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संपादकीय : पौधों को संतान की तरह पालने का सुख सबसे बड़ा

अक्सर देखा जाता है कि पौधरोपण अभियान चलाकर पौधे लगाने का काम होता भी है तो उनकी देखभाल ढंग से नहीं की जाती। यही कारण है कि हरियाली आंकड़ों में ज्यादा और धरातल पर कम दिखाई देती है।

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Jun 15, 2026
planting a small Plant

सहसा विश्वास नहीं होता कि कोई व्यक्ति अपनी पीड़ा को आंसुओं में बदलने की जगह हरियाली में बदल दे। मध्यप्रदेश के रीवा जिले के दीनानाथ कोल और उनकी पत्नी ने संतान नहीं होने पर पेड़ों को ही अपनी संतान मान लिया और पिछले 36 साल में 10 हजार से अधिक पौधे न सिर्फ लगाए बल्कि उन्हें पाल-पोसकर वृक्ष भी बनाया। कोल दंपत्ति का यह संकल्प इसलिए भी अहम है क्योंकि ‘हरियाली है तो जल है और जल है तो कल है’ की सच्चाई को जानते तो सब हैं लेकिन अपने जीवन में इसे अपनाते हुए कर्मशील रहने वाले बिरले ही होते हैं।
देश में हर बार साल में एक दिन पर्यावरण दिवस के रूप में मनाया जाता है। सरकारी और गैर सरकारी संस्थाएं और आम जनता की ओर से भी इस दिन बड़ी संख्या में पौधरोपण होता हैं। कुछ लोग एवं संस्थाएं हरियाली बढ़ाने के जतन गंभीरता से कर भी रहे हैं लेकिन रस्मअदायगी भी कम नहीं होती। हर साल पौधरोपण के नाम पर सरकारें करोड़ों रुपए के बजट प्रावधान रखती हैं, लेकिन इसका सदुपयोग पूरी तरह होता दिखता ही नहीं। दिखावे के लिए पौधरोपण करना एक बात है और इन्हें पेड़ बनाना दूसरी बात। ‘भ्रष्टाचार की पौध’ से कागजों में हरियाली और धरातल पर कुछ नहीं जैसी खबरें आए दिन सुर्खियां बनती है।
हाल में राजस्थान में भी कागजों में हरियाली दिखाने का भ्रष्टाचार उजागर हुआ है। प्रारंभिक जांच में पता चला कि पौधरोपण अभियान में बिना पौधे लगाए ही करोड़ों रुपए का भुगतान उठा लिया गया। कागजों में हरियाली दिखाकर करोड़ों रुपए हजम कर जाने के मामले राजस्थान में ही नहीं देश भर में अलग-अलग राज्यों में गाहे-बगाहे सामने आते रहते हैं। अक्सर देखा जाता है कि पौधरोपण अभियान चलाकर पौधे लगाने का काम होता भी है तो उनकी देखभाल ढंग से नहीं की जाती। यही कारण है कि हरियाली आंकड़ों में ज्यादा और धरातल पर कम दिखाई देती है। यदि एक परिवार दस हजार पौधे लगाकर उन्हें पेड़ बनाने का काम कर सकता है तो हजारों कर्मचारियों वाले वन विभाग के माध्यम से यह काम क्यों नहीं हो सकता? हर लगाया गया पौधा प्रकृति को सुरक्षित और हमारे भविष्य को हरा-भरा बनाने की दिशा में एक सार्थक कदम है। वृक्ष, मानव जाति का वह सबसे अच्छा मित्र है जो हमें सिर्फ देता ही है, हमसे कुछ लेता नहीं है। पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ वृक्ष आर्थिक प्रगति में भी भागीदार बन सकते हैं। दीनानाथ कोल के प्रयासों का एक अंश भी सब अनुसरण करने लग जाएं तो इससे अच्छा क्या हो सकता है।
ऐसे लोग प्रोत्साहन के साथ-साथ सम्मान के भी हकदार हैं। प्रकृति को और सुंदर बनाना है तो सिर्फ एक दिन की रस्म अदायगी से कुछ नहीं होने वाला। पौधा लगाना ही काफी नहीं उसके वृक्ष बनने तक देखभाल करना अपनी आदत में शुमार करना होगा।

Published on:
15 Jun 2026 04:34 pm