभाषा को ज्ञान, विज्ञान और तकनीकी विकास का माध्यम बनाया और आज वे विश्व के विकसित देशों में गिने जाते हैं। जर्मनी, जापान, फ्रांस और इजराइल जैसे देशों ने मातृभाषा को प्राथमिकता दी और विज्ञान, तकनीकी, चिकित्सा और अनुसंधान के क्षेत्र में अपार सफलता हासिल की। इसके विपरीत, भारत में अंग्रेजी को शिक्षा और उच्च अध्ययन का प्रमुख माध्यम बनाया गया, जिससे ज्ञान-विज्ञान के प्रसार में एक दूरी बनी रही। परंतु,अब स्थितियां बदल रही हैं। केंद्र सरकार ने हाल ही बजट में भारतीय भाषाओं और ज्ञान के संवर्धन के लिए जो बजट आवंटन किया गया है, वह भाषा विकास के क्षेत्र में एक महत्त्वपूर्ण कदम साबित होगा।
सरकार ने स्कूली और उच्चतर शिक्षा के लिए भारतीय भाषाओं में डिजिटल पुस्तकों की उपलब्धता बढ़ाने के लिए 'भारतीय भाषा पुस्तक योजना' की शुरुआत की है। इस पहल का उद्देश्य विद्यार्थियों को उनकी मातृभाषा में अध्ययन सामग्री प्रदान करना है, जिससे उनकी समझ और सीखने की क्षमता में वृद्धि हो। साथ ही भारतनेट परियोजना के तहत, अगले तीन वर्षों में सभी सरकारी माध्यमिक विद्यालयों को ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी प्रदान की जाएगी। इससे विद्यार्थियों को ऑनलाइन शिक्षा सामग्री तक पहुंचने में सुविधा होगी, विशेषकर भारतीय भाषाओं में उपलब्ध संसाधनों का उपयोग करने में। इन पहलों के माध्यम से सरकार भारतीय भाषाओं के विकास और संवर्धन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दर्शा रही है, जिससे मातृभाषा में शिक्षा और ज्ञान के प्रसार को बढ़ावा मिलेगा। मातृभाषा में शिक्षा और वैज्ञानिक विकास से भारत एक सशक्त और आत्मनिर्भर राष्ट्र बनने की दिशा में बढ़ रहा है। जब ज्ञान, विज्ञान, तकनीकी और चिकित्सा को मातृभाषा में विकसित किया जाएगा, तो देश के विकास की गति तेज होगी। यह न केवल सांस्कृतिक पहचान को सुदृढ़ करेगा, बल्कि वैश्विक स्तर पर भारत की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता भी बढ़ाएगा। केंद्र सरकार के इस महती प्रयास को आगे बढ़ाने के लिए समाज और शिक्षाविदों को भी एकजुट होकर कार्य करना चाहिए, जिससे 2047 तक 'विकसित भारत' का सपना साकार हो सकेगा।