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प्रसंगवश: रोडवेज बस संचालन में यात्री भार की आड़ क्यों?

आजादी के 78 साल बाद भी गांवों तक सरकारी परिवहन सेवा का न पहुंचना विकास के दावों पर सवाल खड़े करता है। सार्वजनिक परिवहन केवल सुविधा नहीं, बल्कि ग्रामीणों को शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम है। दूरदराज क्षेत्रों में नियमित और भरोसेमंद बस सेवा सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए।
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जयपुर

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Harish Parashar

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Updated: 6 Aug 2026, 4:47 PM IST

roadways buses

roadways buses

पिछले ७८ साल तक किसी गांव में सरकारी परिवहन सेवा पहुंची ही नहीं हो तो इसे क्या कहेंगे? चुनाव के मौकों पर शिक्षा, स्वास्थ्य और पानी-बिजली के साथ सार्वजनिक परिवहन तक की सुविधा पहुंचाने का दावा करने वाले नेताओं की कथनी और करनी में फर्क इसके लिए जिम्मेदार है। यह तो तब है जब प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत अधिकांश गांव शहरों से जुड़ गए हैं। अजमेर जिले का चांपानेरी गांव में आजादी के बाद पहली बार रोडवेज बस पहुंचने पर ग्रामीणों ने जश्न मनाया। उनका उत्साह लाजिमी भी है। लेकिन यह कोई दुर्गम इलाका नहीं था, जहां रोडवेज की बस पहुंचाना मुश्किल हो। जिला मुख्यालय से महज एक सौ किलोमीटर दूर के गांवों को रोडवेज बस सेवाओं से वंचित रखना दुर्भाग्यजनक है। सच कहा जाए तो चांपानेरी में ग्रामीणों का यह उत्साह वहां के जनप्रतिनिधियों के मुंह पर करारे तमाचे से कम नहीं। बात सिर्फ अजमेर के इस गांव की ही नहीं। अभी भी प्रदेश के कई गांव-कस्बे निजी परिवहन सेवाओं के भरोसे ही हैं। कहीं रोडवेज की बस सेवा संचालित हो भी रही है तो वहां भी मनमानी कम नहीं। कभी बिना सूचना बसों का संचालन बंद कर दिया जाता है तो कभी खटारा बसें मार्ग पर उतार दी जाती हैं। जब कभी ग्रामीणों की ओर से रोडवेज बस सेवाएं शुरू करने की मांग की जाती है तो यात्री भार कम होनेे का हवाला दिया जाता है।

सवाल यह है कि क्या सरकार जनसुविधाएं उपलब्ध कराने में भी नफे-नुकसान का आकलन करेगी? क्या गांवों का शहरों से आसान संपर्क नहीं होना चाहिए? और सबसे बड़ी बात यह भी कि यदि सिर्फ यात्री भार का ही बहाना है तो फिर परिवहन विभाग उन्हीं मार्गों पर निजी बस संचालकों को परमिट क्यों जारी कर देता है? विधानसभा का कोई भी सत्र ऐसा नहीं होता जिसमें रोडवेज बस सेवाओं के संचालन की खामियों को लेकर सवाल नहीं उठते हो। सरकार को निजी बस सेवाओं की मनमानी रोकनी है तो दूरदराज के इलाकों तक अपनी बसों की नियमित पहुंच सुनिश्चित करनी ही होगी।