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तकनीक ने बदली भाषा की दिशा: हिंदी का बढ़ रहा कद

भारत का पहला सरकारी मल्टी एआइ मॉडल 'भारतजेन' वर्तमान में हिंदी सहित नौ भाषाओं में सरकारी कामकाज और शिक्षा के लिए उपयोगी साबित हो रहा है। यह जून 2026 तक सभी 22 भारतीय भाषाओं में उपलब्ध होगा।

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जयपुर

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Opinion Desk

Jan 10, 2026

-डॉ. सचिन बत्रा वरिष्ठ पत्रकार एवं तकनीकी विशेषज्ञ

आज विश्व हिंदी दिवस के मौके पर हम गर्व कर सकते हैं कि हमारी हिंदी भाषा नेपाल, फिजी, मॉरीशस, गुयाना, युगांडा, सूरीनाम, सिंगापुर, मलेशिया, संयुक्त अरब अमीरात, न्यूजीलैंड, कनाडा, अमरीका, यूके और त्रिनिदाद व टॉबैगो सहित जर्मनी, फ्रांस, रूस, दक्षिण अफ्रीका, नीदरलैंड व इटली में समझी, बोली व लिखी जाती है। कई देशों जैसे सूरीनाम, मॉरीशस और फिजी ने तो हिंदी को क्षेत्रीय भाषा के रूप में मान्यता दी है।

विजुअल कैपिटलिस्ट की रिपोर्ट के अनुसार दुनिया की तीसरी प्रमुख भाषा हिंदी का उपयोग 610 मिलियन लोग करते हैं। वहीं स्टेटिस्टा डॉट कॉम की रिपोर्ट में हिंदी भाषा में इंटरनेट उपभोक्ताओं की संख्या 500 मिलियन बताई है। ऐसे में हिंदी भाषा के डिजिटल समाधान और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के औजार अब तेजी से विकसित हो रहे हैं। सुखद बात यह भी है कि हमारे देश में आज हिंदी को राजनीतिक प्राथमिकता और संरक्षण दिए जाने की वजह से ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। भारत सरकार ने 2022 में राष्ट्रीय भाषा अनुवाद मिशन एनएलटीएम की शुरुआत करते हुए कृत्रिम बुद्धिमत्ता से हिंदी सहित अन्य भारतीय भाषाओं में अनुवाद की पहल की। वहीं भारतीय मीडिया ने भी हिंदी समाधानों के अनगिनत कृत्रिम बुद्धिमत्ता के औजार विकसित किए। इंडियन पब्लिशर डॉट कॉम के मुताबिक 2022 में हमारे मीडिया ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता संचालित समाचार लेखन के समाधानों पर 20 मिलियन डॉलर खर्च किए। मीडियानामा की रिपोर्ट में बताया गया है कि वर्ष 2023 में भारत का आधा मीडिया, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित अनुवाद करने लगा और 30 प्रतिशत समाचार एजेंसियां कृत्रिम बुद्धिमत्ता से लैस हैं। वर्ष 2025 में लगभग 80 प्रतिशत भारतीय मीडिया कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित समाचार प्लेटफार्म विकसित कर चुका है।

भारत का पहला सरकारी मल्टी एआइ मॉडल 'भारतजेन' वर्तमान में हिंदी सहित नौ भाषाओं में सरकारी कामकाज और शिक्षा के लिए उपयोगी साबित हो रहा है। यह जून 2026 तक सभी 22 भारतीय भाषाओं में उपलब्ध होगा। इसी प्रकार आइआइटी बॉम्बे के सहयोग से विकसित 'भाषिनी' प्लेटफॉर्म हिंदी व 21 भारतीय भाषाओं के लिए टेक्स्ट-टू-स्पीच, स्पीच-टू-टेक्स्ट और अनुवाद की एआइ सुविधा दे रहा है। 'आखर' एआइ तो हिंदी के लिए वॉयस टाइपिंग और सुझाव दे रहा है। दुनिया में तीसरी सर्वाधिक बोली जाने वाली हिंदी भाषा को बाजार ने भी हाथों हाथ लिया। लिहाजा विश्व की प्रमुख कंपनियां भी अंग्रेजी का मोह छोड़ हिंदीमय हो गई हैं। जैसे गूगल का जेमिनी, ओपनएआइ का चैटजीपीटी और एनवीडिया का नेमोट्रॉन-4-मिनी-हिंदी-4बी हिंदी से लैस हो गए हैं। कॉग्निस्पार्क का हिंदी एआइ न्यूज एंकर तो वास्तविक समय में हिंदी समाचार प्रसारण के लिए एआइ टेक्स्ट, वीडियो और वॉयस-ओवर जनरेटर का उपयोग कर रहा है।

आज 'एआइ4भारत' अभियान के तहत 'इंडिकबार्ट' और 'एमबार्ट' एआइ औजार हिंदी के डिजिटल हितैषी बन गए हैं। एक अरसा पहले तक डेटा की कमी के चलते एल्गोरिदम्म प्रशिक्षण की गति धीमी थी और महंगी तकनीक एक चुनौती। एआइ पर लगातार बढ़ती निर्भरता, बचने वाले समय और समाधानों की वैश्विक मांग के चलते भारत सरकार, निजी संस्थान और मीडिया अपने स्तर पर एआइ के नए समाधान खोजकर मील का पत्थर जोड़ रहे हैं। उम्मीद है कि हिंदी भाषा में एआइ के कई करिश्माई औजार व नवाचार जल्द ही हमारे सामने होंगे।