
राजधानी रायपुर में यातायात और परिवहन व्यवस्था को लेकर पहले भी कई प्रयोग किए जा चुके हैं। जैसे कि किसी मार्ग को एकल करना, रोटेटरी हटाना, किसी मार्ग पर तिपहिया और चारपहिया वाहनों को प्रतिबंधित करना, शहर में आने-जाने के लिए बीआरटीएस (बस रैपिड ट्रांजिट सिस्टम), सिटी बसें चलाना आदि। इतना सब करने के बाद भी स्मार्ट सिटी रायपुर की यातायात व्यवस्था और आवागमन के लिए सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था ठीक नहीं हो पा रही है।
राजधानी के संकरे और भीड़भाड़ वाले मार्गों पर सिटी बसें चलाने से कई तरह की दिक्कतें सामने आ रही थीं, जिसमें प्रमुख है सिटी बसों का बड़े आकार का होना। बड़ी सिटी बसों के कारण राजधानी के अंदर यातायात व्यवस्था चरमरा जा रही थी। छोटी और संकरी सड़कें होने की वजह से रोजाना इनमें ट्रैफिक जाम हो रहा था। इस वजह से कुछ मार्गों से सिटी बसें हटा ली गई। चूंकि सार्वजनिक परिवहन की उचित और सस्ती व्यवस्था नहीं बन पा रही, जिसकी वजह से आमलोगों को आर्थिक नुकसान तो उठाना ही पड़ रहा, साथ ही समय भी खराब हो रहा है।
लोगों को शहर के अंदर आवागमन के लिए सुलभ सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था की जरूरत लंबे समय से महसूस हो रही है। इसे देखते हुए राजधानी में माइक्रो बस के रूप में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था का नया प्रयोग किया जा रहा है। यह पायलट प्रोजेक्ट केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय के मार्गदर्शन में काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वॉटर (सीईईडब्ल्यू), छत्तीसगढ़ परिवहन विभाग और रायपुर नगर निगम के संयुक्त सहयोग से शुरू किया गया है। 17 से 20 सीटों वाली आठ छोटी बसें फिलहाल दो रूटों पर चलाई गई हैं। यह एक अच्छी पहल नजर आ रही है, क्योंकि छोटी बसें होने के कारण घनी आबादी वाले क्षेत्रों में भी ये आ-जा सकेंगी। इससे लोगों को इन क्षेत्रों में आवागमन की सुविधा मिल सकेगी। लोगों को जब सस्ती और सुलभ सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था उपलब्ध हो जाएगी, तो ऐसे मार्गों पर वाहनों का अनावश्यक दबाव कम हो जाएगा। इससे प्रदूषण भी कम होगा और दिनोंदिन महंगे होते जा रहे ईंधन की वजह से अनावश्यक रूप से ढीली हो रही जेब को भी थोड़ी राहत मिल सकेगी।-अनुपम राजीव राजवैद्य anupam.rajiv@in.patrika.com
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Published on:
15 Jun 2026 12:40 pm
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